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सट्टा सर्वे आपत्ति का आज अंतिम दिन (25 सितंबर): आज रात 12 बजे बंद होगा पोर्टल — 168 समितियों पर रात 10 बजे तक टोकन व्यवस्था

Aamir Raza • Sep 25, 2026 • 6 min read
सट्टा सर्वे आपत्ति का आज अंतिम दिन (25 सितंबर): आज रात 12 बजे बंद होगा पोर्टल — 168 समितियों पर रात 10 बजे तक टोकन व्यवस्था
अंतिम अपडेट: September 25, 2026 7:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ / मुजफ्फरनगर / बरेली (CaneUp विशेष ब्यूरो — 25 सितंबर 2026 सुबह 7:15 बजे): उत्तर प्रदेश के 48 लाख से अधिक गन्ना किसानों के लिए आज शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 का दिन अत्यंत निर्णायक और अंतिम अवसर लेकर आया है। आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग द्वारा संचालित सट्टा प्री-कैलेंडर प्रदर्शन, जीपीएस सर्वे रकबा सत्यापन और बैंक खाता संशोधन का आज अंतिम दिन है। गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ द्वारा जारी आपातकालीन अधिसूचना के अनुसार, आज मध्यरात्रि 12:00 बजे (रात 11:59:59 PM) आधिकारिक पोर्टल enquiry.caneup.in पर आपत्तियों और संशोधनों का ऑनलाइन विंडो पूर्ण रूप से फ्रीज (लॉक) कर दिया जाएगा।

प्रदेश भर की 168 सहकारी गन्ना विकास समितियों और विकास परिषदों में आज तड़के सुबह से ही किसानों की भारी कतारें देखी जा रही हैं। सर्वर पर अत्यधिक ट्रैफिक और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने एक संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ‘टोकन प्रणाली’ (Token System) लागू की है, जिसके तहत आज रात 10:00 बजे तक समिति कार्यालय पहुंचने वाले प्रत्येक किसान की आपत्ति अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी।


🏛️ कानूनी पृष्ठभूमि एवं सट्टा निर्धारण का वैधानिक ढांचा

उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 (UP Sugarcane Supply and Purchase Regulation Act 1953) की धारा 15 और 16 के तहत प्रत्येक पेराई सत्र के आरंभ से पूर्व किसानों के उत्पादन रकबे, आपूर्ति इतिहास और बेसिक कोटे का निर्धारण एक वैधानिक प्रक्रिया है।

इस अधिनियम के नियम 22 के अनुसार, यदि कोई किसान निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने सट्टा रिकॉर्ड या सर्वे डाटा पर आधिकारिक आपत्ति (Form-3) दाखिल नहीं करता है, तो विभाग द्वारा प्रदर्शित प्री-कैलेंडर डाटा को ही अंतिम और निर्विवाद मान लिया जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी किसान का रकबा भूलवश कम दर्ज रह गया या पौधा/पेड़ी का अनुपात गलत दर्ज हो गया, तो पूरे पेराई सत्र (अक्टूबर से अप्रैल) के दौरान उसे कम पर्चियां मिलेंगी और वह अपने वैध गन्ने की आपूर्ति से वंचित रह जाएगा।


🚨 आज रात 12 बजे से पहले किसान ये 5 अनिवार्य कार्य हर हाल में पूरे करें

  1. जीपीएस सर्वे रकबा मिलान (Area Verification): अपने घोषणा पत्र और राजस्व खतौनी (1431-1436 फसली) से सट्टे में दर्ज रकबे का मिलान करें। यदि खेत 2 हेक्टेयर था लेकिन सर्वे में 1.2 हेक्टेयर दर्ज हुआ है, तो तत्काल फॉर्म-3 के साथ खतौनी की नकल लगाकर जमा करें।
  2. पौधा व पेड़ी (Plant vs Ratoon) का सही वर्गीकरण: पेराई सत्र के पहले दो पखवाड़ों में केवल पेड़ी (Ratoon) गन्ने की पर्चियां जारी होती हैं। यदि आपके पेड़ी गन्ने को क्लर्क ने पौधा दर्ज कर दिया है, तो आपकी शुरुआती पर्चियां कट जाएंगी। इसे आज ही संशोधित कराएं।
  3. आधार-संबद्ध बैंक खाता व एनपीसीआई (NPCI) मैपिंग: चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य का भुगतान सीधे आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS / DBT) के जरिए किया जा रहा है। यदि आपका खाता एनपीसीआई मैपर पर इन-एक्टिव है, तो बैंक से तत्काल ई-केवाईसी कराएं।
  4. सक्रिय 10 अंकों का मोबाइल नंबर अपडेट: पर्ची एसएमएस, डिजिटल ई-सप्लाई टिकट और तौल रसीद केवल पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही भेजी जाती है। यदि पुराना नंबर बंद हो गया है, तो तुरंत नया नंबर मैप कराएं।
  5. संयुक्त खातेदार व वारिसान सट्टा हस्तांतरण: यदि मूल सट्टेदार का देहांत हो गया है, तो वारिसान प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर नकल प्रस्तुत कर सट्टा विधिक वारिस के नाम ट्रांसफर कराने का आज अंतिम मौका है।

📋 आपत्ति निस्तारण की समय-सारिणी एवं हेल्पडेस्क व्यवस्था (25 सितंबर 2026)

माध्यम (Mode)परिचालन समयआवश्यक दस्तावेजसमाधान की समय-सीमा
ऑनलाइन पोर्टल (enquiry.caneup.in)आज रात 11:59 बजे तक खुलाघोषणा पत्र रसीद, खतौनी, आधार48 घंटे में ऑनलाइन स्टेटस
समिति हेल्पडेस्क (भौतिक काउंटर)आज रात 10:00 बजे तक (टोकन व्यवस्था)फॉर्म-3, जोत बही, पासबुकमौके पर ही पावती रसीद
eGanna App v6.2 (शिकायत निवारण)आज रात 11:59 बजे तक सक्रियकिसान कोड व 4-अंकीय पासवर्डडिजिटल संदर्भ संख्या जारी
राज्य स्तरीय टोल-फ्री हेल्पलाइन1800-121-3203 (24 घंटे सक्रिय)किसान कोड, समिति व मिल का नामकॉल रिकॉर्डिंग व त्वरित मार्गदर्शन

📊 168 गन्ना समितियों में आपत्तियों का ताज़ा मंडलवार आंकड़ा (आज सुबह 7 बजे तक)

गन्ना आयुक्त कार्यालय के केंद्रीय कंट्रोल रूम से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में प्रदेश भर से कुल 3,42,850 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 2,88,400 का सफल निस्तारण किया जा चुका है:

  • सहारनपुर व मुजफ्फरनगर मंडल: कुल 78,420 आपत्तियां प्राप्त | 71,200 निस्तारित (90.8% निस्तारण दर)
  • मेरठ व मुरादाबाद मंडल: कुल 96,150 आपत्तियां प्राप्त | 86,500 निस्तारित (89.9% निस्तारण दर)
  • बरेली व लखीमपुर खीरी मंडल: कुल 84,200 आपत्तियां प्राप्त | 74,100 निस्तारित (88.0% निस्तारण दर)
  • गोरखपुर, बस्ती व अयोध्या मंडल: कुल 84,080 आपत्तियां प्राप्त | 56,600 निस्तारित (67.3% निस्तारण दर)

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ और जलभराव के कारण आपत्तियों के निस्तारण की गति कुछ धीमी रही है, जिसके लिए गन्ना आयुक्त ने देवीपाटन और गोरखपुर मंडल में अतिरिक्त राजस्व कर्मियों और सर्वेक्षकों को तैनात किया है।


⚙️ बेसिक कोटा 85% नियम: किसान ऐसे समझें पर्चियों का गणित

उत्तर प्रदेश में सट्टा पर्ची निर्धारण का मूल आधार किसान का ‘बेसिक कोटा’ (Basic Quota) होता है। शासन की वर्तमान गन्ना पूर्ति नीति के अनुसार:

  • बेसिक कोटे का फॉर्मूला: विगत तीन पेराई सत्रों (2023-24, 2024-25, 2025-26) में किसान द्वारा चीनी मिल को की गई वास्तविक गन्ना आपूर्ति का औसत निकाला जाता है।
  • 85% आपूर्ति बाध्यता: इस औसत का 85% भाग किसान का आगामी सत्र के लिए बेसिक कोटा निर्धारित होता है।
  • अतिरिक्त सट्टा (Additional Quota): यदि किसान के पास नए जीपीएस सर्वे में बेसिक कोटे से अधिक गन्ना खड़ा पाया जाता है, तो उसे ‘अतिरिक्त सट्टे’ के रूप में स्वीकार कर 12 पखवाड़े के अंतिम कॉलमों (कॉलम 11 से 15) में पर्चियां आवंटित की जाती हैं।

यदि आज रात 12 बजे तक आपका बेसिक कोटा सही दर्ज नहीं हुआ, तो पेराई सत्र के दौरान कंप्यूटर स्वतः आपकी पर्चियां कम कर देगा, जिसे बाद में मैनुअल तरीके से बढ़ाना किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं होगा।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: यदि समिति का सर्वर डाउन हो जाए या पोर्टल न खुले तो किसान क्या करें?

उत्तर: यदि ऑनलाइन पोर्टल पर ‘Server Busy’ या टाइमआउट की समस्या आए, तो किसान भाई तुरंत अपनी नजदीकी साधन सहकारी समिति या गन्ना विकास परिषद कार्यालय पहुंचें। वहां ऑफलाइन ‘फॉर्म-3’ पर मोहर लगवाकर रसीद प्राप्त करें। रात 10 बजे तक समिति में मौजूद प्रत्येक किसान को टोकन देकर उसका फॉर्म स्वीकार किया जाएगा।

प्रश्न 2: क्या 25 सितंबर के बाद किसी भी स्थिति में तारीख बढ़ाई जा सकती है?

उत्तर: गन्ना आयुक्त लखनऊ ने स्पष्ट किया है कि 20 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों का संचालन शुरू होना है। 12 पखवाड़ा पर्ची कैलेंडर तैयार करने में न्यूनतम 10 दिन का समय लगता है। अतः 25 सितंबर मध्यरात्रि के बाद तिथि में किसी भी प्रकार का विस्तार संभव नहीं होगा।

प्रश्न 3: फॉर्म-3 जमा करने के बाद पावती (Acknowledgment Receipt) लेना क्यों जरूरी है?

उत्तर: पावती रसीद पर 10 अंकों का विशिष्ट क्रमांक और सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। यदि कैलेंडर जारी होने के बाद भी आपका रकबा या बेसिक कोटा ठीक नहीं होता, तो यही पावती रसीद जिला गन्ना अधिकारी (DCO) की कोर्ट में अपील करने का वैधानिक प्रमाण बनेगी।

प्रश्न 4: किसान अपनी शिकायत की ऑनलाइन स्थिति कैसे जांचें?

उत्तर: किसान भाई आधिकारिक पोर्टल enquiry.caneup.in पर ‘Grievance’ मेनू में जाकर ‘Track Complaint’ पर क्लिक करें और अपना संदर्भ क्रमांक दर्ज करके लाइव प्रगति देख सकते हैं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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