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चीनी का भाव ₹31 से ऊपर उठाने समेत 5 बड़ी मांगें — कर्नाटक सीएम ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, यूपी किसानों पर क्या पड़ेगा असर

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 21, 2026 • 6 min read
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चीनी का भाव ₹31 से ऊपर उठाने समेत 5 बड़ी मांगें — कर्नाटक सीएम ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, यूपी किसानों पर क्या पड़ेगा असर
अंतिम अपडेट: October 21, 2026 9:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना किसानों का मुद्दा अब प्रधानमंत्री के दरवाजे तक पहुंच गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर गन्ना किसानों की पांच बड़ी मांगों पर केंद्र के तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। यह चिट्ठी ऐसे वक्त आई है जब उत्तर कर्नाटक में किसानों का आंदोलन तेज है, पेराई सत्र शुरू नहीं हो पाया है और खेतों में पका गन्ना खड़ा है। लेकिन यह खबर सिर्फ कर्नाटक की नहीं है — चिट्ठी में उठाए गए मुद्दे एफआरपी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और गन्ना-एथनॉल नीति से जुड़े हैं, और इन पर होने वाला हर फैसला उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों पर सीधा असर डालेगा।

चिट्ठी में ५ मांगे — एक नजर में

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इन पांच मांगों पर जल्द फैसला लेने का आग्रह किया है:

१. चीनी का एमएसपी बढ़ाया जाए — २०१९ से ₹३१ प्रति किलो पर अटका चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य गन्ने की बढ़ी लागत के हिसाब से संशोधित किया जाए।

२. घरेलू और कमर्शियल चीनी के लिए अलग-अलग एमएसपी — घर के इस्तेमाल और बड़ी कंपनियों को बिकने वाली चीनी के लिए अलग न्यूनतम भाव, ताकि उपभोक्ता सुरक्षित रहें और मिलों को थोक खरीद से ज्यादा कमाई हो।

३. एथनॉल टेंडर से गन्ना बाहर करने के फैसले की समीक्षा — १६ अक्टूबर के टेंडर में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथनॉल को बाहर रखने पर पुनर्विचार।

४. गन्ना-आधारित एथनॉल की कीमत बढ़ाई जाए — २०२२-२३ से न बढ़ी एथनॉल की कीमत गन्ने की लागत के हिसाब से संशोधित की जाए।

५. एफआरपी बेस रिकवरी ९.५% बहाल — रिकवरी का आधार दर दोबारा ९.५% किया जाए ताकि कम रिकवरी वाले इलाकों के किसानों को भी न्याय मिले।

₹३१ वाला चीनी भाव — क्यों बदलेगा पूरा खेल

चिट्ठी का सबसे तीखा बिंदु चीनी के एमएसपी का है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि चीनी का एमएसपी १२ फरवरी २०१९ से ₹३१ प्रति किलो पर जमा है, जबकि इसी अवधि में गन्ने का एफआरपी ₹२,७५० प्रति टन से बढ़कर ₹३,६५० प्रति टन (₹३६५ प्रति क्विंटल) हो चुका है। २०१९ वाले चीनी भाव पर मिलें किसानों को न्यायसंगत गन्ना भाव कैसे दें, यह चिट्ठी का केंद्रीय प्रश्न है।

अखिल भारतीय किसान सभा ने भी इसी दलील के साथ चीनी का एमएसपी कम से कम ₹५० प्रति किलो करने की मांग की है। तर्क सीधा है: मिलों को जब चीनी से कमाई होगी, तभी गन्ने का बकाया समय पर चुक पाएंगी। यह तर्क यूपी के किसानों के लिए खास अहमियत रखता है, क्योंकि राज्य में भुगतान की लड़ाई हर सत्र दोहराई जाती है — बागपत की किनौनी और भैंसाना मिलों पर ₹२९ करोड़ के बकाये पर नोटिस और शामली की थानाभवन मिल पर ₹७१ करोड़ से ज्यादा के अवशेष भुगतान की स्थिति इसी दबाव की कहानी कहती है।

एथनॉल टेंडर से गन्ना बाहर — मिलों की जेब पर असर

१६ अक्टूबर को बीपीसीएल ने तेल कंपनियों की ओर से एथनॉल आपूर्ति वर्ष २०२६-२७ (नवंबर २०२६ से अक्टूबर २०२७) के लिए करीब ११ अरब लीटर एथनॉल का टेंडर जारी किया। इसमें गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की कोई बोली नहीं मांगी गई — यानी २०२६-२७ में चीनी से एथनॉल पर पूरी रोक। साथ ही मक्का-आधारित एथनॉल का प्रोत्साहन ₹५.७९ से घटाकर ₹२.७९ प्रति लीटर कर दिया गया।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से चीनी उत्पादन घटने की आशंका पर सरकार ने घरेलू आपूर्ति बचाने के लिए यह कदम उठाया है। लेकिन एथनॉल मिलों के लिए आय का वैकल्पिक जरिया था — इस लचीलेपन के खत्म होने से मिलों का मुनाफा अब पूरी तरह घरेलू चीनी कीमतों पर निर्भर हो जाएगा।

बेस रिकवरी ९.५% — आम किसान के लिए मतलब

एफआरपी की गणना १०.२५% चीनी रिकवरी को आधार मानकर होती है — इससे कम रिकवरी पर किसान के एफआरपी में कटौती होती है। पहले यह आधार ९.५% था, जिसे धीरे-धीरे बढ़ा दिया गया। मुख्यमंत्री का तर्क है कि रिकवरी मिट्टी, मौसम और पेराई के समय पर निर्भर करती है, जो किसान के नियंत्रण में नहीं है। बेस रिकवरी ९.५% बहाल होने से कम रिकवरी वाले इलाकों के किसानों को पूरा एफआरपी मिलेगा — यह यूपी के तराई क्षेत्रों के किसानों के लिए भी प्रासंगिक है।

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां १२२ चीनी मिलें हैं। चिट्ठी के मुद्दों का यूपी से सीधा रिश्ता इस प्रकार है:

  • एफआरपी २०२६-२७: ₹३६५ प्रति क्विंटल तय है। लेकिन यूपी का एसएपी २०२६-२७ की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र (२०२५-२६) में एसएपी अगेती प्रजाति के लिए ₹४०० प्रति क्विंटल था — नया भाव घोषित होने तक पुरानी दर को मौजूदा न मानें।
  • एथनॉल रोक का असर यूपी की मिलों पर भी — मिलों ने एथनॉल क्षमता में बड़ा निवेश किया है। गन्ना-रस और बी-हैवी शीरे के एथनॉल पर रोक से उनकी आय का एक हिस्सा प्रभावित होगा, जिसका असर भुगतान की गति पर पड़ सकता है। बिजनौर की मिलों ने किसानों को समय पर भुगतान के लिए बैंकों से करीब ₹१,६०५ करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट मांगी है — यह दिखाता है कि मिलें नकदी के लिए पहले से कितनी जूझ रही हैं।
  • एमएसपी बढ़ा तो भुगतान में राहत — अगर चीनी का एमएसपी ₹३१ से ऊपर संशोधित होता है तो मिलों की कमाई बढ़ेगी और यूपी में हर साल दोहराई जाने वाली बकाया भुगतान की समस्या में कमी आ सकती है।

आगे क्या होगा

केंद्र ने १४ अक्टूबर को नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र पर एक समिति बनाई है — कर्नाटक ने कहा है कि वह समिति को पूरा डेटा देगा। लेकिन मुख्यमंत्री का कहना है कि पेराई सत्र की देरी को देखते हुए एमएसपी संशोधन, एथनॉल टेंडर की समीक्षा और बेस रिकवरी जैसे कुछ फैसले समिति की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना तुरंत भी लिए जा सकते हैं। यूपी के किसानों के लिए सबसे अहम घड़ी एसएपी २०२६-२७ की घोषणा होगी — मिलें अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से चालू होने लगी हैं, लेकिन भाव की घोषणा अब तक नहीं हुई है।

जवाब जानिए

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पीएम को चिट्ठी में क्या मांगें रखी हैं? पांच मांगें: चीनी का एमएसपी (₹३१/किलो, २०१९ से अपरिवर्तित) बढ़ाना, घरेलू और कमर्शियल चीनी के लिए अलग एमएसपी, गन्ना-एथनॉल को टेंडर से बाहर करने के फैसले की समीक्षा, गन्ना-एथनॉल की कीमत बढ़ाना और एफआरपी बेस रिकवरी ९.५% बहाल करना।

एथनॉल टेंडर में गन्ने पर रोक क्या है? १६ अक्टूबर २०२६ के टेंडर में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की बोली नहीं मांगी गई। सिर्फ मक्का, टूटा चावल, एफसीआई का अधिशेष चावल और सी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की अनुमति है।

बेस रिकवरी ९.५% का क्या मतलब है? एफआरपी गणना का आधार दर। अभी १०.२५% है — इससे कम रिकवरी पर एफआरपी कटता है। ९.५% बहाल होने से कम रिकवरी वाले इलाकों के किसानों को पूरा एफआरपी मिलेगा।

यूपी के किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा? एफआरपी ₹३६५/क्विंटल तय, लेकिन एसएपी २०२६-२७ की घोषणा बाकी है। एमएसपी बढ़ने से मिलों की कमाई बढ़ेगी और भुगतान में राहत मिल सकती है; एथनॉल रोक से मिलों की आय पर दबाव बढ़ेगा।

स्रोत: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द इकनॉमिक टाइम्स, द हिंदू, पब्लिक टीवी इंग्लिश

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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