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सैकड़ों ट्रैक्टरों से गढ़मुक्तेश्वर तहसील का घेराव: गन्ना बकाया, ब्याज और भाव बढ़ाने की मांग पर भाकियू का हल्लाबोल

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 11, 2026 • 6 min read
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सैकड़ों ट्रैक्टरों से गढ़मुक्तेश्वर तहसील का घेराव: गन्ना बकाया, ब्याज और भाव बढ़ाने की मांग पर भाकियू का हल्लाबोल
अंतिम अपडेट: October 11, 2026 8:18 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बुधवार की सुबह गढ़मुक्तेश्वर के आसपास के गांवों से जब एक-एक करके ट्रैक्टर तहसील की ओर बढ़ने लगे, तो देखते ही देखते सैकड़ों ट्रैक्टरों का लंबा काफिला तैयार हो गया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले सैकड़ों किसान ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए गढ़मुक्तेश्वर तहसील पहुंचे और प्रशासनिक परिसर का घेराव कर जमकर प्रदर्शन किया। मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जाम जैसी स्थिति बन गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तहसील परिसर व आसपास भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

किसानों की मुख्य मांगें सीधी थीं — चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज सहित जल्द भुगतान, नए पेराई सत्र के लिए गन्ने के भाव में बढ़ोतरी, खेतों में फसल बर्बाद कर रहे बेसहारा पशुओं और बंदरों के आतंक से मुक्ति, और हाल की बेमौसम बारिश व बाढ़ से तबाह फसलों का तुरंत उचित मुआवजा। कई घंटों चले प्रदर्शन के बाद भाकियू के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन जिला मुख्यालय से लेकर प्रदेश स्तर तक उग्र किया जाएगा।

ट्रैक्टरों के काफिले से तहसील का घेराव, सड़कों पर लगा जाम

किसानों का जमावड़ा गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के आसपास के गांवों से शुरू हुआ। सुबह से ही किसान अपने-अपने ट्रैक्टर लेकर तहसील की ओर रवाना होने लगे। सैकड़ों ट्रैक्टरों के काफिले के साथ जैसे ही किसानों ने तहसील की ओर रुख किया, मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति पैदा हो गई।

भाकियू टिकैत संगठन के मंडल अध्यक्ष दिनेश खेड़ा के नेतृत्व में कार्यकर्ता तहसील परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया। तहसील परिसर में दिनभर गहमागहमी बनी रही। दिनेश खेड़ा ने कहा कि किसानों की समस्याओं का शीघ्र निपटारा न होने पर संगठन बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। मंडल प्रवक्ता खुर्शीद जूनियर भी धरने में शामिल रहे।

सिम्भावली और ब्रजनाथपुर मिलों पर गन्ना बकाया का आरोप

धरने पर बैठे किसानों का सबसे बड़ा गुस्सा चीनी मिलों के बकाया भुगतान को लेकर था। किसानों का आरोप है कि सिम्भावली और ब्रजनाथपुर शुगर मिल द्वारा उनके गन्ने का बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे किसान आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं। कई किसान ऐसे हैं जिनका पैसा महीनों से अटका है।

किसान नेताओं ने मांग की कि बकाए गन्ना मूल्य का ब्याज सहित जल्द से जल्द भुगतान कराया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर पैसा न मिलने से किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है — खेती की लागत, खाद-बीज और घर के जरूरी खर्चों के लिए किसान अपने ही पैसे का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव बढ़ाने की भी पुरजोर मांग उठाई गई, ताकि बढ़ती लागत के बीच किसान की मेहनत का सही मूल्य मिल सके।

बेसहारा पशु, बाढ़ मुआवजा और बिजली — 10 से ज्यादा मांगें

गन्ना बकाया के अलावा किसानों ने अपनी लंबित मांगों की लंबी सूची भी प्रशासन के सामने रखी। खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे बेसहारा पशुओं और बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग प्रमुख थी। किसानों ने हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और बाढ़ से तबाह हुई फसलों का तुरंत उचित मुआवजा जारी करने की भी मांग की।

बिजली विभाग की जांच और एनजीटी की कार्रवाई को लेकर भी किसानों में भारी रोष दिखा। भाकियू पदाधिकारियों ने बिजली महकमे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चेकिंग की आड़ में ग्रामीण इलाकों में किसानों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। किसानों ने बताया कि नए मीटर ज्यादा खराब स्थिति में हैं और चेकिंग व ओवरलोडिंग की आड़ में चल रही अवैध वसूली पर पूरी तरह अंकुश लगना चाहिए।

इसके अलावा, एनजीटी और प्रदूषण नियमों का हवाला देकर किसानों व मजदूरों के ट्रैक्टर-ट्रॉली और कृषि वाहनों के खिलाफ की जा रही एकतरफा कार्रवाई पर भी कड़ा विरोध जताया गया। किसानों ने ट्रैक्टरों पर लगाई जा रही रोक और गांव की खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत की मांग भी रखी — विशेषकर गढ़-मेरठ मार्ग की जर्जर हालत का मुद्दा उठाया गया।

एसडीएम को ज्ञापन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कई घंटों तक चले जोरदार प्रदर्शन के बाद भाकियू के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बकाया गन्ना भुगतान, ब्याज, भाव बढ़ोतरी, बेसहारा पशुओं, बाढ़ मुआवजे, बिजली उत्पीड़न और सड़कों समेत सभी प्रमुख मांगें शामिल थीं।

किसान नेताओं ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र फैसला नहीं लिया, तो इस जनआंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर पूरे प्रदेश स्तर तक उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया भी गया — ऊर्जा निगम से जुड़ी समस्याओं पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वसूली की शिकायतों की जांच होगी।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में महज कुछ दिन बाकी हैं और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में गन्ना बकाया, भुगतान में देरी और भाव को लेकर किसान संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि मिलों को पेराई शुरू करने से पहले बकाया चुकता करना होगा, वरना नया सत्र भी विवादों में घिरा रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: गढ़मुक्तेश्वर में किसानों ने प्रदर्शन क्यों किया?

उत्तर: भाकियू (टिकैत) के बैनर तले किसानों ने चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान, ब्याज सहित भुगतान, नए सत्र के भाव में बढ़ोतरी, बेसहारा पशुओं, बाढ़ मुआवजे, बिजली उत्पीड़न और खराब सड़कों समेत कई मांगों को लेकर गढ़मुक्तेश्वर तहसील का घेराव किया।

प्रश्न: किन चीनी मिलों पर गन्ना बकाया का आरोप लगाया गया?

उत्तर: धरने में किसानों ने आरोप लगाया कि सिम्भावली और ब्रजनाथपुर शुगर मिल द्वारा उनके गन्ने का बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे किसान आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं।

प्रश्न: प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया?

उत्तर: भाकियू टिकैत संगठन के मंडल अध्यक्ष दिनेश खेड़ा के नेतृत्व में कार्यकर्ता और किसान तहसील परिसर में एकत्र हुए। मंडल प्रवक्ता खुर्शीद जूनियर भी मौजूद रहे।

प्रश्न: क्या प्रशासन ने किसानों की मांगों पर कोई जवाब दिया?

उत्तर: प्रदर्शन के बाद भाकियू प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ऊर्जा निगम से जुड़ी समस्याओं पर विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया और शिकायतों की जांच का आश्वासन मिला। किसानों ने मांगें न मानी जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

प्रश्न: किसानों की बिजली से जुड़ी क्या शिकायतें थीं?

उत्तर: किसानों ने कहा कि नए मीटर ज्यादा खराब स्थिति में हैं, चेकिंग और ओवरलोडिंग की आड़ में अवैध वसूली हो रही है और चेकिंग के नाम पर ग्रामीण इलाकों में किसानों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए।

स्रोत: दैनिक जागरण (8 अक्टूबर 2026) और Khabarwala24 (8 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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