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गन्ना रकबा 3 साल में 4% गिरा — किसान मक्का-धान की ओर शिफ्ट, चीनी उत्पादन 14% कम

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 24, 2026 • 3 min read
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गन्ना रकबा 3 साल में 4% गिरा — किसान मक्का-धान की ओर शिफ्ट, चीनी उत्पादन 14% कम
अंतिम अपडेट: August 24, 2026 9:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

Ground Report: देश और उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पिछले 3 वर्षों में गन्ने के रकबे (Sugarcane Acreage) में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते कुल चीनी उत्पादन में 14% तक की भारी कमी आई है। कम लाभकारी मूल्य (SAP), भुगतान में देरी और रेड रॉट (Red Rot) रोग के कारण किसान अब गन्ने से दूरी बनाकर मक्का और धान की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।

📊 3 साल में गन्ने और चीनी उत्पादन के आंकड़े

पैरामीटर3 साल पहलेवर्तमान (2026)सीधा असर / बदलाव
कुल गन्ना रकबा~60.5 लाख हेक्टेयर58.31 लाख हेक्टेयर~4% की गिरावट
चीनी उत्पादन~360 लाख टन~310 लाख टन~14% की कमी
खरीफ 2026 बुवाई58.60 लाख हेक्टेयर58.31 लाख हेक्टेयरपिछले साल से कम

🌾 किसान मक्का-धान की ओर क्यों मुड़ रहे हैं?

गन्ने की खेती में सालभर मेहनत के बाद भी पर्याप्त मुनाफा न मिलने से किसान विकल्पों की तलाश में हैं:

  • 💸 कम SAP और बढ़ती लागत: डीजल, कीटनाशक और मजदूरी में भारी उछाल आया है, लेकिन गन्ने का सरकारी भाव (SAP) उस अनुपात में नहीं बढ़ा।
  • ⏳ भुगतान में देरी: नियमों के तहत 14 दिन में भुगतान होना चाहिए, मगर किसानों को मिलों से महीनों तक पैसे का इंतज़ार करना पड़ता है।
  • 🦠 रेड रॉट (Red Rot) का कहर: लोकप्रिय किस्म Co-0238 में लाल सड़न बीमारी से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो गई।
  • ⚡ मक्का और धान में कम जोखिम: मक्का और धान 3 से 4 महीने में तैयार हो जाते हैं। इनमें लागत कम लगती है और फसल कटते ही मंडियों में तुरंत नकदी हाथ में आ जाती है।

📍 खरीफ 2026 बुवाई की स्थिति

कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 सीजन में गन्ने की कुल बुवाई 58.31 लाख हेक्टेयर रही है:

  • UP और हरियाणा: इन राज्यों में रकबे में मामूली बढ़त या स्थिरता बनी हुई है।
  • महाराष्ट्र और दक्षिण भारत: मानसूनी अनिश्चितता और पानी की कमी से रकबे में बड़ी गिरावट देखी गई है।

⚠️ अर्थव्यवस्था और बाजार पर असर

  1. चीनी के दाम में तेजी: उत्पादन घटने से थोक और खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें ₹40 से ₹65/kg तक पहुंच गई हैं।
  2. आयात पर निर्भरता: घरेलू मांग पूरी करने के लिए सरकार को 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति देनी पड़ी है।
  3. एथेनॉल ब्लेंडिंग पर असर: गन्ने की कमी से 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के राष्ट्रीय लक्ष्य पर भी दबाव बढ़ेगा।

💡 सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?

  • 📈 SAP में सम्मानजनक बढ़ोतरी: गन्ने का भाव कम से कम ₹450-500 प्रति क्विंटल तय किया जाए।
  • ⏱️ 14 दिन में अनिवार्य भुगतान: भुगतान में देरी करने वाली मिलों पर 15% ब्याज और सख्त कार्रवाई हो।
  • 🧬 रोग-प्रतिरोधी नई किस्में: Co-0118, Co-15023 जैसी उन्नत और रेड रॉट मुक्त किस्मों के बीज रियायती दरों पर दिए जाएं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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