गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा — ICAR ने अधिसूचित की नई लाल सड़न रोधी प्रजाति CoLk-15201 (इक्षु-7)

लखनऊ: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन संचालित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ ने उत्तर प्रदेश और उत्तर-मध्य भारत के लाखों गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि की घोषणा की है। पिछले पांच वर्षों से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के खेतों में तबाही मचा रहे लाल सड़न (Red Rot) रोग से अप्रभावित रहने वाली नई अगेती गन्ना प्रजाति CoLk-15201 (व्यावसायिक नाम: इक्षु-7) को केंद्रीय किस्म विमोचन उप-समिति (CVRC) द्वारा सामान्य व्यावसायिक खेती के लिए आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है।
संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश शर्मा ने प्रेसवार्ता में बताया कि पुरानी लोकप्रिय प्रजाति Co-0238 में कोलेटोट्राइकम फंगस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था। CoLk-15201 को Co-0238 के आदर्श विकल्प के रूप में 7 वर्षों के कठोर बहु-स्थानीय परीक्षणों के बाद विकसित किया गया है।
CoLk-15201 की 5 प्रमुख कृषि संबंधी विशेषताएं
वैज्ञानिकों द्वारा साझा किए गए परीक्षण आंकड़ों के अनुसार, यह नई प्रजाति कई पैमानों पर पुरानी किस्मों से कहीं आगे है:
- लाल सड़न के प्रति पूर्ण प्रतिरोधी: कृत्रिम इनोक्युलेशन और प्राकृतिक फील्ड परिस्थितियों दोनों में यह किस्म लाल सड़न (Red Rot) और उकठा (Wilt) रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (Highly Resistant) पाई गई है।
- रिकॉर्ड चीनी रिकवरी (13.52%): पेराई सत्र के 10वें माह (नवंबर-दिसंबर) में ही इसमें 13.5% से अधिक चीनी रिकवरी दर्ज की गई है, जो चीनी मिलों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- उच्च औसत पैदावार: सामान्य प्रबंधन में यह प्रजाति 480 से 540 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार देती है, जबकि ट्रेंच विधि और सह-फसली खेती में यह 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है।
- ठोस और सीधा तना: इसका तना मोटा, ठोस और हरा-पीलापन लिए होता है। तेज हवा और भारी बारिश में भी गन्ने के गिरने (Lodging) की समस्या नगण्य रहती है।
- शानदार पेड़ी (Ratoon) क्षमता: पौधे की पहली कटाई के बाद इसकी पेड़ी में कल्ले बहुत तेजी से फूटते हैं, जिससे किसान अगले दो वर्षों तक बिना अतिरिक्त बीज खर्च के बंपर फसल ले सकते हैं।
शोध फार्मों पर बीज गुणन और बुकिंग प्रक्रिया
निदेशक ने बताया कि संस्थान के लखनऊ, मोतीहारी और करनाल फार्मों पर इस प्रजाति का प्रजनक (Breeder Seed) तैयार कर लिया गया है। 15 सितंबर से शुरू होने वाली शरदकालीन बुवाई के लिए उत्तर प्रदेश के पंजीकृत प्रगतिशील किसानों और चीनी मिलों के शोध फार्मों को सिंगल बड चिप्स और टिश्यू कल्चर पौध उपलब्ध कराई जाएगी ताकि आगामी दो वर्षों में इसका बीज पूरे राज्य के सामान्य किसानों तक तेजी से पहुंच सके।
संस्थान ने गन्ना विकास परिषदों को निर्देश दिए हैं कि वे महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्लास्टिक ट्रे में इस नई प्रजाति की नर्सरी तैयार करवाएं ताकि शरदकालीन बुवाई के दौरान किसानों को 100% अंकुरण वाली स्वस्थ पौध उपलब्ध हो सके।
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