पेराई सीजन शुरू होने से पहले: गन्ना किसान के 10 जरूरी काम, वरना पर्ची और पेमेंट दोनों अटकेगा

अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में हलचल तेज हो गई है। बिजनौर की चीनी मिलों ने इस सत्र के भुगतान के लिए बैंकों से करीब 1605 करोड़ रुपये का सीसीएल मांगा है, ताकि पेराई शुरू होते ही किसानों का भुगतान समय पर हो सके। मुजफ्फरनगर की मोरना मिल में किसान 25 अक्टूबर से पेराई शुरू कराने की मांग को लेकर धरना दे चुके हैं। लेकिन हर साल पेराई के साथ वही पुरानी शिकायतें लौट आती हैं — पर्ची देर से मिली, वजन में गड़बड़ी हुई, पेमेंट अटक गया। इसलिए मिल चलने से पहले ये 10 काम निपटा लें, तो पूरा सीजन बेफिक्र कटेगा।
1. सट्टा और खेत का डेटा ई-गन्ना ऐप पर अभी जांचें
सबसे पहला काम अपने गन्ना सट्टे और खेत के सर्वे डेटा की जांच है। ई-गन्ना ऐप या caneup.in पोर्टल पर जाकर देखें कि आपके नाम, खेत का रकबा और सट्टा सही दर्ज है या नहीं। सर्वे में छोटी सी गलती — जैसे रकबा कम दर्ज होना या खेत का गलत अंकन — सीजन भर पर्ची और भुगतान में दिक्कत देती है। अगर कोई गड़बड़ी दिखे तो गन्ना समिति या संबंधित अधिकारी से तुरंत संपर्क करें, क्योंकि सीजन शुरू होने के बाद सुधार कराना मुश्किल हो जाता है।
2. पर्ची-कैलेंडर का चक्र समझ लें
गन्ना आपूर्ति का पूरा सिस्टम पर्ची और कैलेंडर पर चलता है। आपकी पर्ची कब आएगी, कितना गन्ना किस तारीख को देना है — यह सब कैलेंडर में पहले से तय रहता है। पर्ची मिलने के बाद गन्ना कटाई और ढुलाई की तैयारी उसी के हिसाब से करें। कई किसान पर्ची का इंतजार तो करते हैं, लेकिन कटाई पहले से शुरू कर देते हैं, जिससे गन्ना सूखने लगता है और वजन घटता है। पर्ची का संदेश या ई-स्लिप आते ही काम शुरू करें, न पहले, न बहुत बाद में।
3. इस साल का भाव — क्या तय है, क्या अभी बाकी है
भाव को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम रहता है, इसलिए तथ्य साफ रखें। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य परामर्शित मूल्य यानी एसएपी इस तरह तय किया था: अगेती प्रजाति 400 रुपये, सामान्य प्रजाति 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति 355 रुपये प्रति क्विंटल। लेकिन ध्यान रहे, यह पिछले सत्र का भाव है। पेराई सत्र 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। किसान संगठन भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं और इसको लेकर धरने-प्रदर्शन भी चल रहे हैं, पर सरकार की ओर से नई दर का ऐलान बाकी है। कोई भी दर तभी मानें जब वह आधिकारिक घोषणा के साथ आए।
4. पेमेंट का कानूनी हक — 14 दिन, फिर 15 प्रतिशत ब्याज
गन्ना (आपूर्ति और खरीद विनियमन) के नियमों के तहत चीनी मिल को गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर बकाया राशि पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का प्रावधान है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार की उस चुनौती को खारिज कर दिया था, जिसमें 15 प्रतिशत ब्याज की दर को कम करने की मांग की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कहा था कि रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत 1936 करोड़ रुपये की वसूली में ब्याज का “एक पैसा भी वसूल नहीं” किया गया। इसका मतलब यह है कि अगर आपका भुगतान 14 दिन से ज्यादा अटका है, तो ब्याज मांगना आपका कानूनी हक है। मांग लिखित में करें और तौल पर्चियां संभालकर रखें।
5. किस्म चुनते वक्त रेड रॉट को ध्यान में रखें
यूपी में सबसे ज्यादा लगाई जाने वाली किस्म Co-0238 (करन 4) रेड रॉट बीमारी की चपेट में है। इसका असर साफ दिख रहा है — राज्य का चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.5 लाख टन रह गया है, और चीनी रिकवरी भी 11.73 प्रतिशत से घटकर 10.83 प्रतिशत पर आ गई है। अच्छी खबर यह है कि 29 सितंबर को हुई किस्म अनुमोदन समिति की बैठक में चार नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी मिली है — अगेती पकने वाली CoS.23232, मध्यम और देर से पकने वाली CoS.19235 और CoS.18232, तथा आईसीएआर-आईआईएसआर लखनऊ की CoLk.21201। नई किस्म CoS.23232 के लिए 9 अक्टूबर को ऑनलाइन बुकिंग खुलते ही पांच मिनट में दो लाख बड्स बुक हो गए थे। रोगग्रस्त खेत का बीज दोबारा न लगाएं और बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर कराएं।
6. तौल पर्ची और वजन पर पूरी नजर रखें
गन्ना तौलते समय क्रय केंद्र पर मौजूद रहें और तौल पर्ची तुरंत लेकर संभालकर रखें। वजन में अगर संदेह हो तो उसी समय आपत्ति दर्ज कराएं — बाद में वजन का विवाद साबित करना लगभग असंभव होता है। अब कई क्रय केंद्रों पर डिजिटल वेब्रिज और लाइव वजन ट्रैकिंग की सुविधा भी आ रही है, उसका इस्तेमाल करें। तौल पर्ची ही आपके भुगतान का आधार है, इसलिए हर पर्ची की फोटो या प्रति अलग से रखना अच्छी आदत है।
7. कटाई और ढुलाई की एडवांस तैयारी करें
पर्ची आते ही गन्ना तैयार होना चाहिए। कटाई के मजदूर और ट्रैक्टर-ट्रॉली पहले से तय कर लें, क्योंकि सीजन में इनकी मांग बढ़ जाती है और दाम भी चढ़ जाते हैं। गन्ना काटने के बाद ज्यादा देर खेत में न रहने दें — कटे गन्ने का वजन हर दिन घटता है और चीनी की रिकवरी भी गिरती है। साफ-सुथरा, पत्ती हटाया हुआ गन्ना तौल में भी बेहतर रहता है।
8. कोल्हू या मिल — फैसला सोच-समझकर लें
पेराई शुरू होने से पहले कोल्हू और क्रशर चल पड़ते हैं और वहां नकद भुगतान मिलता है, जो कई किसानों को आकर्षित करता है। लेकिन मिल की पर्ची-आधारित आपूर्ति का रिकॉर्ड, भुगतान की गारंटी और ब्याज का हक कोल्हू पर नहीं मिलता। कोल्हू पर भाव बाजार के हिसाब से ऊपर-नीचे होता रहता है। इसलिए जल्दबाजी में सस्ता गन्ना न बेचें — दोनों विकल्पों के फायदे-नुकसान तौलकर ही फैसला लें।
9. पुराना बकाया हो तो रिकॉर्ड तैयार रखें
अगर पिछले सत्रों का भुगतान अभी तक बकाया है, तो उसकी तौल पर्चियां, भुगतान की रसीदें और बकाया राशि का हिसाब एक फाइल में तैयार रखें। ब्याज के दावे के लिए यही कागजात काम आएंगे। शिकायत के लिए गन्ना समिति, जिला गन्ना अधिकारी या जिलाधिकारी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। रिकॉर्ड के बिना बकाया वसूली की लड़ाई कमजोर पड़ जाती है।
10. हेल्पलाइन नंबर फोन में सेव कर लें
जरूरत के समय नंबर ढूंढने में वक्त बर्बाद न हो, इसलिए ये आधिकारिक नंबर अभी सेव कर लें — टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129, तथा सरकारी एसएमएस सेवा के लिए 51969। पर्ची, भुगतान या सर्वे से जुड़ी किसी भी समस्या पर इन्हीं आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।
आपके सवाल
पेराई सत्र 2026-27 का गन्ना भाव कब घोषित होगा? अभी इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है। पेराई शुरू होने से पहले दर घोषित होने की उम्मीद है। तब तक संदर्भ के लिए पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी — अगेती 400 रुपये, सामान्य 390 रुपये, अनुपयुक्त 355 रुपये प्रति क्विंटल — ही मान्य दर है।
भुगतान 14 दिन में न आए तो क्या करें? देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज आपका कानूनी हक है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। तौल पर्चियों के साथ लिखित में ब्याज की मांग करें।
क्या Co-0238 किस्म लगाना अब सही रहेगा? रेड रॉट के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इस किस्म पर जोखिम बढ़ा है। राज्य ने चार नई किस्मों को मंजूरी दी है, उन पर विचार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
पर्ची समय पर न मिले तो कहां शिकायत करें? पहले ई-गन्ना ऐप या caneup.in पर अपनी स्थिति जांचें, फिर अपनी गन्ना समिति से संपर्क करें। समाधान न हो तो जिला गन्ना अधिकारी या हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत दर्ज कराएं।
स्रोत: दैनिक जागरण, किसानइंडिया, अमर उजाला, ट्रैक्टर जंक्शन, इंडियन एक्सप्रेस, चिनीमंडी, रूरल वॉयस, मथृभूमि इंग्लिश।
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