सी-हेवी इथेनॉल का भाव 57.97 से 62.23 रुपये करने की मांग: यूपी की 122 मिलों के हित और किसानों के समय पर भुगतान पर क्या असर होगा

चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सोमवार को सरकार से सी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद कीमत 57.97 रुपये से बढ़ाकर 62.23 रुपये प्रति लीटर करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि इथेनॉल का मौजूदा भाव पिछले साल से नहीं बढ़ा है, जबकि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) और केमिकल, श्रम, ईंधन तथा अनुपालन की लागत बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के 122 चीनी मिलों के लिए यह मांग सीधे तौर पर मायने रखती है — मिलों की आर्थिक सेहत जितनी अच्छी होगी, किसानों को गन्ने के भुगतान की संभावना उतनी ही समय पर होगी। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026; बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, और किसानों की सबसे बड़ी चिंता समय पर गन्ना मूल्य भुगतान की है। (एग्रीइनसाइट, सितंबर 2026)
57.97 से 62.23 रुपये: मांग के पीछे का गणित
ISMA की मांग स्पष्ट है — सी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद कीमत में 4.26 रुपये प्रति लीटर (करीब 7.3 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की जाए। संगठन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि मौजूदा भाव 57.97 रुपये प्रति लीटर पिछले साल से बदला नहीं है, लेकिन इस दौरान गन्ने का एफआरपी बढ़ा है और मिलों का परिचालन खर्च भी बढ़ा है। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026; बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
केंद्र ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर) तय किया है, और किसान संगठन इससे कहीं अधिक मूल्य की मांग कर रहे हैं। (जागरण, 19 अक्टूबर 2026) ISMA का तर्क है कि जब कच्चे माल और उत्पादन लागत दोनों बढ़ गए हैं, तो इथेनॉल की खरीद कीमत स्थिर रहना मिलों के लिए असंतुलन पैदा करता है।
संगठन ने सरकार से पारदर्शी मूल्य फार्मूला अपनाने का भी सुझाव दिया है, जिसके तहत इथेनॉल की खरीद कीमत गन्ने के एफआरपी से जुड़ी रहे — यानी जब गन्ने का भाव बढ़े, तो इथेनॉल का भाव अपने आप समायोजित हो। इससे मिलों और कर्ज देने वाले बैंकों दोनों की अनिश्चितता कम होगी। (बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
सी-हेवी मोलासेस क्यों अहम है: मिलों की कमाई का दूसरा रास्ता
गन्ने से चीनी बनाने के बाद बचा शीरा (मोलासेस) तीन श्रेणियों में होता है — ए-हेवी, बी-हेवी और सी-हेवी। सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल में चीनी की रिकवरी नहीं बिगड़ती, यानी चीनी का उत्पादन सुरक्षित रहता है और साथ ही मिलें इथेनॉल से अतिरिक्त आमदनी भी करती हैं। यही वजह है कि ISMA ने कहा है कि तेल विपणन कंपनियां (OMCs) मिलों द्वारा पेश किए गए सी-हेवी मोलासेस आधारित इथेनॉल की 100 प्रतिशत मात्रा खरीदें। (इनफॉर्मिस्ट, 19 अक्टूबर 2026; द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
16 अक्टूबर को भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने तेल विपणन कंपनियों की ओर से 2026-27 आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1100 करोड़ लीटर इथेनॉल का टेंडर जारी किया था, जिसमें गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल को बाहर रखा गया है। यानी मिलों के लिए सी-हेवी शीरा अब इथेनॉल आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। (मनीकंट्रोल, 19 अक्टूबर 2026)
ISMA का कहना है कि उचित कीमत और खरीद की गारंटी मिलने से मिलें अपनी मौजूदा डिस्टिलरी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे मिलों की आमदनी बढ़ेगी और गन्ना बकाया चुकाने के लिए धन मिलेगा। यह बिंदु यूपी के किसानों के लिए सबसे सीधा है — जब मिलों की नकदी-प्रवाह सुधरती है, तो गन्ना भुगतान में देरी की शिकायत भी घटती है। (बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों की प्राथमिकता पर क्यों उठा सवाल
टेंडर में सरकार ने उन डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों (DEPs) को प्राथमिकता दी है, जिनके पास लंबी अवधि के खरीद समझौते (LTOAs) हैं। ISMA ने कहा है कि मौजूदा सत्र के लिए यह व्यवस्था स्वीकार है, लेकिन अगर आगामी वर्षों में भी यह प्राथमिकता जारी रही, तो चीनी मिलों के हित गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। (लाइवमिंट, 19 अक्टूबर 2026)
दीपक बल्लानी ने कहा, “गन्ना एक चक्रीय फसल है — हर साल चीनी का उत्पादन एक जैसा नहीं होता। जिन वर्षों में चीनी का उत्पादन अधिक होगा, उस अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल की ओर मोड़ना जरूरी होगा, ताकि घरेलू बाजार में चीनी की अधिक आपूर्ति से भाव न गिरें।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डेडिकेटेड प्लांटों की प्राथमिकता मिलों की पहुंच सीमित करेगी, तो मिलों की वित्तीय स्थिति बिगड़ेगी और किसानों को समय पर एफआरपी भुगतान की क्षमता घटेगी। (ट्रेडिंग व्यू/रायटर्स, 19 अक्टूबर 2026; बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
सार में ISMA की स्थिति संतुलित है — संगठन ने सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें 2026-27 में चीनी के इथेनॉल में उपयोग पर रोक लगाई गई, क्योंकि यह घरेलू चीनी की उपलब्धता सुरक्षित करता है। लेकिन संगठन चाहता है कि अधिशेष वर्षों के लिए मिलों के पास लचीलेपन का विकल्प बना रहे। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
यूपी की 122 मिलों से क्या कनेक्शन
उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें चलती हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। (सहारनपुर उप गन्ना आयुक्त, एग्रीइनसाइट) ये मिलें इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। अगर सी-हेवी इथेनॉल का भाव 62.23 रुपये हो जाता है और पूरी मात्रा की खरीद की गारंटी मिलती है, तो यूपी की मिलों की डिस्टिलरी आय बढ़ेगी — जिसका असर पश्चिमी यूपी के उन जिलों के किसानों पर होगा जहां बकाया भुगतान की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं।
वहीं सोमवार को शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयर भी टूटे — बजाज हिंदुस्थान 7 प्रतिशत और बलरामपुर चीनी 4 प्रतिशत तक गिरे। निवेशकों की चिंता है कि चीनी के इथेनॉल में उपयोग पर रोक से मिलों की कमाई घटेगी। (इकोनॉमिक टाइम्स, 19 अक्टूबर 2026)
सरकार का ध्यान चीनी की कीमतों पर भी है। उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार शुक्रवार को खुदरा भाव 57.82 रुपये प्रति किलो रहा, जो पिछले साल से 24 प्रतिशत अधिक है। पेराई शुरू होते ही कीमतें 52 रुपये प्रति किलो तक घट सकती हैं। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
सरकार ने ब्राजील से 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी, लेकिन आयात अभी नाममात्र रहा है — यानी चीनी की कीमतों में राहत का मुख्य रास्ता नई पेराई ही है। (फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026)
किसानों के लिए आगे क्या
गन्ना आयुक्त ने किसानों को पहले ही सलाह दी है कि वे अपने गन्ना सर्वे रिकॉर्ड की जांच कर लें और बैंक खाता सक्रिय रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो। (एग्रीइनसाइट, सितंबर 2026)
लेकिन ध्यान रहे — यह खबर अभी संभावित लाभ की है, न कि तयशुदा बढ़ोतरी की। ISMA की मांगें अभी मांग के चरण में हैं; सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं आया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: सी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल का भाव अभी कितना है? अभी इथेनॉल की खरीद कीमत 57.97 रुपये प्रति लीटर है, जो पिछले साल से नहीं बढ़ी है। ISMA ने इसे 62.23 रुपये प्रति लीटर करने की मांग की है। (बिज़नेस टुडे, 19 अक्टूबर 2026)
सवाल 2: क्या सरकार ने यह बढ़ोतरी मंजूर कर ली है? नहीं। यह अभी ISMA की मांग है, जिसकी घोषणा संगठन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने सोमवार को बयान में की। सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं आया है। (लाइवमिंट, 19 अक्टूबर 2026)
सवाल 3: इससे यूपी के गन्ना किसानों को क्या फायदा होगा? अगर मांग मानी जाती है, तो यूपी की 122 मिलों की डिस्टिलरी आय बढ़ेगी। ISMA का कहना है कि इससे मिलों को गन्ना बकाया समय पर चुकाने के लिए धन मिलेगा। (द प्रिंट, 19 अक्टूबर 2026)
सवाल 4: डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों की प्राथमिकता का किसानों से क्या लेना-देना? डेडिकेटेड प्लांटों को लगातार प्राथमिकता मिलती रही, तो अधिक उत्पादन वाले वर्षों में मिलें अपनी अतिरिक्त चीनी इथेनॉल में नहीं बदल पाएंगी। इससे मिलों की वित्तीय स्थिति बिगड़ेगी और किसानों को समय पर भुगतान प्रभावित हो सकता है। (ट्रेडिंग व्यू/रायटर्स, 19 अक्टूबर 2026)
स्रोत: द प्रिंट, बिज़नेस टुडे, लाइवमिंट, किसान तक, इकोनॉमिक टाइम्स, मनीकंट्रोल, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, ट्रेडिंग व्यू/रायटर्स, इनफॉर्मिस्ट, जागरण, एग्रीइनसाइट
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