गन्ने के रस से एथेनॉल बनाना बंद: 16 अक्टूबर को 1100 करोड़ लीटर का टेंडर जारी, यूपी की 122 मिलों पर क्या असर होगा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों का नया पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एथेनॉल नीति पर सबसे बड़ा फैसला ले लिया है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्टूबर 2026 को एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए लगभग 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद का टेंडर जारी कर दिया है — और इसमें साफ कहा गया है कि गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद इस बार नहीं होगी।
यह वही रोक है, जिसकी आशंका दो हफ्ते पहले जताई गई थी। तब फैसला विचाराधीन था, लेकिन अब टेंडर दस्तावेज़ में सरकार का निर्देश दर्ज है: एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में चीनी का डायवर्जन शून्य किया जाएगा। यानी नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल के लिए गन्ने से बने कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं होगा।
सवाल यह है कि देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश के किसानों और 122 चीनी मिलों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है। आइए, टेंडर की पूरी तस्वीर समझते हैं।
टेंडर की 6 बड़ी बातें
पहली बात — टेंडर का आकार। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की ओर से बीपीसीएल ने जारी इस टेंडर में एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए कुल 11 अरब लीटर यानी 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह खरीद नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 के बीच चार तिमाहियों में बंटी है — पहली दो तिमाहियों में 300-300 करोड़ लीटर और बाद की दो तिमाहियों में 250-250 करोड़ लीटर।
दूसरी बात — गन्ने से बने एथेनॉल की खरीद पूरी तरह बंद। टेंडर दस्तावेज़ में साफ लिखा है: “भारत सरकार ने निर्देश दिए हैं कि एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए चीनी का डायवर्जन शून्य किया जाए।” गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए इस बार कोई ऑफर नहीं मांगा गया है।
तीसरी बात — मक्का से बने एथेनॉल का प्रोत्साहन घटा। सरकार ने मक्का-आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी है, जो पहले 71.86 रुपये थी। इसी तरह मक्का पर मिलने वाला प्रोत्साहन भी 5.79 रुपये से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
चौथी बात — कौन-से फीडस्टॉक अनुमत रहेंगे? टेंडर में मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी। ध्यान दीजिए — सी-हेवी शीरा वह बचा हुआ शीरा है, जिससे सारी चीनी पहले ही निकाली जा चुकी होती है, इसलिए उस पर रोक नहीं लगी है।
पांचवीं बात — ई20 का लक्ष्य बरकरार। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा। सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू चीनी आपूर्ति — दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाकर चला जाएगा।
छठी बात — फैसला तत्काल प्रभावी। यह टेंडर एथेनॉल सप्लाई ईयर के शुरू होते ही लागू होगा, यानी 1 नवंबर 2026 से गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल की खरीद बंद।
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
तीन साफ कारण हैं — घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें चढ़ रही हैं, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से अगले सत्र के उत्पादन पर अनिश्चितता है, और जब खाद्य आपूर्ति तंग हो, तो सरकार गन्ने को ईंधन में डायवर्ट करने की इजाजत नहीं दे सकती। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देश के रूप में भारत ने फिलहाल खाद्य आपूर्ति को प्राथमिकता दी है।
यूपी के गन्ना किसानों पर सीधा असर
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां 122 चीनी मिलें संचालित हैं। एथेनॉल की आय पिछले कुछ वर्षों में मिलों की आमदनी का अहम हिस्सा बन गई थी, इसलिए यह फैसला मिलों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालेगा। किसानों के नजरिए से चार बातें समझनी जरूरी हैं:
1. गन्ने की खपत चीनी की ओर लौटेगी। जब गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल नहीं बनेगा, तो मिलें पूरा गन्ना चीनी बनाने में लगाएंगी। इससे चीनी का उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन घरेलू कीमतों पर दबाव भी बन सकता है।
2. मिलों की आय पर दबाव, भुगतान पर नजर रखें। एथेनॉल से मिलने वाली आय अचानक बंद होने से मिलों की नकदी स्थिति तंग हो सकती है। ऐसे में किसानों को अपने गन्ना भुगतान की स्थिति पर पहले से ज्यादा नजर रखनी चाहिए और ई-गन्ना (caneup.in) पर पर्ची व भुगतान की जानकारी नियमित चेक करनी चाहिए।
3. मक्का किसानों के लिए भी संदेश। मक्का-आधारित एथेनॉल की कीमत में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती से अनाज-आधारित डिस्टिलरी की कमाई घटेगी। यानी सरकार ने चीनी आधारित के साथ-साथ अनाज-आधारित एथेनॉल पर भी खर्च पर लगाम कसी है।
4. लंबे समय में चीनी की कीमतें ही तय करेंगी भाव। अगर चीनी का उत्पादन बढ़ता है और कीमतें स्थिर रहती हैं, तो मिलों की भुगतान क्षमता बनी रहेगी। लेकिन अगर कीमतें गिरती हैं, तो अगली बार एफआरपी/एसएपी की बहस तेज हो सकती है।
ई20 कार्यक्रम: लक्ष्य वही, रास्ता बदला
गौर करने वाली बात है कि सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम बंद नहीं किया है — सिर्फ कच्चे माल का स्रोत बदला है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का राष्ट्रीय मानक बना रहेगा, लेकिन 2026-27 में जोर मक्का, टूटे चावल, एफसीआई के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे पर होगा। एथेनॉल निर्माताओं के संगठन एडआ (AIDA) ने मक्का-आधारित एथेनॉल के लिए उचित प्रोत्साहन और घरेलू चीनी की जरूरत पूरी होने की शर्त पर चीनी-आधारित फीडस्टॉक में लचीलेपन की मांग रखी है।
किसान क्या करें?
पेराई सत्र शुरू होने वाला है और मिलें इस बार पूरा गन्ना चीनी उत्पादन में लगाएंगी — इसलिए अपनी पर्ची और सर्वे का रिकॉर्ड दुरुस्त रखें। एथेनॉल की आय बंद होने से मिलों की नकदी तंग हो सकती है, इसलिए caneup.in या ई-गन्ना ऐप पर भुगतान की स्थिति नियमित चेक करें। और याद रखें — 14 दिन में भुगतान न होने पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का कानूनी अधिकार आपके पास है।
आपके सवाल
क्या गन्ने से एथेनॉल बनाना पूरी तरह बंद हो गया है? एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के सरकारी टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं होगी। सी-हेवी शीरे से बना एथेनॉल अनुमत रहेगा।
इस फैसले से गन्ने के भाव पर क्या असर पड़ेगा? सीधा असर गन्ने के भाव पर नहीं, बल्कि मिलों की आय संरचना पर पड़ेगा। मिलें अब गन्ने से ज्यादा चीनी बनाएंगी। चीनी की कीमतें स्थिर रहीं तो भुगतान क्षमता बनी रहेगी।
मक्का से बने एथेनॉल की कीमत कितनी घटी? खरीद कीमत 71.86 रुपये से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर की गई है, और प्रोत्साहन 5.79 रुपये से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
क्या ई20 पेट्रोल बंद हो जाएगा? नहीं। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य जारी है। सिर्फ एथेनॉल बनाने का कच्चा माल बदला गया है — अब जोर मक्का, टूटे चावल, एफसीआई के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे पर होगा।
यूपी की मिलों पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? एथेनॉल से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा इस सत्र में नहीं मिलेगा, जिससे मिलों की नकदी स्थिति तंग हो सकती है। किसानों को अपने भुगतान पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
स्रोत: ईटीवी भारत (पीटीआई, 18 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान टाइम्स (18 अक्टूबर 2026), द इकनॉमिक टाइम्स — एनर्जी वर्ल्ड (18 अक्टूबर 2026), द हिंदू (18 अक्टूबर 2026)।
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