हापुड़ गन्ना समिति की बैठक में किसानों की बड़ी मांग: ₹500 कुंतल गन्ना मूल्य, बकाया पर 15% ब्याज, 15 अक्टूबर से पेराई का निर्देश

हापुड़ की सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड के प्रांगण में शनिवार को हुई वार्षिक निकाय की बैठक में किसानों की नाराजगी और उम्मीदें — दोनों साफ-साफ सुनाई दीं। सभापति कुणाल चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में क्षेत्र के गन्ना किसानों के हितों, सालों से लटके बकाया भुगतान, आगामी पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों और गन्ना मूल्य बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कई ऐसे कड़े प्रस्ताव पारित किए गए, जिनका सीधा असर हापुड़ क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों पर पड़ेगा।
यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि ₹500 प्रति कुंतल गन्ना मूल्य अभी किसानों की मांग है, घोषणा नहीं। पेराई सत्र 2026-27 का राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) अभी घोषित नहीं हुआ है — सरकार की ओर से घोषणा बाकी है। पिछले पेराई सत्र 2025-26 का घोषित SAP ₹400 प्रति कुंतल (अगेती) था। बैठक में पारित सभी प्रस्ताव समिति और प्रशासन की मांगें हैं, जिन्हें राज्य सरकार और गन्ना आयुक्त के स्तर पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
₹500 कुंतल गन्ना मूल्य और 14 दिन में भुगतान की मांग
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से किसानों की ज्वलंत समस्याएं उठाई गईं। समिति ने राज्य सरकार और प्रशासन से आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए ₹500 प्रति कुंतल गन्ना मूल्य घोषित करने की पुरजोर मांग की। किसानों का तर्क है कि खाद, डीजल, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में मौजूदा मूल्य से खेती घाटे का सौदा बन रही है।
साथ ही समय पर भुगतान से जुड़ा एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया गया — जो चीनी मिलें भुगतान समय पर नहीं करेंगी, उनके गन्ना क्रय केंद्र और आवंटित क्षेत्र काटकर पेराई सत्र 2026-27 में उन मिलों को दे दिए जाएंगे, जो 14 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत भुगतान करती हैं।
सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल को अल्टीमेटम: 15% ब्याज सहित बकाया चुकाएं
बैठक की अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन कुणाल चौधरी ने क्षेत्र की दो प्रमुख चीनी मिलों — सिंभावली और ब्रजनाथपुर के प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने साफ कहा कि पेराई सत्र 2025-26 का जितना भी गन्ना मूल्य बकाया है, उसका तत्काल प्रभाव से 15 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान किया जाए।
चेयरमैन ने चेतावनी दी कि यदि इन दोनों मिलों का ढुलमुल रवैया जारी रहा तो इनके गन्ना क्रय केंद्रों को काटकर दूसरी पाबंद चीनी मिलों को आवंटित कर दिया जाएगा। यानी, जो मिल किसानों को समय पर पैसा नहीं देगी, उसका क्षेत्र ही उससे छीन लिया जाएगा और समय पर भुगतान करने वाली मिल को दे दिया जाएगा। किसानों ने इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि हापुड़ क्षेत्र में इन्हीं दो मिलों का बकाया सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
बैठक में समिति सचिव, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, संचालक मंडल के सदस्यों और किसान प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान सिंभावली, ब्रजनाथपुर, मोदीनगर, नंगलामल, साबितगढ़ और अनामिका चीनी मिलों के अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्हें पारित प्रस्तावों पर सख्ती से अमल करने की हिदायत दी गई।
पेराई कब से शुरू होगी: 15 अक्टूबर का सख्त निर्देश
बैठक में आगामी पेराई सत्र 2026-27 को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय की गई। चेयरमैन ने निर्देश दिए कि सभी चीनी मिलें 15 अक्टूबर तक हर हाल में पेराई कार्य शुरू करें। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि गन्ने की पेराई में देरी होने पर गेहूं की बुवाई भी लेट हो जाती है, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है।
समिति का कहना है कि समय से पेराई शुरू होने पर किसान नवंबर के पहले पखवाड़े में ही खेत खाली करके गेहूं बो सकेंगे, जिससे रबी की फसल का पूरा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही गन्ने की पैदावार बढ़ाने और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए समिति और चीनी मिलों के माध्यम से किसानों को रोगरहित उत्तम प्रजाति के गन्ना बीज अनुदान पर उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है।
अनुदानित बीज और सट्टा प्रदर्शन मेलों का भी जिक्र
बैठक में तय किया गया कि समिति और चीनी मिलों के माध्यम से किसानों को रोगरहित उत्तम प्रजातियों के गन्ना बीज अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि लाल सड़न जैसी बीमारियों से भी फसल को बचाया जा सकेगा।
इस अवसर पर भूमि विकास बैंक के चेयरमैन रायसिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
“मिलें बिक चुकी हैं” — चेयरमैन का दावा, 15 अक्टूबर तक ₹100 करोड़ भुगतान की उम्मीद
अमर उजाला के अनुसार, चेयरमैन कुणाल चौधरी ने बैठक के बाद कहा कि बैठक में कोई हंगामा नहीं हुआ है और किसानों की मुख्य समस्या बकाया गन्ना भुगतान ही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी 15 अक्टूबर तक किसानों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान हो जाएगा।
चेयरमैन ने यह भी कहा कि सिंभावली और ब्रजनाथपुर — दोनों चीनी मिलें बिक चुकी हैं, और इसका समाधान भी जल्द होने वाला है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो हापुड़ क्षेत्र के उन हजारों किसानों के लिए यह बड़ी राहत की खबर होगी, जिनका गन्ना मूल्य लंबे समय से अटका हुआ है। हालांकि, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बकाये की स्थिति की जानकारी अपनी गन्ना समिति और ई-गन्ना ऐप पर नियमित रूप से जांचते रहें।
किसानों के लिए आगे क्या
हापुड़ की बैठक से तीन बातें साफ हैं — गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग अब औपचारिक प्रस्ताव बन चुकी है, समय पर भुगतान न करने वाली मिलों के क्रय केंद्र छीनने की तैयारी है, और 15 अक्टूबर पेराई शुरू करने व बकाया निपटाने — दोनों की समयसीमा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार ₹500 कुंतल की मांग पर क्या फैसला लेती है और डिफाल्टर मिलें 15 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया चुकाने के निर्देश का कितना पालन करती हैं। अगर आप हापुड़ क्षेत्र के गन्ना किसान हैं और आपका बकाया अटका हुआ है, तो अपनी गन्ना समिति में लिखित शिकायत जरूर दर्ज कराएं और गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
पूछे जाने वाले प्रश्न
हापुड़ गन्ना समिति की बैठक में किसानों ने क्या मांग रखी? समिति ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए ₹500 प्रति कुंतल गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग की है। साथ ही 14 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत भुगतान न करने वाली मिलों के क्रय केंद्र और आवंटित क्षेत्र काटकर दूसरी मिलों को देने का प्रस्ताव पारित किया गया।
क्या ₹500 कुंतल का गन्ना मूल्य घोषित हो गया है? नहीं। यह अभी किसानों और समिति की मांग है। पेराई सत्र 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 का घोषित SAP ₹400 प्रति कुंतल (अगेती) था।
किन मिलों को 15 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया चुकाने का निर्देश मिला? हापुड़ क्षेत्र की सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिलों को पेराई सत्र 2025-26 के अवशेष गन्ना मूल्य का 15 प्रतिशत ब्याज सहित तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
15 अक्टूबर की तारीख क्यों अहम है? समिति ने निर्देश दिया है कि सभी चीनी मिलें 15 अक्टूबर तक पेराई शुरू करें, ताकि गेहूं की बुवाई में देरी न हो। चेयरमैन के दावे के अनुसार, इसी तारीख तक किसानों को ₹100 करोड़ का बकाया भुगतान भी हो जाएगा।
बकाये की शिकायत किसान कहां दर्ज कराएं? किसान अपनी संबंधित गन्ना समिति में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा गन्ना विभाग के 24 घंटे चलने वाले टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
स्रोत: अमर उजाला (हापुड़, 26 सितंबर 2026) और खबरवाला24 (26 सितंबर 2026)।
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