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मृतक किसान सट्टा वरासत नामांतरण: 25 से 30 सितंबर तक समितियों में विशेष कैंप — बिना रिश्वत वारिसों के नाम ट्रांसफर होगा सट्टा व बेसिक कोटा

Aamir Raza Sep 23, 2026 3 min read
मृतक किसान सट्टा वरासत नामांतरण: 25 से 30 सितंबर तक समितियों में विशेष कैंप — बिना रिश्वत वारिसों के नाम ट्रांसफर होगा सट्टा व बेसिक कोटा
अंतिम अपडेट: September 23, 2026 4:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ / बरेली / लखीमपुर खीरी (CaneUp विशेष ब्यूरो — 23 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के लाखों किसान परिवारों के लिए एक अत्यंत राहत भरी खबर है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने मृत सट्टा धारक किसानों के आश्रितों के नाम सट्टा नामांतरण और बेसिक कोटा ट्रांसफर के लिए राज्यव्यापी ‘विशेष सट्टा वरासत महाअभियान (25 से 30 सितंबर 2026)’ की घोषणा की है। गन्ना आयुक्त लखनऊ ने प्रदेश की सभी 168 सहकारी गन्ना विकास समितियों के सचिवों को आदेश दिया है कि वे 6 दिनों तक विशेष काउंटर लगाकर एक ही दिन में वरासत की पत्रावलियों का निस्तारण करें।

विभागीय सर्वे में पाया गया था कि प्रदेश में लगभग 85,000 ऐसे सट्टे चालू थे जिनके मूल खाताधारक किसानों की मृत्यु हो चुकी है। बैंक खातों में आधार और एनपीसीआई सीडिंग न होने के कारण इन परिवारों का लाखों रुपये का गन्ना भुगतान अटकने का खतरा पैदा हो गया था।


📑 सट्टा वरासत के लिए आवश्यक 4 दस्तावेज

किसानों को किसी दलाल या बिचौलिए के चक्कर में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। केवल निम्नलिखित 4 प्रपत्र लेकर कैंप में जाएं:

  1. मूल सट्टा धारक का मृत्यु प्रमाण-पत्र (Death Certificate): ग्राम पंचायत सचिव या नगर पालिका द्वारा जारी मूल या प्रमाणित प्रति।
  2. परिवार रजिस्टर की नकल (Parivar Register Nakal): खंड विकास अधिकारी (BDO) या पंचायत सचिव द्वारा जारी अद्यतन नकल, जिसमें सभी कानूनी वारिसों के नाम दर्ज हों।
  3. राजस्व खतौनी (तहसील वरासत): यदि राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में नाम दर्ज हो चुका है, तो प्रमाणित कम्प्यूटरीकृत खतौनी की प्रति।
  4. वारिसों का आपसी अनापत्ति/सहमति शपथ पत्र (NOC Affidavit): यदि कई वारिस हैं, तो नोटरी द्वारा सत्यापित यह सहमति पत्र कि सट्टा और पर्चियां किस एक वारिस के नाम पर जारी की जाएं, अथवा कोटा बराबर बांटा जाए।

⚖️ बेसिक कोटे को लेकर सबसे बड़ा नियम

गन्ना विभाग ने स्पष्ट किया है कि:

  • बेसिक कोटा नष्ट नहीं होगा: मृतक किसान का जितना ऐतिहासिक बेसिक कोटा (पिछले 3 वर्षों की औसत आपूर्ति का 85%) था, वह शत-प्रतिशत नए वारिस के सट्टे में जुड़ जाएगा।
  • पर्ची का पखवाड़ा यथावत रहेगा: जिस पखवाड़े में मृतक किसान की पर्चियां पहले आती थीं, वारिस को भी उसी पखवाड़े में पर्चियां मिलेंगी।
  • रिश्वत मांगने पर तत्काल निलंबन: यदि समिति का कोई कर्मचारी या लिपिक वरासत के नाम पर सुविधा शुल्क की मांग करता है, तो किसान सीधे एंटी-करप्शन हेल्पलाइन 9454401866 या गन्ना कंट्रोल रूम 1800-121-3203 पर ऑडियो/शिकायत भेजें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: यदि दो भाइयों में सट्टा बांटना हो तो क्या प्रक्रिया है?

उत्तर: दोनों भाई अपनी खतौनी के अनुसार अलग-अलग सहमति पत्र जमा कर सकते हैं। मृतक पिता का बेसिक कोटा दोनों भाइयों के रकबे के अनुपात में दो अलग-अलग किसान कोड में विभाजित कर दिया जाएगा।

प्रश्न 2: कैंप में कितने दिन में वरासत स्वीकृत हो जाएगी?

उत्तर: विशेष अभियान के तहत उसी दिन फॉर्म की जांच कर अधिकतम 48 घंटे के भीतर enquiry.caneup.in पर नया किसान कोड एक्टिवेट कर दिया जाएगा।

प्रश्न 3: क्या सट्टा वरासत के लिए कोई सरकारी फीस देनी होती है?

उत्तर: नहीं, यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। केवल शपथ पत्र का नोटरी खर्च किसान को स्वयं वहन करना होता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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