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आज आखिरी मौका: 10 अक्टूबर तक गन्ना समिति सदस्यता नहीं ली तो सरकारी भाव पर मिल को गन्ना नहीं बिकेगा — 2 नई किस्में भी मिलीं

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 6 min read
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आज आखिरी मौका: 10 अक्टूबर तक गन्ना समिति सदस्यता नहीं ली तो सरकारी भाव पर मिल को गन्ना नहीं बिकेगा — 2 नई किस्में भी मिलीं
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 9:33 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

आज, 10 अक्टूबर का दिन प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए बेहद अहम है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता लेने और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तारीख आज ही है। जो किसान अभी तक समिति के सदस्य नहीं बने हैं या अधिक उपज का आवेदन नहीं भर पाए हैं, उनके पास अब सिर्फ आज का दिन बचा है। इसके बाद इस सीजन में सरकारी भाव पर गन्ना आपूर्ति का रास्ता बंद हो सकता है।

गन्ना आयुक्त के आदेश के मुताबिक, पहले सदस्यता और उपज बढ़ोतरी आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी। हाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति में कई इलाकों में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा और फसल खेतों में गिर गई। ऐसे में किसानों ने समय बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने किसानों की इस मांग को मानते हुए 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया, जिसकी आखिरी तारीख आज है।

सदस्यता क्यों जरूरी है

सरकारी भाव पर चीनी मिलों को गन्ना बेचने के लिए किसान का गन्ना समिति का सदस्य होना जरूरी है। यह प्रक्रिया खास तौर पर उन किसानों के लिए बेहद अहम है, जिन्होंने पहली बार गन्ने की खेती की है या फिर कई साल के अंतराल के बाद इस बार गन्ना बोया है। समिति के सदस्य न बन पाने की स्थिति में ऐसे किसान इस पेराई सत्र में सरकारी दर पर गन्ना आपूर्ति का लाभ नहीं उठा पाएंगे।

गन्ना आयुक्त ने अपील की है कि जिन किसानों ने पहली बार गन्ने की खेती की है, वे आज ही समिति सदस्य बनें और राज्य सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य दर पर गन्ना आपूर्ति का लाभ लें। गन्ना किसानों के अधिक से अधिक सदस्य बनने से मिलों को गन्ने की उपलब्धता भी बढ़ेगी, जिससे पेराई सत्र सुचारु चल सकेगा।

उपज बढ़ोतरी आवेदन का आज आखिरी दिन

जिन किसानों के खेत में गन्ने की उपज जिले की औसत उपज से अधिक है, वे आज तक उपज बढ़ोतरी के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं। बाराबंकी के कृषक गोष्ठी में चीनी मिल के महाप्रबंधक (गन्ना) बृजपाल सिंह ने साफ कहा कि पंजीकरण और नए सदस्य बनने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। उन्होंने किसानों से समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है, ताकि वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठा सकें।

बाराबंकी में गोष्ठी: 2 नई अगेती किस्मों को मिली स्वीकृति

शुक्रवार को बाराबंकी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की रौजागांव इकाई ने सघन गन्ना विकास योजना के तहत ग्राम उफरौली और कोठरी गौरिया में कृषक गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में किसानों को दो नई अगेती गन्ना किस्मों के बारे में जानकारी दी गई, जिन्हें हाल ही में स्वीकृति मिली है। जिला गन्ना अधिकारी बाराबंकी डॉ. दुष्यंत कुमार के मुताबिक इनमें को.शा. 23232 और को.लख. 21201 शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन नई किस्मों से पुरानी चर्चित किस्म को. 0238 की तुलना में अधिक पैदावार मिल सकती है।

गोष्ठी में महाप्रबंधक (गन्ना) बृजपाल सिंह ने किसानों को को. 0118, 98014, को.लख. 14201, 16202 और को.शा. 13235 जैसी उन्नतशील गन्ना किस्मों की ट्रेंच विधि से बुवाई करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि गन्ने की दो पंक्तियों के बीच खाली जगह में आलू, मटर, सरसों और मसूर जैसी सहफसलों की खेती करके किसान अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।

शरदकालीन बुवाई से 25 प्रतिशत अधिक उपज का दावा

गोष्ठी में गन्ना किसान संस्थान, लखनऊ से आए डॉ. अरुण कुमार ने शरदकालीन बुवाई के फायदे बताए। उनके मुताबिक शरदकालीन गन्ने से बसंतकालीन गन्ने की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक उपज मिलने की संभावना रहती है। इस मौसम में गन्ने का जमाव प्रतिशत भी बेहतर रहता है और अर्ली शूट बोरर कीट का प्रकोप नहीं होता है। उन्होंने किसानों को जैविक खाद और जैव उर्वरकों के इस्तेमाल, मिट्टी की जांच और संतुलित पोषण प्रबंधन की सलाह दी।

डॉ. अरुण कुमार ने यह भी कहा कि गन्ने की पेड़ी (रैटून) के बेहतर प्रबंधन से भी किसान दूसरी फसल में अच्छी आमदनी ले सकते हैं। संतुलित खाद-उर्वरक, कीट और रोगों से फसल की सुरक्षा तथा समय पर सिंचाई गन्ने की पैदावार बढ़ाने के अहम उपाय हैं।

को. 0238 का रकबा घटकर 29 प्रतिशत रह गया

पृष्ठभूमि में देखें तो प्रदेश में गन्ने की किस्मों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लोकसभा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया था कि रेड रॉट (लाल सड़न) रोग के प्रति संवेदनशील को. 0238 किस्म का रकबा 2020-21 में कुल गन्ना क्षेत्र के 86 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में सिर्फ 29 प्रतिशत रह गया है। यही वजह है कि अब नई अगेती और रोगरोधी किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

शाहजहांपुर स्थित गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने को.शा. 13235, को.शा. 18231, को.शा. 17231 और को.शा. 19231 जैसी अगेती किस्में विकसित की हैं, जिनकी संभावित उपज 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। लखनऊ संस्थान की लख-14201 और को.लख. 16202 भी विकल्प के तौर पर उपलब्ध हैं। अब इनमें को.शा. 23232 और को.लख. 21201 के नाम जुड़ गए हैं, जिनसे किसानों को अधिक पैदावार की उम्मीद बंधी है।

आज ही करें ये काम

किसानों के लिए आज की सूची साफ है। अगर आप नए गन्ना किसान हैं या कई साल बाद बुवाई की है, तो आज ही नजदीकी गन्ना समिति कार्यालय पहुंचकर सदस्यता का फॉर्म जमा करें। अपने आधार कार्ड, खतौनी और बैंक खाते की पासबुक जैसे दस्तावेज साथ रखें। जिनकी उपज जिले के औसत से अधिक है, वे उपज बढ़ोतरी का आवेदन भी आज ही जमा करें — निर्धारित तिथि के बाद यह लाभ नहीं मिलेगा।

गोष्ठी में आए अधिकारियों ने यह भी सलाह दी है कि किसान अपने गन्ने के सर्वे की जानकारी गन्ना किसान एप या समिति कार्यालय से जरूर मिलाएं, ताकि पर्ची और भुगतान में कोई गड़बड़ी न हो।

आपके सवाल

क्या बिना समिति सदस्यता के भी मिल को गन्ना बेचा जा सकता है? नहीं। सरकारी भाव पर चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति के लिए गन्ना समिति का सदस्य होना जरूरी है। सदस्यता न होने पर इस सत्र सरकारी दर का लाभ नहीं मिलेगा।

क्या आज के बाद सदस्यता की तारीख और बढ़ सकती है? अभी तक गन्ना आयुक्त की ओर से 10 अक्टूबर से आगे तारीख बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इसीलिए आज ही प्रक्रिया पूरी करना सबसे सुरक्षित है।

उपज बढ़ोतरी का आवेदन कौन किसान भर सकता है? जिन किसानों की गन्ने की उपज जिले की औसत उपज से अधिक है, वे उपज बढ़ोतरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें बढ़ी उपज के हिसाब से आपूर्ति का लाभ मिलेगा।

नई किस्मों को.शा. 23232 और को.लख. 21201 का बीज कहां मिलेगा? इन नई अगेती किस्मों को हाल में स्वीकृति मिली है। बीज के लिए अपने जिले के गन्ना विभाग कार्यालय, नर्सरी या संबंधित चीनी मिल के गन्ना विकास विभाग से संपर्क करें।

शरदकालीन बुवाई के लिए अभी समय है? हां। शरदकालीन बुवाई का यह सही समय है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बसंतकालीन बुवाई की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक उपज मिलने की संभावना रहती है।

स्रोत: पब्लिक न्यूज़ 360 (9 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (2 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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