हापुड़ के 10 गांवों ने सिंभावली-ब्रजनाथपुर से तोड़ा नाता: 184 केंद्र छिनने के बाद अब दूसरे मिलों से जोड़ने की मांग

हापुड़ के गन्ना किसानों ने साफ संदेश दे दिया है — जिस मिल से भुगतान नहीं मिलता, उससे नाता रखने का कोई मतलब नहीं। सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से जुड़े दस गांवों के किसानों ने केंद्र बदलने के प्रस्ताव गन्ना समितियों को सौंप दिए हैं। अब समितियों के सचिव इन प्रस्तावों के साथ मुख्य सचिव के यहां अपील करेंगे, ताकि इन गांवों के केंद्र समय पर भुगतान करने वाली दूसरी मिलों से जुड़ जाएं।
यह मांग अचानक नहीं उठी है। गन्ना भुगतान में लगातार लापरवाही पर गन्ना आयुक्त के आदेश से सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से पहले ही 184 गन्ना खरीद केंद्र हटा लिए गए हैं। ये केंद्र मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की नंगलामल, चंदनपुर, साबितगढ़, मवाना, असमौली, चॉगीपुर, अनामिका, वीनस, अगवानपुर, टिकौला और दौराला मिल को दे दिए गए हैं। अब सिंभावली पर सिर्फ छह गांव और ब्रजनाथपुर पर महज चार गांव रह गए हैं, जिससे दोनों मिलों के पेराई सत्र पर ही संकट खड़ा हो गया है।
एडीएम से मिले किसान, सोमवार को गन्ना आयुक्त से भेंट
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष पवन हूण के नेतृत्व में किसानों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को एडीएम संदीप कुमार से मिला। उन्होंने दत्तियाना समेत अन्य गांवों के केंद्र दूसरी मिलों से जोड़ने की मांग रखी और बताया कि सिंभावली गन्ना समिति के सचिव से प्रस्ताव करा दिया गया है। अब सोमवार (26 अक्टूबर) को किसान गन्ना आयुक्त से मिलेंगे।
किसानों का तर्क सीधा है — जब अच्छी भुगतान वाली मिलों के केंद्र गांव में लग सकते हैं, तो उन्हें पिछड़ रही मिलों से बांधे रखना गलत है। जिला गन्ना अधिकारी अंगद सिंह ने कहा है कि दस गांवों से प्रस्ताव मिले हैं और समिति सचिव इन्हें तैयार कर रहे हैं। जिन मिलों को 184 केंद्र दिए गए हैं, उनका भुगतान रिकॉर्ड बेहद अच्छा है।
7.5 किलोमीटर के दायरे का पेंच
इस लड़ाई में एक नियम सबसे बड़ी अड़चन है — साढ़े सात किलोमीटर की परिधि का नियम। गन्ना विभाग के अनुसार इन गांवों के प्रस्ताव पहले भी गन्ना आयुक्त के सामने रखे गए थे, लेकिन ये गांव मिलों के साढ़े सात किलोमीटर की परिधि में आते हैं, इसलिए प्रस्ताव रद्द हो गए थे। आदेश में भी इसी दायरे का हवाला दिया गया है।
इसीलिए अब किसान सीधे मुख्य सचिव से अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि दूरी का नियम किसानों के हित से ऊपर नहीं हो सकता, खासकर जब मिल का भुगतान रिकॉर्ड ही खराब हो। सफल होने पर यह पूरे प्रदेश के किसानों के लिए मिसाल बनेगी।
किन गांवों के केंद्र बदलने की मांग है
खबर के अनुसार सिंभावली से जुड़े केंद्रों में गंदूनंगला/नगलाबढ़ (96 हेक्टेयर, 0.81 लाख क्विंटल), दत्तियाना (288 हेक्टेयर, 2.44 लाख क्विंटल), दरियापुर/कुराना (329 हेक्टेयर, 2.79 लाख क्विंटल), ढाना (366 हेक्टेयर, 3.10 लाख क्विंटल), खैय्या (203 हेक्टेयर, 1.72 लाख क्विंटल) और माधापुर प्रथम (179 हेक्टेयर, 1.52 लाख क्विंटल) शामिल हैं।
ब्रजनाथपुर से जुड़े केंद्रों में मिल द्वार (3217 हेक्टेयर, 27.26 लाख क्विंटल), भटैल (167 हेक्टेयर, 1.41 लाख क्विंटल), हसनपुर कांकर (140 हेक्टेयर, 1.19 लाख क्विंटल), मीरपुर कलां (147 हेक्टेयर, 1.24 लाख क्विंटल) और काठीखेड़ा (120 हेक्टेयर, 1.02 लाख क्विंटल) हैं। सबसे बड़ा केंद्र मिल द्वार अकेले ही 27 लाख क्विंटल से ज्यादा उत्पादन से जुड़ा है।
भुगतान का पुराना संकट: 160 करोड़ बकाया, वेतन भी अटका
इस विवाद की जड़ में भुगतान का पुराना संकट है। खबर के अनुसार किसानों का करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी बकाया है और मिल कर्मचारियों का करोड़ों का वेतन भी अटका है। जब मिल चलाने वाले ही वेतन को तरस रहे हों, तो सुचारू पेराई की उम्मीद कैसे हो — यही किसानों का सवाल है।
यह संकट नया नहीं है। पिछले पेराई सत्र में भी इन दोनों मिलों से 36 गांवों के केंद्र हटा दिए गए थे, जिसके बाद दोनों मिलें फरवरी में ही बिना गन्ने के रह गई थीं। उन गांवों का करीब 65 लाख क्विंटल गन्ना मेरठ, मोदीनगर और बुलंदशहर की मिलों को सप्लाई हुआ था।
सितंबर की हापुड़ गन्ना समिति बैठक में भी यही गुस्सा दिखा था। वहां किसानों ने 2026-27 के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठाई और प्रस्ताव पारित किया कि देर से भुगतान करने वाली मिलों के केंद्र काटकर 14 दिन में भुगतान करने वाली मिलों को दे दिए जाएं। सिंभावली और ब्रजनाथपुर को 2025-26 का बकाया 15 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का अल्टीमेटम भी दिया गया था।
पेराई सत्र पर क्या असर पड़ेगा
अगर ये दस गांव भी दूसरी मिलों से जुड़ जाते हैं, तो सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल का क्या होगा? दोनों मिलों पर अब गिने-चुने गांव ही बचे हैं। इतने कम गन्ने पर मिल चलाना मुश्किल होगा और पेराई सत्र में देरी की आशंका बढ़ेगी। जिन मिलों को ये केंद्र मिलेंगे, उन पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन किसानों को समय पर भुगतान की उम्मीद भी बढ़ेगी।
किसानों के लिए क्या करना जरूरी है
अगर आप भी इन गांवों से हैं, तो अपनी गन्ना समिति के सचिव से संपर्क में रहें और प्रस्ताव की लिखित जानकारी लें। पर्ची और सट्टा कागजात संभालकर रखें — केंद्र बदलने पर नए मिल के साथ हिसाब इन्हीं से मिलेगा। अंतिम आदेश गन्ना आयुक्त या मुख्य सचिव के स्तर से ही जारी होगा।
भुगतान की शिकायत के लिए किसान गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर संपर्क कर सकते हैं। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 है। ये नंबर आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित हैं।
आगे क्या होगा
अब निगाहें सोमवार की बैठक और मुख्य सचिव के यहां दायर अपील पर हैं। अगर अपील स्वीकार होती है, तो दस गांवों के किसान इसी पेराई सत्र से समय पर भुगतान करने वाली मिलों को गन्ना दे सकेंगे। अगर खारिज होती है, तो किसानों के सामने आंदोलन का रास्ता बचता है — हापुड़ में किसान संगठन पहले भी ट्रैक्टर मार्च और धरने से मांगें मनवा चुके हैं।
यह मामला अब सिर्फ दस गांवों का नहीं रहा — यह पूरे प्रदेश के किसानों के लिए टेस्ट केस है कि क्या लापरवाह मिल से केंद्र छुड़ाकर बेहतर मिल से जुड़ा जा सकता है।
स्रोत: अमर उजाला (हापुड़, 25 अक्टूबर 2026), खबरवाला 24 (हापुड़ गन्ना समिति बैठक, सितंबर 2026) और अमर उजाला की पूर्व रिपोर्ट (25 सितंबर 2026)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: हापुड़ के किन गांवों ने केंद्र बदलने की मांग की है? जवाब: सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से जुड़े दस गांवों ने प्रस्ताव दिए हैं। इनमें दत्तियाना, ढाना, खैय्या, माधापुर प्रथम, मिल द्वार, भटैल, हसनपुर कांकर, मीरपुर कलां और काठीखेड़ा शामिल हैं।
सवाल: सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से पहले कितने केंद्र हटाए जा चुके हैं? जवाब: गन्ना आयुक्त के आदेश से इन दोनों मिलों से 184 केंद्र पहले ही हटाए जा चुके हैं, जो मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की मिलों को दिए गए हैं।
सवाल: पहले प्रस्ताव क्यों रद्द हुए थे? जवाब: ये गांव मिलों के साढ़े सात किलोमीटर की परिधि में आते हैं, इसी हवाले से पहले के प्रस्ताव रद्द हुए थे। अब मुख्य सचिव से अपील हो रही है।
सवाल: किसानों का कितना भुगतान बकाया बताया जा रहा है? जवाब: खबर के अनुसार किसानों का करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है और मिल कर्मचारियों का करोड़ों का वेतन भी अटका है।
सवाल: आगे किसानों की क्या योजना है? जवाब: किसान सोमवार (26 अक्टूबर) को गन्ना आयुक्त से मिलेंगे और समिति सचिवों के जरिए मुख्य सचिव से अपील कर रहे हैं।
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