पश्चिमी यूपी के 12 जिलों में 13-14 सितंबर को भारी बारिश व तेज हवा का अलर्ट — गन्ने को गिरने से बचाने के लिए तुरंत करें 'कैंची बंधाई'

मुख्य बिंदु (Quick Summary): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ केंद्र ने बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से 13 और 14 सितंबर 2026 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के 12 जनपदों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाओं के साथ भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वर्तमान में 10 से 13 फीट ऊंचे हो चुके गन्ने के खेतों में फसल गिरने (Lodging) के गंभीर खतरे को देखते हुए गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने किसानों को तत्काल ‘कैंची बंधाई’ करने की आपात वैज्ञानिक सलाह दी है।
मेरठ/शाहजहांपुर (CaneUp मौसम व फसल डेस्क — 12 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए आगामी 48 घंटे मौसम के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील साबित होने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की ट्रफ लाइन के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से पश्चिमी यूपी के 12 जिलों में आगामी 13 सितंबर (रविवार) और 14 सितंबर (सोमवार) को आकाशीय बिजली चमकने, तेज अंधड़ और मूसलाधार बारिश का तीव्र दौर देखने को मिल सकता है।
प्रभावित होने वाले मुख्य जनपदों में सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर शामिल हैं।
वर्तमान में खेतों में गन्ने की बढ़वार चरम पर है और पौधे 10 से 13 फीट ऊंचे हो चुके हैं। यदि भारी बारिश के साथ 45 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा चली, तो खेत की नरम मिट्टी में गन्ने की फसल धराशायी (Lodging) हो सकती है।
⚠️ गन्ना गिरने से किसानों को होने वाले 4 बड़े नुकसान
गन्ना शोध परिषद (UPCSR) के वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस समय गन्ना खेत में गिर जाता है:
- पैदावार में 25% से 35% की सीधी गिरावट: तना टूटने से भोजन का प्रवाह रुक जाता है और गन्ने की मोटाई घट जाती है।
- चीनी रिकवरी में भारी कमी: गिरे हुए गन्ने में नई आंखें फूटने लगती हैं और अगोला सूखने लगता है, जिससे सुक्रोज की मात्रा ग्लूकोज में तब्दील हो जाती है।
- चूहों और जंगली जानवरों का हमला: जमीन पर गिरे गन्ने को जंगली सुअर, सियार और चूहे कुतर कर पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।
- रेड रॉट का तीव्र फैलाव: मिट्टी और पानी के संपर्क में आने से फंगस पूरे पौधे में प्रवेश कर जाती है।
🌿 गन्ने को गिरने से बचाने की ‘कैंची बंधाई’ (Cross Tying) तकनीक
शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने किसानों को आज ही खेत में पहुंचकर निम्नलिखित विधि से गन्ने की बंधाई करने का परामर्श दिया है:
- कतारों की कैंची बंधाई: आमने-सामने की दो कतारों के 4 से 5 गन्नों के थानों (Clumps) को आपस में तिरछा मिलाकर अंग्रेजी के ‘X’ (क्रॉस) आकार में गन्ने की निचली सूखी पत्तियों से कसकर बांधें।
- हरी पत्तियों का उपयोग न करें: बंधाई के लिए केवल नीचे की सूखी पत्तियों (Trash) का उपयोग करें, कभी भी ऊपरी हरी पत्तियों को न बांधें क्योंकि इससे प्रकाश संश्लेषण (भोजन बनना) रुक जाता है।
- ऊंचाई पर दूसरा फेरा: पहली बंधाई जमीन से 3 से 4 फीट की ऊंचाई पर और दूसरी बंधाई 6 से 7 फीट की ऊंचाई पर करें। इससे एक प्राकृतिक जाल तैयार हो जाता है जो 60 किमी/घंटे की आंधी को भी आसानी से झेल लेता है।
- जल निकासी की नालियां खोलें: खेत की मेड़ों के निचले सिरों को काटकर मुख्य नाले से जोड़ दें ताकि बारिश का पानी खेत में 12 घंटे से अधिक न रुके।
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