हापुड़: गन्ना भाव 500 रुपये की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों किसान, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गन्ना किसानों की नाराजगी सड़क पर उतर आई। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट पर धरना दिया और आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर के नेतृत्व में आयोजित पंचायत में किसानों ने गन्ना मूल्य समेत छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपा और मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
यह प्रदर्शन भाकियू के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर हुआ। पंचायत की अध्यक्षता ओमपाल सिंह सरदार ने की। किसानों का कहना था कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। प्रदर्शन में मोनू त्यागी, जितेंद्र नागर और राधेलाल त्यागी सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
छह सूत्रीय मांगें: किसानों ने क्या-क्या मांगा
कलेक्ट्रेट पर हुई पंचायत में किसानों ने छह प्रमुख मांगें रखीं। सबसे बड़ी मांग आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने और किसानों को समय पर भुगतान दिलाने की थी। किसानों ने कहा कि जब तक मूल्य की घोषणा समय पर नहीं होती, मिलें मनमाने तरीके से भुगतान करती हैं।
दूसरी मांग बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द और मूंग सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की थी। तीसरी मांग आलू भंडारण शुल्क में सरकारी सहायता से जुड़ी थी — किसानों ने कहा कि जिन पात्र किसानों ने पहले ही भंडारण से आलू निकाल लिया है, उन्हें भी इस सहायता का लाभ दिया जाए। चौथी मांग आलू बीज की कीमत 1500 रुपये प्रति कुंतल तक सीमित करने की थी, क्योंकि इस समय महंगे बीज ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
पांचवीं मांग ठेका और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी फसल नुकसान का मुआवजा देने की थी, ताकि बटाईदार किसान छूटे नहीं। छठी मांग समितियों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की थी, क्योंकि बुवाई और पराली प्रबंधन के इस मौसम में खाद की कमी किसानों को परेशान करती है।
गन्ना भाव 500 रुपये: किसान नेताओं का तर्क क्या है
जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उनका तर्क था कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
किसान नेताओं ने यह भी कहा कि चीनी के बढ़ते बाजार मूल्य के साथ एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए गन्ना मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण किया जाना चाहिए। उनका सवाल था कि जब चीनी मिलों को चीनी, एथेनॉल और शीरे तीनों से कमाई हो रही है, तो किसानों को इसका फायदा क्यों नहीं मिल रहा। 500 रुपये प्रति कुंतल की मांग इसी न्यायसंगत हिस्सेदारी के आधार पर रखी गई है।
लागत बढ़ी, भाव वही: पुराने आंकड़े क्या कहते हैं
यहां यह समझना जरूरी है कि किसानों की नाराजगी कहां से आ रही है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी अगेती प्रजाति के लिए 400 रुपये, सामान्य के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 355 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया था। वहीं 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — किसानों की 500 रुपये की मांग इसी नए सत्र के लिए है।
किसानों का कहना है कि पिछले सत्र के भाव के हिसाब से लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। एक ओर डीएपी और यूरिया के दाम, डीजल की कीमत और मजदूरी बढ़ी है, दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। हापुड़ के किसानों ने इसी पृष्ठभूमि में मुआवजे और मूल्य वृद्धि की दोहरी मांग रखी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, असमय बारिश से हुई फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल थी।
आलू बीज और खाद: गन्ने के साथ दूसरी फसलों की चिंता
इस प्रदर्शन की एक खास बात यह थी कि मांगें सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं थीं। किसानों ने आलू बीज की महंगी कीमत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसकी कीमत 1500 रुपये प्रति कुंतल तक सीमित करने की मांग की। हापुड़ में आलू भी एक प्रमुख नकदी फसल है, और महंगे बीज ने रबी की बुवाई से पहले किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा, भंडारण शुल्क में सरकारी सहायता का मुद्दा भी उठा। किसानों ने कहा कि जिन पात्र किसानों ने भंडारण से आलू पहले ही निकाल लिया है, उन्हें भी सहायता का लाभ मिलना चाहिए, और समितियों पर यूरिया-डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता होनी चाहिए।
प्रशासन को चेतावनी: आंदोलन तेज करने की धमकी
किसान नेताओं ने प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि अगर मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। पवन हूण गुर्जर ने साफ कहा कि किसान अब इंतजार के मूड में नहीं हैं — पेराई सत्र शुरू होने से पहले मूल्य की घोषणा और बकाया भुगतान की गारंटी चाहिए।
यह चेतावनी इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों गन्ना मूल्य को लेकर प्रदर्शन तेज हैं। हापुड़ से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर तथा बुलंदशहर जैसे जिलों में भी मूल्य वृद्धि की मांगें उठ चुकी हैं, और इस प्रदर्शन से राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ेगा।
यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है यह खबर
यह खबर सिर्फ हापुड़ तक सीमित नहीं है। पश्चिमी यूपी गन्ने का सबसे बड़ा बेल्ट है, और यहां की मांगें पूरे प्रदेश के मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं। एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है, और किसान संगठनों का दबाव जितना तेज होगा, सरकार पर फैसला उतना ही जल्द लेने का दबाव बढ़ेगा।
किसानों के लिए यह भी संदेश है कि अपने अधिकारों के लिए संगठित आवाज जरूरी है। हापुड़ के किसानों ने न सिर्फ मूल्य की मांग उठाई, बल्कि बारिश से हुए नुकसान के सर्वे, ठेका-बटाई किसानों के मुआवजे और खाद की उपलब्धता जैसे व्यावहारिक मुद्दों को भी ज्ञापन में जगह दी।
स्रोत: जागरण (17 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (17 अक्टूबर 2026)
आपके सवाल
प्रश्न: हापुड़ में 16 अक्टूबर को किस संगठन ने प्रदर्शन किया था? उत्तर: भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट, हापुड़ पर धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संगठन के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर हुआ, जिसका नेतृत्व जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने किया।
प्रश्न: किसानों की मुख्य मांग क्या थी? उत्तर: किसानों की सबसे बड़ी मांग आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने और किसानों को समय पर भुगतान दिलाने की थी। इसके अलावा फसल नुकसान पर मुआवजा, आलू बीज की कीमत सीमा और खाद की उपलब्धता समेत कुल छह मांगें रखी गईं।
प्रश्न: 2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी घोषित हो गया है क्या? उत्तर: नहीं, 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 सत्र के लिए अगेती का भाव 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त का 355 रुपये प्रति कुंतल था। हापुड़ के किसान नए सत्र के लिए 500 रुपये की मांग कर रहे हैं।
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