इस बार गन्ने से एथेनॉल नहीं बनेगा: उत्पादन 2.8 करोड़ टन तक गिर सकता है, भाव और भुगतान पर क्या असर पड़ेगा

दीपावली के ठीक पहले चीनी उद्योग के सबसे बड़े संगठन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे इस सीजन की पूरी तस्वीर बदल सकती है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बलानी ने कहा है कि 2026-27 के पेराई सत्र में देश का शुद्ध चीनी उत्पादन पिछले साल के 3.1 करोड़ टन से घटकर 2.8 करोड़ टन के आसपास रह सकता है, और इस बार एथेनॉल बनाने के लिए चीनी का कोई डायवर्जन नहीं होगा। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
उत्तर प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों के लिए इस बयान के मायने सीधे हैं — इस बार मिलें गन्ने से चीनी बनाने पर पूरा जोर देंगी।
इस्मा के बयान में क्या-क्या कहा गया
बलानी ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से कहा कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फसल पर मौसम का असली असर कटाई शुरू होने के बाद ही पता चलेगा और 10 से 15 दिन में उपज का आकलन किया जाएगा।
सबसे बड़ा दावा यह है कि इस बार सकल और शुद्ध चीनी उत्पादन एक जैसा — यानी लगभग 2.8 करोड़ टन — रहेगा, क्योंकि एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं होगा। पिछले सत्र में 3.1 करोड़ टन के सकल उत्पादन में से करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल बनाने में चली गई थी। इस्मा का अनुमान है कि 2026-27 में देश की चीनी खपत 2.85 से 2.9 करोड़ टन के बीच रहेगी। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026; हिंदू बिजनेसलाइन, 16 अक्टूबर 2026)
ओपनिंग स्टॉक एक दशक में सबसे कम
इस सीजन की सबसे चिंताजनक संख्या गोदामों से आई है। 1 अक्टूबर 2026 को सत्र की शुरुआत में मिलों के पास चीनी का ओपनिंग स्टॉक सिर्फ 35 से 36 लाख टन था — जो एक दशक से भी अधिक समय में सबसे कम है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कम उत्पादन के कारण स्टॉक इतना घटा है। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
इस्मा ने अपने सकल उत्पादन का अनुमान भी पहले के 3.45 करोड़ टन से घटाकर 3.09 करोड़ टन कर दिया था। इसके पीछे मौसम, कम पैदावार और कम रिकवरी को कारण बताया गया। चिंता की बात यह है कि उत्तर प्रदेश में गन्ने की रेड-रॉट (लाल सड़न) किस्म संबंधी समस्याओं को भी उत्पादन घटने के कारणों में गिना गया है। (चिनीमंडी, 1 अक्टूबर 2026)
भाव का गणित: ₹57.82 से ₹52 तक?
उपभोक्ता मामलों के विभाग की कीमत निगरानी इकाई के मुताबिक, शुक्रवार को चीनी का औसत खुदरा भाव ₹57.82 प्रति किलो था — जो एक साल पहले की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है, लेकिन पिछले महीने की तुलना में 2 प्रतिशत कम। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
एक सरकारी अधिकारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अगले दो हफ्तों में गन्ने की पेराई शुरू होने पर भाव ₹52 प्रति किलो तक घट सकता है। सरकार ने मिलों को यह छूट भी दी है कि अक्टूबर में बनी चीनी को वे अक्टूबर और नवंबर — दोनों महीनों में बेच सकती हैं, और यह मात्रा नियमित मासिक कोटे से अतिरिक्त होगी।
हिंदू बिजनेसलाइन के विश्लेषण के मुताबिक, त्योहारी सीजन में कोई भौतिक कमी नहीं होगी — अक्टूबर में करीब 33 से 34 लाख टन चीनी उपलब्ध रहेगी, जबकि त्योहार के महीने में खपत 24 से 25 लाख टन के आसपास रहेगी। लेकिन 2027 के मध्य तक स्थिति कसी हुई रहेगी: जून से अक्टूबर 2027 के बीच एक्स-मिल भाव ₹50 प्रति किलो को पार कर सकता है। (हिंदू बिजनेसलाइन, 16 अक्टूबर 2026)
एथेनॉल डायवर्जन पर रोक: गन्ना कहां जाएगा
एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 (नवंबर से अक्टूबर) के लिए सरकार जल्द ही ऐसे उपायों की घोषणा करेगी, जिनसे मिलें गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे को जैव ईंधन बनाने की ओर न मोड़ सकें। इसका मकसद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
क्रिसिल के विश्लेषण के मुताबिक, पिछले पांच सालों में एथेनॉल की ओर चीनी का डायवर्जन 2019-20 के 8 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में करीब 30 लाख टन हो गया था। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस; चिनीमंडी, 1 अक्टूबर 2026)
यूपी के किसान के लिए असली मतलब
पहला, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। जब अक्टूबर में बनी चीनी कोटा से बाहर बेचने की छूट मिलेगी, तो मिलों के पास नकदी जल्दी आएगी — और नकदी का सीधा संबंध आपके गन्ना भुगतान से है।
दूसरा, इस्मा के बयान में उत्तर प्रदेश में रेड-रॉट का जिक्र किसानों के लिए चेतावनी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब 47,000 हेक्टेयर घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है — बिजनौर, लखीमपुर और पीलीभीत जैसे बड़े जिलों में कमी दर्ज की गई है। फसल स्वस्थ रखना इस सीजन में और भी जरूरी हो गया है।
तीसरा, भाव को लेकर दो बातें साफ रखें। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है — यह मई 2026 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति का आधिकारिक फैसला है। लेकिन 2026-27 के लिए यूपी का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है — 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में भी भाव बढ़ाने का एलान नहीं हुआ था। (बिजनेस स्टैंडर्ड; गांव जंक्शन, अक्टूबर 2026)
आगे क्या: 2027 में आयात की जरूरत?
अगस्त में कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने ब्राजील से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी, लेकिन घरेलू भाव की तुलना में वैश्विक कीमतें ऊंची होने से अब तक आयात नगण्य रहा है। बलानी का कहना है कि पेराई शुरू होने से कीमतें स्थिर होंगी, लेकिन अगले साल जून-जुलाई तक कम से कम 10 लाख टन चीनी का आयात जरूरी हो सकता है। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
हिंदू बिजनेसलाइन का आकलन और सख्त है: शुद्ध उत्पादन 2.65 से 2.70 करोड़ टन और खपत 2.85 से 2.90 करोड़ टन रहने पर 15 से 25 लाख टन का संरचनात्मक घाटा बनेगा, और सितंबर 2027 तक क्लोजिंग स्टॉक सिर्फ 5 से 15 लाख टन रह सकता है। (हिंदू बिजनेसलाइन, 16 अक्टूबर 2026)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस बार गन्ने से एथेनॉल बिल्कुल नहीं बनेगा? इस्मा के महानिदेशक के मुताबिक, 2026-27 में चीनी का एथेनॉल की ओर कोई डायवर्जन नहीं होगा — सकल और शुद्ध उत्पादन दोनों 2.8 करोड़ टन के आसपास रहेगा। सरकार भी गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे के डायवर्जन पर रोक की घोषणा करने वाली है। हालांकि सी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनता रहेगा। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
क्या चीनी के दाम घटेंगे? एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, प्रमुख राज्यों में पेराई शुरू होने पर खुदरा भाव ₹52 प्रति किलो तक आ सकता है। अभी यह ₹57.82 प्रति किलो है। लेकिन 2027 के मध्य में स्टॉक कम होने से भाव फिर बढ़ने का अनुमान है। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस; हिंदू बिजनेसलाइन, अक्टूबर 2026)
यूपी के किसान को इस खबर से क्या करना चाहिए? पेराई सत्र शुरू होने से पहले अपनी पर्ची, सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाते की जांच कर लें। रेड-रॉट जैसी बीमारियों पर नजर रखें, क्योंकि कमजोर फसल का सीधा असर रिकवरी और भुगतान दोनों पर पड़ता है।
क्या इस बार चीनी का निर्यात होगा? उद्योग का मानना है कि घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात की गुंजाइश नहीं रहेगी, बल्कि 2027 में आयात की जरूरत पड़ सकती है। (हिंदू बिजनेसलाइन, 16 अक्टूबर 2026)
स्रोत: फाइनेंशियल एक्सप्रेस (17 अक्टूबर 2026), हिंदू बिजनेसलाइन (16 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (1 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (28 सितंबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (मई 2026)।
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