₹365 FRP के ऊपर SAP लाओ — केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक को दिखाया यूपी का मॉडल, 12 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक

केंद्र के ₹365 प्रति क्विंटल FRP से नाखुश कर्नाटक के गन्ना किसानों का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक सरकार से कहा है कि वह केंद्र के FRP के ऊपर अपना राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित करे — ठीक वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु करते हैं। इसके बाद यूपी के किसानों की निगाहें 2026-27 पेराई सत्र के SAP पर टिक गई हैं, जिसकी घोषणा अभी बाकी है।
जोशी का यह बयान बुधवार (30 सितंबर 2026) को तब आया, जब कर्नाटक के गन्ना किसानों ने उनके हुबली स्थित आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। किसानों की नाराजगी इस बात पर है कि केंद्र का ₹365 FRP बढ़ती लागत के सामने नाकाफी है और कर्नाटक सरकार कोई अलग SAP घोषित नहीं करती, जबकि उत्तर भारत के राज्य अपने किसानों को FRP से ऊपर का भाव दिलाते हैं।
जोशी ने क्या कहा: “यूपी की तरह तय करो एसएपी”
प्रह्लाद जोशी ने पत्रकारों से कहा कि कर्नाटक देश का तीसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है — उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद — फिर भी वहां सरकार कोई SAP तय नहीं करती। इसके उलट उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु केंद्र के FRP से अधिक अनिवार्य SAP अधिसूचित करते हैं, जिसे चीनी मिलों को किसानों को देना ही पड़ता है।
उनके शब्दों में, “कर्नाटक को भी FRP के ऊपर SAP लागू करना चाहिए, इससे राज्य के गन्ना किसानों को फायदा होगा।” उन्होंने किसानों से विरोध की जगह बातचीत की अपील की और कहा कि आंदोलनरत किसानों को दिल्ली आमंत्रित किया गया है, जहां 12 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उनकी बैठक होगी।
जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार चीनी मिलों से बिजली तो खरीदती है, लेकिन उनका बकाया नहीं चुकाया गया है और फैक्ट्रियों पर पानी के इस्तेमाल का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है — इससे चीनी उद्योग दबाव में है, जिसका असर अंततः किसानों पर पड़ता है।
कर्नाटक में आंदोलन की पृष्ठभूमि: FRP से नाखुशी, SAP की मांग
यह विवाद अगस्त 2026 से चल रहा है। कर्नाटक प्रान्त रैता संघ (KPRS) और किसान संगठनों ने ₹900 प्रति टन (₹90 प्रति क्विंटल) के अतिरिक्त राज्य बोनस की मांग के साथ आंदोलन छेड़ रखा है। उनका तर्क है कि ₹365 FRP बढ़ती खाद, डीजल और मजदूरी लागत के सामने नाकाफी है, और कर्नाटक सरकार को यूपी-पंजाब की तर्ज पर अपना SAP घोषित करना चाहिए।
द स्टेट्समैन (IANS) की रिपोर्ट के अनुसार, जोशी ने अपने एक्स अकाउंट पर वीडियो संदेश में कहा था कि “विरोध की कोई जरूरत नहीं है, केंद्र सरकार किसानों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है।” उन्होंने याद दिलाया कि फरवरी 2026 में किसान नेताओं से मुलाकात के बाद मई 2026 में केंद्र ने FRP बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया था, फिर भी कुछ किसान अब फिर बढ़ोतरी की मांग पर हुबली में प्रदर्शन की योजना बना रहे थे।
FRP 2026-27: ₹365 का पूरा गणित
केंद्र सरकार ने मई 2026 में 2026-27 पेराई सत्र (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए गन्ने का FRP ₹365 प्रति क्विंटल मंजूर किया था — 10.25 प्रतिशत की बेसिक चीनी रिकवरी पर। इसका गणित इस प्रकार है:
- बेसिक दर: 10.25% रिकवरी पर ₹365 प्रति क्विंटल
- प्रीमियम/कटौती: रिकवरी में हर 0.1 प्रतिशत के बदलाव पर ₹3.56 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी या कटौती
- फ्लोर प्राइस: रिकवरी 9.5% से नीचे गिरने पर भी किसान को कम से कम ₹338.30 प्रति क्विंटल मिलेगा
यानी जोशी का तर्क है कि केंद्र ने अपना काम कर दिया है — अब बारी राज्य सरकारों की है। जिन राज्यों ने SAP घोषित किया है, वहां किसानों को FRP से ऊपर का दाम मिल रहा है। केंद्र के इस ₹365 FRP पर किसान संगठनों ने पहले भी आपत्ति जताई थी।
यूपी मॉडल: क्यों दी गई यूपी की मिसाल
जोशी ने जिन पांच राज्यों का नाम लिया, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां हर सत्र में FRP से ऊपर SAP घोषित किया जाता है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए यूपी सरकार ने SAP में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी — अगेती का भाव ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ था। सरकार के अनुसार इससे प्रदेश के करीब 46 लाख गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिला था।
यूपी में SAP इसलिए अहम है क्योंकि यह किसानों के लिए गारंटीड भाव बन जाता है — मिलें SAP से कम पर गन्ना नहीं खरीद सकतीं। यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक के सामने यूपी का मॉडल रखा।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
यूपी के गन्ना किसानों के लिए इस बयान का सबसे बड़ा संदेश यही है कि केंद्र सरकार FRP के ऊपर SAP की व्यवस्था को किसान-हितैषी मानती है। अब सभी की नजरें यूपी सरकार पर हैं, क्योंकि पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी SAP की घोषणा अभी बाकी है।
पिछले सत्र (2025-26) में अगेती का SAP ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था। इस बार केंद्र का FRP ₹365 है, जो पिछले सत्र के FRP (₹355) से ₹10 अधिक है। किसान संगठन पहले से ही भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, और बढ़ती लागत को देखते हुए इस सत्र में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे SAP घोषणा का इंतजार करते हुए अपनी तैयारी पूरी रखें — प्री-कैलेंडर में अपना सट्टा और सर्वे डेटा जरूर जांच लें, ताकि पेराई शुरू होते ही पर्ची और आपूर्ति में कोई दिक्कत न आए। पर्ची, भुगतान और कैलेंडर की हर जानकारी enquiry.caneup.in पोर्टल और ई-गन्ना ऐप पर मिलती है; किसी भी समस्या पर टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक सरकार से क्या मांग की है?
जोशी ने कहा है कि कर्नाटक सरकार केंद्र के ₹365 FRP के ऊपर अपना SAP घोषित करे, जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु करते हैं।
Q2. 12 अक्टूबर को दिल्ली में क्या होगा?
केंद्रीय मंत्री ने आंदोलनरत कर्नाटक के किसान नेताओं को 12 अक्टूबर को दिल्ली बुलाया है, जहां कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ गन्ना भाव की मांगों पर चर्चा होगी।
Q3. 2026-27 सत्र के लिए यूपी का SAP घोषित हुआ है क्या?
नहीं, 2026-27 के लिए यूपी SAP की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र (2025-26) में अगेती का SAP ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था; इस सत्र का केंद्र FRP ₹365 प्रति क्विंटल है।
Q4. FRP और SAP में क्या अंतर है?
FRP केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम भाव है (2026-27 में ₹365/क्विंटल)। SAP राज्य सरकार का घोषित भाव है, जो आमतौर पर FRP से ऊपर होता है — यूपी में 2025-26 में अगेती का SAP ₹400 था।
Q5. कर्नाटक में किसान आंदोलन क्यों कर रहे हैं?
किसानों का कहना है कि ₹365 FRP बढ़ती लागत के सामने नाकाफी है और राज्य सरकार कोई SAP घोषित नहीं करती, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में किसानों को SAP के रूप में FRP से ऊपर का भाव मिलता है।
स्रोत: डेक्कन हेराल्ड (30 सितंबर 2026), द स्टेट्समैन (IANS), चिनीमंडी, एग्रीइनसाइट — SAP और FRP संबंधी रिपोर्टों पर आधारित; ट्रैक्टरजंक्शन और ABP लाइव — यूपी SAP 2025-26 के आंकड़ों पर आधारित।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?



