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मौसम विभाग का अलर्ट — पश्चिमी यूपी में 2 से 4 सितंबर तक भारी बारिश, जलभराव से गन्ने को बचाने की सलाह

Randhir Patil Randhir Patil Sep 1, 2026 3 min read
मौसम विभाग का अलर्ट — पश्चिमी यूपी में 2 से 4 सितंबर तक भारी बारिश, जलभराव से गन्ने को बचाने की सलाह
अंतिम अपडेट: September 1, 2026 6:45 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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मेरठ / मुजफ्फरनगर: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट के लिए आगामी 72 घंटों (2 सितंबर से 4 सितंबर 2026) के दौरान गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद और अमरोहा जिलों में 65 मिमी से 115 मिमी तक वर्षा होने का पूर्वानुमान है।

मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने आज शाम पश्चिमी यूपी के सभी संयुक्त गन्ना आयुक्तों और जिला गन्ना अधिकारियों को आपातकालीन एडवाइजरी जारी करते हुए ग्रामीण स्तर पर किसानों को जलभराव से बचाव के उपाय तुरंत अपनाने के निर्देश दिए हैं।

जलभराव से गन्ने में लाल सड़न व गिरने (Lodging) का खतरा

गन्ना शोध परिषद के मुख्य कृषि मौसम वैज्ञानिक ने बताया, “सितंबर माह में गन्ने की फसल 10 से 12 फीट ऊंची हो चुकी होती है और उसका ऊपरी हिस्सा काफी भारी होता है। यदि बारिश के साथ तेज हवाएं चलती हैं और खेत में पानी भर जाता है, तो गन्ने की फसल खेत में गिर (Lodging) जाती है। फसल गिरने से तना टूट जाता है, चूहों का प्रकोप बढ़ जाता है और लाल सड़न (Red Rot) फंगस जड़ों के जरिए तेजी से फैलती है, जिससे पैदावार में 25% तक की गिरावट आ सकती है।”

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए निम्नलिखित 4 आवश्यक सुरक्षा कदम उठाने की सिफारिश की है:

  1. जल निकासी नालियों की तुरंत सफाई: खेत के चारों ओर बनी मुख्य जल निकासी नालियों (Drainage Channels) में जमा घास-फूस और गाद को तुरंत साफ करें ताकि बारिश का पानी 24 घंटे से अधिक खेत में न ठहरे।
  2. गन्ने की बधाई (Tying): जो किसान अभी तक गन्ने की बंधाई नहीं कर पाए हैं, वे दो कतारों के आमने-सामने के 6-8 गन्नों को हरी पत्तियों से आपस में कैंचीनुमा (Cross Tying) बांध दें ताकि तेज हवा में फसल न गिरे।
  3. सिंचाई व यूरिया पर रोक: आगामी तीन दिनों तक खेतों में किसी भी प्रकार की सिंचाई न करें और जमीन में यूरिया खाद बिल्कुल न डालें।
  4. जलभराव के बाद फफूंदनाशक उपचार: बारिश थमने और पानी निकलने के तुरंत बाद खेत की जड़ों के पास कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.2%) या ब्लीचिंग पाउडर 5 किग्रा प्रति एकड़ की दर से बुरकाव करें।

खादर और निचले क्षेत्रों में विशेष निगरानी टीमें गठित

जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा है ताकि हिंडन, काली और गंगा-यमुना के खादर क्षेत्रों में किसानों की फसलों को किसी भी अचानक जलभराव से सुरक्षित रखा जा सके। सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीण नालों और रजवाहों की सफाई का निरीक्षण करें ताकि खेतों से पानी आसानी से बाहर निकल सके।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यदि खेत से 24 से 36 घंटे के भीतर पानी बाहर निकाल दिया जाए, तो गन्ने की फसल को कोई नुकसान नहीं होता बल्कि आगामी शरदकालीन बढ़वार के लिए यह बारिश वरदान साबित हो सकती है।

कृषि रक्षा अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश खत्म होते ही खेतों में रोशनी वाले प्रपंच (Light Traps) और फेरोमोन ट्रैप लगाएं ताकि जलभराव के बाद चोटी बेधक कीट के नए पतंगों को तुरंत नष्ट किया जा सके।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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