सट्टा प्रदर्शन मेले में रिकॉर्ड मिलान ज़रूरी, 30 सितंबर तक नई सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी — चूके तो पेराई सत्र में अटकेगा गन्ना

🚨 BREAKING: उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 से पहले गन्ना विभाग ने सबसे अहम कागज़ी काम की डेडलाइन तय कर दी है — 30 सितंबर 2026। इस तारीख तक गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी की रसीद कटवाना ज़रूरी है। साथ ही गन्ना समितियों में सट्टा प्रदर्शन मेले लग रहे हैं, जहां किसान अपने गन्ना रकबे, सट्टे और आपूर्ति के रिकॉर्ड का मिलान कराकर मौके पर गलती सुधरवा सकते हैं। चूकने पर पूरे पेराई सत्र में गन्ना सप्लाई अटक सकती है।
सट्टा प्रदर्शन मेला क्या है
गन्ना एवं चीनी उत्तर प्रदेश के आयुक्त कार्यालय के अनुसार, पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों के तहत प्रदेश की गन्ना समितियों में सट्टा प्रदर्शन मेलों का आयोजन किया जा रहा है। इन मेलों में किसानों के गन्ना रकबे, गन्ना सट्टे और आपूर्ति से संबंधित अभिलेखों का प्रदर्शन किया जाता है, ताकि किसान मौके पर ही अपने रिकॉर्ड का मिलान कर आवश्यक सुधार करा सकें। विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य पात्र किसानों को किसी भी लाभ से वंचित होने से बचाना है।
सर्वे में दर्ज खेती का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म और सट्टे की सूची में नाम, भूमि क्षेत्रफल या गन्ना प्रजाति की विसंगति रह गई तो पेराई सत्र में तौल, स्लिप और भुगतान में दिक्कत आ सकती है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मेले अथवा संबंधित गन्ना समिति में पहुंचकर अपने सट्टे की सूची का मिलान अवश्य करें।
30 सितंबर की डेडलाइन
आयुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नए किसानों के लिए गन्ना समिति की सदस्यता लेने तथा उपज बढ़ोत्तरी की रसीद प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। समय सीमा तक पंजीकरण कराने वाले नए सदस्यों को आगामी पेराई सत्र में चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध होगी।
जिन किसानों की उपज जिले की औसत उपज से अधिक है, वे भी 30 सितंबर तक उपज बढ़ोत्तरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने यह जानकारी अन्य किसान साथियों तक पहुंचाने की अपील भी की है।
जीपीएस आधारित गन्ना सर्वे नीति के तहत भी नए किसानों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है — इस तारीख तक पंजीकरण कराने वाले किसान ही आगामी पेराई सत्र में गन्ना सप्लाई के पात्र होंगे। सर्वे नीति के अनुसार पंजीकरण शुल्क अनुसूचित जाति-जनजाति किसानों के लिए 10 रुपये, छोटे किसानों के लिए 100 रुपये और अन्य किसानों के लिए 200 रुपये है।
नई सदस्यता की प्रक्रिया
जो किसान अभी तक गन्ना समिति के सदस्य नहीं बने हैं, वे 30 सितंबर तक नई सदस्यता ले सकते हैं। पहले संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक से आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराएं, फिर समिति कार्यालय में निर्धारित शुल्क जमा करें। शुल्क की रसीद मिलते ही सदस्यता पूरी हो जाती है।
इसी सदस्यता के आधार पर किसान का सट्टा संचालित होता है और पेराई सत्र में मिल को गन्ना आपूर्ति की सुविधा मिलती है।
उपज बढ़ोत्तरी रसीद — किसे मिलेगा फायदा
उपज बढ़ोत्तरी की सुविधा उन किसानों के लिए है जिनके खेत की गन्ना उपज उनके जिले की औसत उपज से अधिक है। ऐसे किसान 30 सितंबर तक आवेदन करके उपज बढ़ोत्तरी की रसीद कटवा सकते हैं। रिकॉर्ड में सही उपज दर्ज होने से सप्लाई स्लिप और भुगतान का हिसाब साफ रहता है।
गोंडा में मेला — 21 से 28 सितंबर
सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, मैजापुर-गोंडा की ओर से समिति स्तरीय सट्टा प्रदर्शन मेला आयोजित किया जा रहा है, जो 21 से 28 सितंबर तक चलेगा। मेले का उद्घाटन समिति अध्यक्ष श्यामनारायण शुक्ल और उप गन्ना आयुक्त देवीपाटन मंडल डॉ. आरवी राम ने किया।
मेले में आगामी पेराई सत्र के लिए नवीन गन्ना प्रजाति 18231 एवं 17451 का बीज भी उपलब्ध कराया गया है। उप गन्ना आयुक्त ने किसानों से अपील की कि वे मेले में अपने सट्टे का मिलान 63 कॉलम खतौनी और प्री-कैलेंडर से अवश्य कर लें। विसंगति मिलने पर किसान मेले में ही आपत्ति दर्ज कराकर निस्तारण करा सकते हैं।
प्री-कैलेंडर और आपत्ति कैसे दर्ज करें
पेराई सत्र से पहले किसानों को अपने रजिस्टर्ड रकबे, अनुमानित उत्पादन और सप्लाई स्लिप की जानकारी पहले ही मिल जाती है — गन्ना खातों की जानकारी 16 सितंबर से सट्टा प्रदर्शन मेलों के जरिए उपलब्ध कराई गई थी। गड़बड़ी मिलने पर किसान आपत्ति जता सकते हैं, जिन पर सहकारी समितियों की किसान बैठकों में विचार कर अंतिम कैलेंडर जारी होने से पहले सुधार किया जाता है। एक बार अंतिम कैलेंडर जारी हो गया तो बाद में सुधार का मौका मुश्किल हो जाता है।
पेराई की तैयारी भी रफ्तार पकड़ रही है। रुदौली तहसील में सर्वे 31 अगस्त तक पूरा हो गया — इस साल 11,768 हेक्टेयर में खेती दर्ज हुई (पिछले साल 12,376 हेक्टेयर)। इस सीजन में 42 लाख क्विंटल गन्ना खरीदने का लक्ष्य है (पिछले साल 34 लाख क्विंटल)। लगभग 23,976 किसानों की सप्लाई स्लिप तैयार होंगी। रोजागांव शुगर मिल में पेराई लगभग 11 नवंबर से शुरू होगी — स्लिप पेराई से 15 दिन पहले जारी होंगी और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर एसएमएस अलर्ट मिलेंगे।
ऑनलाइन घोषणा-पत्र भरना अनिवार्य
जिन किसानों ने अभी तक caneup.in वेबसाइट या ई-गन्ना ऐप के माध्यम से ऑनलाइन घोषणा-पत्र नहीं भरा है, वे इसे जल्द से जल्द पूरा करें। घोषणा-पत्र न भरने वालों का पेराई सत्र 2026-27 का सट्टा विभागीय नियमों के अनुसार संचालित नहीं होगा। घोषणा-पत्र 30 सितंबर तक भर दें, वरना सट्टा संचालित नहीं होगा। मोबाइल नंबर और आधार विवरण सही रखें ताकि एसएमएस अलर्ट और भुगतान में रुकावट न आए।
मेले में योजनाओं की जानकारी और आम गलतियां
मेलों में किसानों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 भी संचालित किया जा रहा है।
इन आम गलतियों से बचें — 30 सितंबर की डेडलाइन चूकना, रिकॉर्ड मिलान न कराना, ऑनलाइन घोषणा-पत्र न भरना, मोबाइल नंबर अपडेट न रखना और दूसरों के भरोसे रहना। विभाग की अपील है कि हर किसान खुद जाकर अपने रिकॉर्ड की जांच करे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: सट्टा प्रदर्शन मेला कहां और कब लग रहा है? उत्तर: प्रदेश की गन्ना समितियों में पेराई सत्र 2026-27 से पहले मेलों का आयोजन हो रहा है — अपने क्षेत्र की तारीख के लिए गन्ना समिति से संपर्क करें। गोंडा के मैजापुर में मेला 21 से 28 सितंबर तक चल रहा है।
प्रश्न 2: नई सदस्यता के लिए क्या चाहिए? उत्तर: गन्ना पर्यवेक्षक से दस्तावेज सत्यापित कराकर समिति कार्यालय में निर्धारित शुल्क जमा करें। अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है।
प्रश्न 3: उपज बढ़ोत्तरी के लिए कौन पात्र है? उत्तर: जिन किसानों की उपज जिले की औसत उपज से अधिक है, वे 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 4: ऑनलाइन घोषणा-पत्र कहां भरें? उत्तर: caneup.in वेबसाइट या ई-गन्ना ऐप के माध्यम से। इसे 30 सितंबर तक भरना ज़रूरी है, वरना पेराई सत्र 2026-27 का सट्टा संचालित नहीं होगा।
प्रश्न 5: रिकॉर्ड में गलती मिलने पर क्या करें? उत्तर: सट्टा प्रदर्शन मेले में जाकर संबंधित कर्मचारी को लिखित आपत्ति दें और सुधार कराएं। समस्या होने पर टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
स्रोत: प्रतिभा टाइम्स (25 सितंबर 2026), चिनीमंडी (अमर उजाला के हवाले से), इंडिया न्यूज़ पोर्ट-गोंडा (21 सितंबर 2026), किसान तक (17 सितंबर 2026)
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