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₹500 गन्ना भाव और बेमौसम बारिश के मुआवजे की मांग: हापुड़ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का धरना, 6 मांगों से बढ़ा दबाव

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 18, 2026 • 6 min read
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₹500 गन्ना भाव और बेमौसम बारिश के मुआवजे की मांग: हापुड़ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का धरना, 6 मांगों से बढ़ा दबाव
अंतिम अपडेट: October 18, 2026 11:46 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नए पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत में अब बस कुछ दिन बचे हैं, और इसी बीच उत्तर प्रदेश में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा को लेकर किसान संगठनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत शुक्रवार को हापुड़ में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल करने समेत छह मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब राज्य सरकार ने अभी तक पेराई सत्र 2026-27 के लिए नया एसएपी घोषित नहीं किया है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी 400 रुपये प्रति कुंतल (अगेती) घोषित हुआ था, जबकि इस बार किसान संगठन 500 से 600 रुपये प्रति कुंतल तक की मांग कर रहे हैं। हापुड़ का यह प्रदर्शन प्रदेशभर में चल रहे किसान आंदोलन की एक और कड़ी है।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में क्या हुआ

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर शुक्रवार को संगठन के जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान हापुड़ कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए। पंचायत की अध्यक्षता ओमपाल सिंह सरदार ने की। किसानों ने पहले पंचायत की, फिर कलेक्ट्रेट पर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन में मोनू त्यागी, जितेंद्र नागर, राधेलाल त्यागी, दुर्गेश तोमर, सत्या गुर्जर, सुधीर त्यागी, कटार सिंह, रूपराम, मनोज, विजेंद्र अधाना, पारुल त्यागी, लीले सिंह, डॉ. ओंकार, सुनील शर्मा, अरुण त्यागी, महेंद्र त्यागी, पूरन सिंह, लाला मावी, विक्रम, सुनील विधूड़ी और संजय त्यागी समेत संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

धरने के बाद किसानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांगों पर गंभीरता से विचार करने और जल्द फैसला लेने की मांग की गई। किसान नेताओं ने चेतावनी भी दी कि अगर मांगों पर शीघ्र प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होगा।

छह मांगें: किसानों ने सरकार से क्या-क्या मांगा

1. गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल: आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 500 रुपये प्रति कुंतल किया जाए और गन्ने का भुगतान किसानों को समय पर दिलाया जाए।

2. फसल नुकसान का मुआवजा: बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाए।

3. ठेका और बटाईदारों को भी मुआवजा: ठेका और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए। ऐसे किसानों के लिए संयुक्त सत्यापन की विशेष व्यवस्था बनाई जाए।

4. आलू भंडारण शुल्क में सहायता: आलू भंडारण (कोल्ड स्टोर) शुल्क में सरकारी सहायता योजना का लाभ उन पात्र किसानों को भी दिया जाए, जिन्होंने शासनादेश जारी होने से पहले ही अपना आलू कोल्ड स्टोर से निकाल लिया था।

5. सस्ता आलू बीज: आलू बीज की कीमत अधिकतम 1500 रुपये प्रति कुंतल तक सीमित की जाए, ताकि आलू किसानों पर बीज की महंगाई का बोझ न पड़े।

6. खाद की उपलब्धता: समितियों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को फसल की जरूरत के समय खाद के लिए भटकना न पड़े।

इसके साथ ही किसानों ने मांग की कि फसल की जरूरत के मुताबिक समितियों और विक्रय केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक रखा जाए तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक वसूली पर कठोर कार्रवाई की जाए।

किसान नेताओं ने क्या कहा

जिलाध्यक्ष पवन हूण गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के मूल्य में लागत के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हो रही है।

उनका कहना था कि चीनी के बढ़ते बाजार मूल्य के साथ एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए गन्ना मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण किया जाना चाहिए। अन्नदाता प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच खेती कर रहा है — अगर सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र प्रभावी निर्णय नहीं लिया, तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

2026-27 एसएपी की घोषणा क्यों है अहम

पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा में अब तक की देरी ही प्रदेशभर के किसान प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह है। चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, लेकिन नया मूल्य घोषित न होने से किसान असमंजस में हैं। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी 400 रुपये प्रति कुंतल (अगेती) घोषित हुआ था।

किसान संगठन लंबे समय से 500 से 600 रुपये प्रति कुंतल की मांग कर रहे हैं। हापुड़ से पहले बुलंदशहर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बिजनौर समेत कई जिलों में भी इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे में सरकार की ओर से एसएपी की घोषणा का इंतजार हर गन्ना किसान को है, क्योंकि नया सत्र शुरू होने से पहले मूल्य तय होना किसान हित में सबसे अहम कदम होगा।

आपके सवाल

प्रश्न: किसानों ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य कितना करने की मांग की है? उत्तर: हापुड़ के किसानों ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 500 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग की है।

प्रश्न: प्रदर्शन के बाद किसानों ने ज्ञापन किसे सौंपा? उत्तर: प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

प्रश्न: बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए क्या मांग की गई? उत्तर: किसानों ने मांग की कि बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग सहित फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए, और ठेका-बटाई पर खेती करने वालों को भी मुआवजा मिले।

प्रश्न: आलू किसानों के लिए क्या मांगें रखी गईं? उत्तर: आलू भंडारण शुल्क में सरकारी सहायता का लाभ शासनादेश से पहले आलू निकाल चुके पात्र किसानों को भी देने और आलू बीज की कीमत अधिकतम 1500 रुपये प्रति कुंतल तक सीमित करने की मांग रखी गई।

प्रश्न: खाद को लेकर किसानों ने क्या कहा? उत्तर: किसानों ने समितियों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी, जमाखोरी व अधिक वसूली पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

स्रोत: जागरण, अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान (17–18 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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