हापुड़ के 36 गांवों के गन्ने का बंटवारा अटका: सिंभावली-ब्रजनाथपुर मिलों से छिन सकता है गन्ना, अक्टूबर में केन कमिश्नर करेंगे फैसला

🚨 BREAKING: हापुड़ के 36 गांवों के गन्ने का बंटवारा इस पेराई सत्र का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। पिछले सत्र में भुगतान की देरी के चलते सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों से जिन 36 गांवों के क्रय केंद्र हटाए गए थे, उनके गन्ने का सर्वे मेरठ, बुलंदशहर और मोदीनगर की मिलों ने पूरा कर लिया है। अब फैसला अक्टूबर में केन कमिश्नर की बैठक में होगा कि कौन-से गांव का गन्ना किस मिल को मिलेगा। ‘अमर उजाला’ के हवाले से चिनीमंडी ने बताया कि हापुड़ में इस साल गन्ने का रकबा पिछले साल से 2386 हेक्टेयर घटा है — यानी मिलों के बीच गन्ने की खींचतान और तेज होने वाली है।
पृष्ठभूमि: भुगतान की देरी से छिन गए थे 36 गांवों के क्रय केंद्र
दरअसल, सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों द्वारा गन्ने का भुगतान समय से न किए जाने पर गन्ना विभाग ने बड़ा कदम उठाया था। ‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, इन दोनों मिलों के नौ तौल क्रय केंद्र काटकर दूसरी मिलों को दे दिए गए थे और गन्ना आवंटन में भी बड़े स्तर पर कटौती की गई थी।
पिछले सत्र में 36 गांवों के क्रय केंद्र हटाए जाने से फरवरी में ही दोनों मिलों में गन्ने की कमी हो गई और मिलें ‘नो-केन’ की स्थिति में पहुंच गईं। आईआरपी के दावों के अनुसार, बाद में सिंभावली ने 6.18 करोड़ और ब्रजनाथपुर ने 2.04 करोड़ रुपये यानी कुल 8.22 करोड़ का भुगतान किया, लेकिन तब भी मिलों पर 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया बताया गया था।
इस सत्र में क्या बदला: 65 लाख क्विंटल गन्ना, चार मिलों ने किया सर्वे
पिछले सत्र में 36 गांवों से करीब 65 लाख क्विंटल गन्ना मेरठ की नंगलामल, मोदीनगर की मोदी चीनी मिल तथा बुलंदशहर की अनामिका और साबितगढ़ मिलों को भेजा गया था। इस सत्र के लिए इन चारों मिलों ने संबंधित क्षेत्रों में गन्ने का सर्वे पूरा करा लिया है।
जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार, अक्टूबर के मध्य में केन कमिश्नर के स्तर पर बैठक प्रस्तावित है, जिसमें तय होगा कि किस गांव का गन्ना किस मिल को दिया जाएगा। ऐसे में सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों को इस बार कितना गन्ना आवंटित होगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि इसी बैठक में क्रय केंद्रों की संबद्धता भी तय होगी। उच्च न्यायालय ने गन्ने की आपूर्ति पूरी तरह रोकने पर रोक लगाई है, यानी किसी भी मिल को गन्ना मिलने से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।
पेराई कब से: 15 अक्टूबर का निर्देश, रिकवरी पर सवाल
गन्ना विभाग ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन संभावना है कि अधिकांश मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक ही शुरू हो पाएंगी। चुनौती रिकवरी की है — फिलहाल गन्ने में पर्याप्त मिठास नहीं होने के कारण औसत के अनुरूप चीनी की रिकवरी होने की संभावना कम बताई जा रही है। रिकवरी का सर्वे अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होगा।
हापुड़ में घट रहा गन्ना रकबा: एक साल में 2386 हेक्टेयर कम
‘अमर उजाला’ के अनुसार, हापुड़ में इस वर्ष पिछले साल से 2386 हेक्टेयर कम क्षेत्र में गन्ना बोया गया है, और पांच वर्षों में रकबा 5000 हेक्टेयर से ज्यादा घट चुका है। जितना गन्ना कम होगा, मिलों के बीच उसे पाने की होड़ उतनी ही बढ़ेगी।
किसानों के लिए सलाह: अभी क्या करें
पहला, गन्ना विभाग के अनुसार नई समिति सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी के आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है — इसमें चूकने पर पेराई सत्र 2026-27 में गन्ना आपूर्ति का अधिकार प्रभावित हो सकता है। अपने सट्टे और सर्वे रिकॉर्ड की जांच भी कर लें।
दूसरा, क्रय केंद्र और मिल आवंटन की सूचना के लिए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय और गन्ना समिति से संपर्क में रहें। अक्टूबर की बैठक के बाद आवंटन की अंतिम सूची जारी होगी — उसी के अनुसार आपकी पर्चियां और आपूर्ति की तारीख तय होंगी।
तीसरा, सर्वे रिकॉर्ड में गलती हो तो तुरंत सुधार कराएं। अगेती किस्म की पर्ची पर केवल अगेती किस्म का गन्ना ही स्वीकार होगा — दर्ज किस्म से अलग गन्ना लेकर जाने पर मिल वजन नहीं करेगी।
चौथा, भुगतान संबंधी किसी भी समस्या पर गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
यूपी का बड़ा प्लान: रकबा नहीं, अब उत्पादकता बढ़ेगी
इसी बीच लखनऊ से एक बड़ी खबर आई है। ‘द हिंदू’ को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खेती योग्य भूमि की उपलब्धता सीमित होने के बीच उत्तर प्रदेश ने गन्ने का रकबा बढ़ाने के बजाय उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है — अधिक उत्पादन देने वाली और रोग प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों, बेहतर बीज व्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और कृषि मशीनीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
अधिकारी के अनुसार, को-0238 किस्म की सफलता ने यूपी में गन्ने की खेती को नई दिशा दी थी, लेकिन बाद में रेड रॉट (लाल सड़न रोग) के बढ़ते प्रभाव ने नई और रोग प्रतिरोधी किस्मों की जरूरत को रेखांकित किया। 2003 बैच की आईएएस अधिकारी मिनिष्टी ने मशीनीकरण के साथ-साथ सूक्ष्म सिंचाई, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और वैज्ञानिक कीट नियंत्रण पर भी जोर दिया।
अपर गन्ना आयुक्त और 2014 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक आनंद ने बताया कि रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट इमेजरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से फसल की निगरानी और किस्मों की मैपिंग अधिक सटीक की जा रही है। गन्ना विभाग ने आरएसएसी के साथ एक पायलट परियोजना भी शुरू की है। आज किसान मोबाइल फोन से गन्ना सर्वेक्षण, आरक्षण, तौल का रिकॉर्ड और भुगतान की स्थिति देख सकता है — यानी हापुड़ जैसे विवादों में अब डिजिटल रिकॉर्ड ही किसानों का सबसे बड़ा हथियार होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. हापुड़ के 36 गांवों के गन्ने का फैसला कब होगा? अक्टूबर के मध्य में केन कमिश्नर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में गन्ना आवंटन और क्रय केंद्रों की स्थापना पर निर्णय लिया जाएगा।
Q2. सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों से 36 गांवों के क्रय केंद्र क्यों हटाए गए थे? गन्ना भुगतान में देरी और बकाये के कारण गन्ना विभाग ने इन मिलों के नौ तौल क्रय केंद्र काटकर दूसरी मिलों को दे दिए थे।
Q3. पिछले सत्र में 36 गांवों का गन्ना कहां गया था? करीब 65 लाख क्विंटल गन्ना मेरठ की नंगलामल, मोदीनगर की मोदी चीनी मिल तथा बुलंदशहर की अनामिका और साबितगढ़ चीनी मिलों को भेजा गया था।
Q4. इस बार पेराई कब से शुरू होगी? विभाग ने 15 अक्टूबर से पेराई के निर्देश दिए हैं, लेकिन अधिकांश मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक ही शुरू हो पाएंगी। रिकवरी सर्वे अक्टूबर के पहले सप्ताह से होगा — यह रिपोर्ट केन कमिश्नर की बैठक में अहम भूमिका निभा सकती है।
Q5. हापुड़ में गन्ने का रकबा क्यों घट रहा है? इस साल 2386 हेक्टेयर कम क्षेत्र में गन्ना बोया गया है और पांच साल में 5000 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा घट चुका है।
Q6. किसान अपने गन्ना आवंटन की जानकारी कैसे पाएं? जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय, गन्ना समिति और ई-गन्ना ऐप से जानकारी मिलती रहेगी। हेल्पलाइन: 1800-121-3203।
स्रोत: चिनीमंडी (26 सितंबर 2026) — ‘अमर उजाला’ और ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट; ‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित क्रय केंद्र संबंधी रिपोर्ट।
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