हाई कोर्ट की बड़ी सुनवाई 31 अगस्त को — गन्ना बकाया पर 15% ब्याज मिलेगा या नहीं? पूरा मामला समझें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर 15% ब्याज के मामले में बड़ी सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने पाया कि कुछ अधिकारी 15% की जगह सिर्फ 12% ब्याज दे रहे थे — जो कानून का उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला?
गन्ना नियंत्रण आदेश के अनुसार, अगर कोई चीनी मिल किसान को 14 दिन के अंदर गन्ना भुगतान नहीं करती, तो उस पर 15% सालाना ब्याज देना अनिवार्य है।
लेकिन कई मिलें और कुछ गन्ना आयुक्तों ने यह दर 12% तक कम कर दी थी। इसी के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
कोर्ट ने क्या कहा?
| बात | विवरण |
|---|---|
| कोर्ट की नाराजगी | 12% ब्याज देना “गैरकानूनी” — 15% mandatory है |
| तलब | 2021 से अब तक के सभी पूर्व गन्ना आयुक्तों की लिस्ट माँगी |
| अगली सुनवाई | 31 अगस्त 2026 |
| संभावित कार्रवाई | Contempt of court proceedings हो सकती हैं |
किसानों को कितना फर्क पड़ेगा?
अगर कोर्ट 15% ब्याज enforce कर देता है तो:
- ₹1 लाख बकाया पर = ₹15,000/साल ब्याज (12% पर सिर्फ ₹12,000)
- जो किसान 6 महीने से भुगतान का इंतज़ार कर रहे = ₹7,500 extra मिलेगा
- पिछले सालों का difference भी retrospectively मिल सकता है
किसान क्या करें?
- भुगतान रसीद संभालकर रखें — ब्याज claim के लिए ज़रूरी
- eGanna App पर अपना भुगतान स्टेटस चेक करें
- अगर 14 दिन से ज्यादा देरी हुई तो ब्याज का हक है आपका
- 31 अगस्त के फैसले का इंतज़ार करें — CaneUp पर update मिलेगा
📞 हेल्पलाइन: 1800-121-3203 (toll-free) — गन्ना विकास परिषद
31 अगस्त की सुनवाई का live update CaneUp पर मिलेगा। शेयर करें ताकि हर किसान को पता चले।
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