ISMA का नया आकलन: बंपर गन्ने के बावजूद यूपी में 90 लाख टन रहेगा चीनी उत्पादन — एथेनॉल को प्राथमिकता और त्योहारी मांग में चीनी भाव मजबूत

नई दिल्ली / लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 13 सितंबर 2026): आगामी पेराई सत्र 2026-27 के शुरू होने से पहले देश के प्रमुख चीनी उद्योग संगठन भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) और स्वतंत्र कमोडिटी विश्लेषकों ने देश और उत्तर प्रदेश के चीनी उत्पादन को लेकर नया विश्लेषण जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की फसल की अच्छी स्थिति और अनुकूल मानसूनी बारिश के बावजूद उत्तर प्रदेश में चीनी का कुल शुद्ध उत्पादन 90 से 92 लाख मीट्रिक टन के आसपास रहने की संभावना है।
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी (Deepak Ballani) ने बताया कि संगठन ने अपने उपग्रह आधारित फसल मूल्यांकन मॉडल (Satellite Crop Assessment Model) को और अधिक परिष्कृत किया है। सितंबर-अक्टूबर के बारिश के आंकड़ों और फील्ड स्तर पर गन्ने की रस गुणवत्ता (Brix & Sucrose) की जांच के बाद अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में अंतिम आधिकारिक अनुमान घोषित किया जाएगा।
⛽ पैदावार बढ़ने के बाद भी चीनी उत्पादन 90 लाख टन क्यों?
उत्तर प्रदेश में गन्ने का कुल उत्पादन 2,300 लाख टन से अधिक होने के बावजूद चीनी का उत्पादन सीमित रहने के पीछे 3 बड़े संरचनात्मक कारण हैं:
1. एथेनॉल की तरफ अभूतपूर्व डायवर्जन (EBP Target 20%)
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए यूपी की चीनी मिलों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश की लगभग 70 आधुनिक मिलें गन्ने के प्रथम रस (Direct Cane Juice) और बी-हैवी शीरे (B-Heavy Molasses) को सीधे डिस्टिलरी में भेजकर एथेनॉल तैयार करेंगी। अकेले उत्तर प्रदेश से लगभग 35 से 40 लाख टन चीनी के समतुल्य (Sugar Equivalent) गन्ना रस एथेनॉल में डायवर्ट होने का अनुमान है।
2. मौसम और मानसून का प्रभाव
अगस्त और सितंबर के पहले पखवाड़े में पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक नमी और रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण गन्ने में वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) तो शानदार रही है, लेकिन धूप कम मिलने से शुरुआती चीनी परता (Early Recovery Rate) में 0.2% से 0.4% की मामूली नरमी आंकी गई है।
3. कोल्हू और खांडसारी इकाइयों में गन्ने की खपत
गुड़ और खांडसारी पर सरकार द्वारा नियमों में दी गई ढील के कारण ग्रामीण स्तर पर कोल्हू इकाइयां अक्टूबर के पहले सप्ताह से ही बड़े पैमाने पर गन्ना पेराई शुरू कर देंगी, जिससे लगभग 15% गन्ना स्थानीय स्तर पर गुड़ व शक्कर निर्माण में जाएगा।
📈 त्योहारी मांग में चीनी के भाव मजबूत — किसानों को भुगतान का सहारा
घरेलू बाजार में त्योहारी सीजन (गणेशोत्सव, नवरात्रि, करवा चौथ, दशहरा और दिवाली) के आगमन के साथ ही चीनी की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है:
- वर्तमान थोक भाव: उत्तर प्रदेश की मिलों में एक्स-मिल चीनी के भाव ₹3,850 से ₹3,920 प्रति क्विंटल (M-30 ग्रेड) पर कारोबार कर रहे हैं।
- बिक्री कोटा नियंत्रण: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा घरेलू आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए मासिक रिलीज कोटा कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
- भुगतान पर सकारात्मक असर: चीनी और एथेनॉल दोनों के अच्छे भाव मिलने से मिलों के पास नकदी (Cash Liquidity) की कमी नहीं होगी। इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा क्योंकि एस्क्रो अकाउंट में लगातार पैसा आने से किसानों का 14 दिन के अंदर भुगतान होना आसान हो जाएगा।
🌐 वैश्विक चीनी परिदृश्य और भारत की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय बाजार (ICE Sugar) में ब्राजील में सूखे की स्थिति और थाईलैंड में मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण चीनी की वैश्विक कीमतें $0.19 से $0.21 प्रति पाउंड के बीच चल रही हैं। भारत सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पहले देश की घरेलू खपत (लगभग 285 लाख टन) और एथेनॉल के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके बाद ही अतिरिक्त चीनी के निर्यात पर कोई नीतिगत फैसला लिया जाएगा।
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