14 दिन में नकद भुगतान नहीं तो चीनी मिल पर ताला! हापुड़ के सिंभावली में तीन संगठनों की संयुक्त पंचायत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। बकाया गन्ना मूल्य और नए पेराई सत्र की भुगतान व्यवस्था को लेकर हापुड़ जिले के सिंभावली में तीन किसान संगठनों ने मिलकर संयुक्त पंचायत की, जिसमें चीनी मिल पर ताला लगाने तक की चेतावनी दे डाली गई। किसानों की दो बड़ी मांगें अब गन्ना आयुक्त को भेजी जाने वाली वार्षिक प्रोसीडिंग रिपोर्ट में दर्ज होंगी, जिसका असर सीधे पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों पर पड़ सकता है।
सिंभावली गन्ना समिति में हुई संयुक्त पंचायत
हापुड़ जिले के सिंभावली स्थित गन्ना समिति कार्यालय पर आयोजित इस संयुक्त पंचायत में तीन अलग-अलग किसान संगठनों के नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर दिखे। खबरों के मुताबिक किसान मजदूर संगठन (पूरन), महात्मा टिकैत गुट और वीएम सिंह संगठन के नेताओं ने संयुक्त पंचायत करके चीनी मिल प्रशासन और समिति अधिकारियों के खिलाफ जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
पंचायत के दौरान प्रदेश अध्यक्ष सुधीर चौधरी (पश्चिमी यूपी) ने समिति सचिव राकेश पटेल से वार्ता की। किसान नेताओं का कहना था कि बकाया भुगतान की समस्या साल दर साल बनी हुई है, जबकि नया पेराई सत्र सिर पर है। अगर समय रहते भुगतान की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो किसान अब चुप नहीं बैठेंगे।
प्रोसीडिंग में दर्ज होंगी दो बड़ी मांगें
पंचायत में किसानों ने स्पष्ट शब्दों में मांग रखी कि गन्ना आयुक्त को भेजी जाने वाली वार्षिक प्रोसीडिंग रिपोर्ट में दो प्रमुख बिंदुओं को अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।
पहली मांग: पिछले पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया गन्ना मूल्य तुरंत चुकाया जाए। किसानों का कहना है कि नया सत्र शुरू होने से पहले पुराना हिसाब साफ होना चाहिए।
दूसरी मांग नए पेराई सत्र को लेकर है। किसानों ने मांग की कि नए सत्र में गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर नकद भुगतान किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता, तो किसान मिल को गन्ने की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर देंगे। यह मांग सीधे उसी 14 दिन के नियम से जुड़ी है, जो गन्ना भुगतान के मामले में पहले से प्रावधानित है।
सचिव का आश्वासन, फिर भी तालाबंदी की चेतावनी
किसानों के इस कड़े रुख को देखते हुए समिति सचिव राकेश पटेल ने किसानों को आश्वस्त किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की इन दोनों प्रमुख मांगों को वार्षिक प्रोसीडिंग रिपोर्ट में शामिल करके उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर इस बार भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई, तो संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ और विभिन्न किसान संगठन मिलकर मिल की तालाबंदी करने के लिए बाध्य होंगे।
पंचायत में चेयरमैन पर लगे गंभीर आरोप
पंचायत के दौरान एक तीखा आरोप भी सामने आया। खबरों के मुताबिक जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गिल ने सिंभावली गन्ना समिति के चेयरमैन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चेयरमैन खुद अपना गन्ना दूसरी मिल को नकद में बेच रहे हैं, जबकि साधारण किसानों को गुमराह किया जा रहा है और उन पर बकाया दबाकर बैठी सिंभावली मिल को ही गन्ना देने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस आरोप पर समिति की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हापुड़ में पहले से गरमाया हुआ है यह मुद्दा
सिंभावली की यह पंचायत अचानक नहीं हुई है। हापुड़ में बकाया भुगतान का मुद्दा पिछले कुछ हफ्तों से लगातार गरमाया हुआ है। इससे पहले हापुड़ स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक निकाय बैठक में भी किसानों ने बकाया भुगतान और गन्ना मूल्य को लेकर तीखी चर्चा की थी। उस बैठक में किसानों ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग उठाई थी।
उसी बैठक में सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों को 15 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया चुकाने का निर्देश दिया गया था, और देरी करने वाली मिलों के गन्ना क्रय केंद्र काटकर दूसरी मिलों को देने की चेतावनी भी दी गई थी। सिंभावली की यह पंचायत उसी दबाव का अगला कदम मानी जा रही है।
14 दिन का नियम और 15 प्रतिशत ब्याज: किसान का कानूनी पक्ष
किसानों की 14 दिन में भुगतान की मांग का कानूनी आधार गन्ना (नियंत्रण) आदेश में मौजूद है, जिसमें मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान करने का प्रावधान है। देरी होने पर किसानों को ब्याज पाने का हक है।
उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2026 के आदेश में 1996-97 से 2025-26 तक के बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज को लेकर गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया था। इसी आदेश के आधार पर मवाना में भी किसानों ने धरना दिया था, जिसके बाद अधिकारियों ने ब्याज का सालवार ब्यौरा लिखित में देने का आश्वासन दिया। यानी पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बकाया और ब्याज को लेकर ऐसा ही आंदोलनात्मक माहौल बन रहा है।
आगे क्या होगा: किसान क्या करें
अब किसानों की दो मांगें प्रोसीडिंग में दर्ज होकर गन्ना आयुक्त के पास जाएंगी। पेराई सत्र 2026-27 नजदीक होने से मिलों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
किसानों के लिए इस समय सबसे जरूरी काम अपने कागज संभालकर रखना है। अपनी गन्ना पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। अगर मिल ने समय पर भुगतान नहीं किया है, तो अपनी समिति से बकाए पर बनने वाले ब्याज का लिखित ब्यौरा जरूर मांगें, जैसा मवाना के किसानों ने किया था।
ध्यान रहे: 500 रुपये का भाव अभी घोषित नहीं हुआ है, यह हापुड़ समिति की मांग है। एसएपी 2026-27 की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सिंभावली की संयुक्त पंचायत में किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
दो मुख्य मांगें हैं। पहली, पिछले पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया गन्ना मूल्य तुरंत चुकाया जाए। दूसरी, नए पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर नकद भुगतान किया जाए, नहीं तो किसान मिल को गन्ने की आपूर्ति बंद कर देंगे।
संयुक्त पंचायत में कौन-कौन से संगठन शामिल थे?
इस संयुक्त पंचायत में किसान मजदूर संगठन (पूरन), महात्मा टिकैत गुट और वीएम सिंह संगठन के नेता शामिल हुए। संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ भी मिल तालाबंदी की चेतावनी के साथ इस मुद्दे पर सक्रिय है।
मिल पर ताला लगाने की चेतावनी क्यों दी गई?
किसान नेताओं का कहना है कि अगर इस बार भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई, तो संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ और विभिन्न किसान संगठन मिलकर मिल की तालाबंदी करने के लिए बाध्य होंगे। यह चेतावनी बकाया भुगतान की लगातार अनदेखी से उपजे गुस्से का नतीजा है।
14 दिन में भुगतान का नियम क्या है?
गन्ना (नियंत्रण) आदेश के तहत चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना होता है। देरी होने पर किसान नियमानुसार ब्याज के हकदार होते हैं।
क्या गन्ना भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो गया है?
नहीं। 500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव अभी घोषित नहीं हुआ है। यह हापुड़ गन्ना समिति की बैठक में उठाई गई मांग है। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
बकाया भुगतान पर ब्याज कैसे मिलेगा?
उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश के मुताबिक देरी से हुए भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज का प्रावधान है। किसान अपनी समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से ब्याज का सालवार लिखित ब्यौरा मांग सकते हैं।
स्रोत: खबरवाला24, रॉयल बुलेटिन (पृष्ठभूमि: अमर उजाला, मावाना टाइम्स)
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