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₹600 प्रति कुंतल गन्ना भाव की मांग: हापुड़ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का हल्ला बोल, समय पर भुगतान और 35 दिन में नामांतरण की चेतावनी

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 6, 2026 • 6 min read
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₹600 प्रति कुंतल गन्ना भाव की मांग: हापुड़ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का हल्ला बोल, समय पर भुगतान और 35 दिन में नामांतरण की चेतावनी
अंतिम अपडेट: October 6, 2026 2:28 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट का परिसर 23 सितंबर को नारों से गूंज उठा, जब भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी वहां जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें सीधी थीं — गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति कुंतल किया जाए, बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान तय समय पर हो, और जमीन के नामांतरण जैसे काम 35 दिन के भीतर पूरे किए जाएं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि समस्याओं की अनदेखी जारी रही तो संगठन आंदोलन और तेज करेगा।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब नया पेराई सत्र 2026-27 दरवाजे पर है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक नया राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित नहीं किया है। यही अनिश्चितता किसान आंदोलनों को हवा दे रही है।

प्रदर्शन में क्या हुआ

23 सितंबर (बुधवार) को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और पदाधिकारी हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जुटे। उन्होंने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल करने और बकाया भुगतान तय समय सीमा के भीतर दिलाने की मांग दोहराई।

प्रदर्शन के दौरान गन्ने के साथ-साथ जमीन और परिवहन से जुड़े मुद्दे भी उठे। गांव जंक्शन और चिनीमंडी की खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नामांतरण की प्रक्रिया 35 दिनों के भीतर पूरी करने, भूमि अभिलेखों में हिस्सेदारी की गलतियों को जल्द ठीक कराने और वाहनों से कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग की।

किसानों की 5 बड़ी मांगें

  1. गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल — किसानों ने सरकार और चीनी मिलों से गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग की।
  2. बकाया गन्ना मूल्य का समय पर भुगतान — चीनी मिलों की ओर से गन्ने का भुगतान तय समय पर होना चाहिए। किसानों का कहना है कि भुगतान में देरी से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए बकाया गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान कराया जाए।
  3. 35 दिन में नामांतरण — जमीन से जुड़े मामलों में नामांतरण की प्रक्रिया 35 दिन के भीतर पूरी करने की मांग रखी गई।
  4. भूमि रिकॉर्ड की गलतियां ठीक हों — भूमि अभिलेखों में हिस्सेदारी से जुड़े विवरणों में सुधार के मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग की गई।
  5. अवैध वसूली पर रोक — वाहनों से कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाने और संबंधित मामलों में कार्रवाई की मांग उठाई गई।

क्यों उठ रही 600 रुपये की मांग: गन्ना भाव का गणित

किसानों की 600 रुपये की मांग को समझने के लिए गन्ने के मौजूदा भाव को जानना जरूरी है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति कुंतल तय किया था — यह पिछले सत्र की दर है। वहीं 2026-27 सत्र के लिए यूपी सरकार ने अभी तक नया SAP घोषित नहीं किया है।

केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति कुंतल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत की बुनियादी रिकवरी दर पर लागू होगा। यह जानकारी इकोनॉमिक टाइम्स और चिनीमंडी की मई 2026 की खबरों में प्रकाशित हुई थी।

किसान संगठनों का तर्क है कि FRP सिर्फ न्यूनतम मूल्य है और यूपी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य में SAP उससे काफी ऊपर होना चाहिए। लागत, महंगाई और देरी को देखते हुए कई किसान संगठन 450 से 600 रुपये प्रति कुंतल की मांग उठा रहे हैं।

भुगतान में देरी: हापुड़ के किसानों की असली दिक्कत

हापुड़ में भुगतान का मुद्दा नया नहीं है। दैनिक जागरण की 2 सितंबर 2026 की खबर के अनुसार, जिले के गन्ना किसानों के करीब 203.42 करोड़ रुपये बकाया थे। बैठक में कोर्ट द्वारा नियुक्त आईआरपी अनुराग गोयल ने भरोसा दिलाया था कि सिंभावली और बृजनाथपुर चीनी मिलों में चीनी और सह-उत्पादों की बिक्री से करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान 15 अक्टूबर 2026 तक करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि शेष करीब 100 करोड़ रुपये आगामी पेराई सत्र की चीनी बिक्री से चुकाए जाएंगे।

रॉयल बुलेटिन की खबर के मुताबिक, बैठक में धौलाना विधायक धर्मेश तोमर और हापुड़ सदर विधायक विजयपाल आढ़ती ने किसानों के बकाया भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई थी। किसानों का कहना है कि भुगतान में देरी से घर का खर्च चलाना और अगली फसल की तैयारी करना दोनों मुश्किल हो जाता है।

नामांतरण और भूमि रिकॉर्ड: दूसरी बड़ी शिकायत

गन्ने के भाव के बाद प्रदर्शन की दूसरी बड़ी वजह जमीन से जुड़े कामों में देरी रही। किसानों ने नामांतरण की प्रक्रिया 35 दिनों के भीतर पूरी करने की मांग की। ग्रामीण इलाकों में जमीन के नामांतरण, हिस्सेदारी के रिकॉर्ड में सुधार और खसरा-खतौनी की गलतियों को ठीक कराने में महीनों लग जाते हैं, जिससे किसानों को बैंक ऋण, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत होती है। किसान नेताओं का कहना है कि कागजी कामों में अटकने से किसान का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

वाहनों से अवैध वसूली का मुद्दा

प्रदर्शन में एक और मुद्दा उठा — वाहनों से कथित अवैध वसूली। किसानों का आरोप है कि गन्ना ढुलाई और अन्य कामों में लगे वाहनों से अवैध वसूली की जाती है। किसानों ने ऐसी वसूली पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा और किसान आगे और कड़ा रुख अपनाएंगे।

आगे क्या: पेराई सत्र से पहले भाव तय हो

नया पेराई सत्र 2026-27 कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है और हापुड़ की सिंभावली व बृजनाथपुर चीनी मिलों को 15 से 20 अक्टूबर के बीच संचालित करने का लक्ष्य है। किसानों की मांग है कि मिलें चलने से पहले गन्ने का भाव और बकाया भुगतान की स्थिति साफ हो जाए। 2026-27 सत्र के लिए SAP की घोषणा अभी बाकी है, और यही वह फैसला है जिस पर किसानों की नजर टिकी है।

जवाब जानिए

प्रश्न: हापुड़ में प्रदर्शन कब और किसने किया? उत्तर: 23 सितंबर 2026 (बुधवार) को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी हापुड़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के लिए जुटे।

प्रश्न: किसानों की मुख्य मांग क्या है? उत्तर: गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल, बकाया गन्ना मूल्य का तय समय पर भुगतान, 35 दिन में नामांतरण, भूमि रिकॉर्ड की गलतियां ठीक करना और अवैध वसूली पर रोक।

प्रश्न: अभी गन्ने का सरकारी भाव क्या है? उत्तर: 2025-26 के लिए यूपी का SAP अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति कुंतल था। 2026-27 के लिए नया SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। केंद्र ने 2026-27 चीनी सत्र का FRP 365 रुपये प्रति कुंतल तय किया है।

प्रश्न: नामांतरण की मांग क्यों उठी? उत्तर: जमीन के नामांतरण और भूमि रिकॉर्ड सुधार में महीनों लग जाते हैं, जिससे बैंक ऋण और योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत होती है। इसलिए 35 दिन में नामांतरण की मांग रखी गई।

प्रश्न: क्या सरकार ने भाव बढ़ाने पर कोई फैसला लिया है? उत्तर: नहीं। 2026-27 के लिए यूपी सरकार ने नया SAP घोषित नहीं किया है। किसान संगठन 450 से 600 रुपये तक की मांग उठा रहे हैं, अंतिम फैसला सरकार का होगा।

स्रोत: गांव जंक्शन, चिनीमंडी, दैनिक जागरण, रॉयल बुलेटिन, इकोनॉमिक टाइम्स

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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