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13 अक्टूबर से कर्नाटक में हाईवे जाम की चेतावनी: गन्ने का भाव ₹550/क्विंटल और यूपी जैसा SAP मांगा — 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री से बैठक

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 6 min read
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13 अक्टूबर से कर्नाटक में हाईवे जाम की चेतावनी: गन्ने का भाव ₹550/क्विंटल और यूपी जैसा SAP मांगा — 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री से बैठक
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 6:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने सरकार को 13 अक्टूबर की डेडलाइन दे दी है — अगर 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ होने वाली बैठक में मांगें नहीं मानी गईं, तो 13 अक्टूबर से पूरे राज्य के जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रीय राजमार्ग अनिश्चितकाल के लिए जाम होंगे। कर्नाटक राज्य रैयत संघ और ग्रीन ब्रिगेड के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेशगौड़ा सुबेदार ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को कालाबुरागी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया। सबसे बड़ी मांग गन्ने का ₹5,500 प्रति टन (₹550/क्विंटल) न्यूनतम समर्थन मूल्य है — और इसके समर्थन में संगठन ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया है, जहां SAP व्यवस्था के तहत किसानों को बेहतर भाव मिलता है।

क्या है मामला: 13 अक्टूबर की डेडलाइन

द हिंदू की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ उच्च स्तरीय बैठक होगी। सुबेदार ने साफ कहा कि बैठक से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आंदोलन तेज होगा — और 13 अक्टूबर से सभी जिला मुख्यालयों पर नेशनल हाईवे का अनिश्चितकालीन जाम शुरू होगा। किसान इंडिया की 10 अक्टूबर की लाइव अपडेट के अनुसार, कर्नाटक के किसान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाएगा। अगले 48 घंटे गन्ने की राष्ट्रीय राजनीति के लिए अहम हैं — इसी बैठक में एफआरपी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल की कीमत पर केंद्र का रुख साफ होगा।

किसानों की 7 बड़ी मांगें

महेशगौड़ा सुबेदार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो मांगें रखीं, वे सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, देशभर के गन्ना किसानों की पीड़ा दर्शाती हैं:

  1. ₹5,500 प्रति टन न्यूनतम समर्थन मूल्य: 9.25% रिकवरी दर पर गन्ने का एमएसपी ₹5,500 प्रति टन (₹550/क्विंटल) तय करने की मांग। मौजूदा एफआरपी 2026-27 सत्र के लिए ₹365 प्रति क्विंटल (10.25% रिकवरी पर) है — यानी किसान मौजूदा भाव से करीब 50% ज्यादा मांग रहे हैं।

  2. 14 दिन में भुगतान, देरी पर 15% ब्याज: कटाई के 14 दिन के भीतर भुगतान और देरी पर 15% ब्याज। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में 14 दिन की समय-सीमा और 15% ब्याज को किसानों के लिए “अनिवार्य सुरक्षा उपाय” बताते हुए बरकरार रखा है।

  3. कटाई-ढुलाई का खर्च मिलें उठाएं: सुबेदार ने आरोप लगाया कि कटाई मजदूर किसानों से ₹8,000 से ₹10,000 तक अतिरिक्त वसूलते हैं — यह प्रथा बंद हो, और मजदूरी का बोझ मिलें उठाएं।

  4. डिजिटल कांटे अनिवार्य: तौल में गड़बड़ी रोकने के लिए सभी एपीएमसी मंडियों में डिजिटल तौल मशीनें लगाई जाएं।

  5. उप-उत्पादों की कमाई भी भाव में जुड़े: मिलें और सरकार एथेनॉल, शीरा, खोई और बिजली से अच्छी कमाई करती हैं — इसलिए एफआरपी का निर्धारण सिर्फ चीनी की कीमत पर नहीं, सभी उप-उत्पादों की आय को ध्यान में रखकर हो।

  6. कर्नाटक में भी SAP लागू हो: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर कर्नाटक में भी राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) व्यवस्था की मांग — यानी कर्नाटक के किसान यूपी के गन्ना भाव मॉडल को आदर्श बता रहे हैं।

  7. लागत का सही आकलन हो: सीएसीपी (कृषि लागत एवं मूल्य आयोग) जमीन का किराया और सिंचाई ऋण पर ब्याज समेत खेती की वास्तविक लागत का आकलन करके ही लाभकारी मूल्य की सिफारिश करे।

यूपी के किसानों के लिए क्यों अहम है यह खबर

पहली नजर में यह कर्नाटक की खबर लग सकती है, लेकिन तार सीधे यूपी के किसानों से जुड़े हैं। पहली बात — कर्नाटक के किसान संगठन ने खुद यूपी का उदाहरण दिया है। यूपी में 2025-26 सत्र के लिए अगेती गन्ने का SAP ₹400/क्विंटल और सामान्य का ₹390/क्विंटल था — केंद्र के एफआरपी (₹365/क्विंटल) से ऊपर। यही व्यवस्था कर्नाटक के किसान चाहते हैं।

दूसरी बात — 12 अक्टूबर की बैठक का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर असर डालेगा। एफआरपी बढ़ोतरी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (2019 से ₹31/किलो पर अटका) में संशोधन या एथेनॉल कीमत पर कोई भी फैसला यूपी की 122 चीनी मिलों और करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को सीधे प्रभावित करेगा।

तीसरी और सबसे अहम बात — यूपी में 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है; 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में भी ऐलान नहीं हुआ। कर्नाटक के आंदोलन का दबाव और 12 अक्टूबर की बैठक का नतीजा यूपी के SAP फैसले के समय और दिशा — दोनों को प्रभावित कर सकता है।

महाराष्ट्र से भी आ रही विरोध की आवाज

कर्नाटक अकेला नहीं है। इकोनॉमिक टाइम्स के हवाले से एग्रीइनसाइट ने बताया है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठन केंद्र की जल्दी पेराई शुरू कराने की कोशिश का विरोध कर रहे हैं — कच्चे गन्ने की पेराई से प्रति एकड़ करीब 6 टन उत्पादन घट सकता है, यानी लगभग ₹20,000 प्रति एकड़ का नुकसान, और नवंबर के बाद बढ़ने वाली शर्करा मात्रा के कारण चीनी की रिकवरी भी कम होगी।

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक, हुबली प्रदर्शन के बाद प्रह्लाद जोशी ने 10 अक्टूबर से पहले किसान प्रतिनिधिमंडल से मिलने का आश्वासन दिया था और 15 अक्टूबर से फैक्ट्रियां दोबारा खोलने के आदेश को अस्थायी रूप से वापस लेने की बात कही थी। उस मांग सूची में एफआरपी ₹3,650 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति टन करना, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 से बढ़ाकर ₹60 करना और 2025-26 के लिए ₹300 प्रति टन अतिरिक्त भुगतान शामिल था। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक फैसले पर सहमति नहीं बनती, फैक्ट्रियां दोबारा नहीं खुलनी चाहिए।

पृष्ठभूमि: क्यों भड़का है गुस्सा

पिछले छह महीनों में भारत चीनी का निर्यातक देश से आयातक देश बन गया है। उत्पादन अनुमान से कम रहने के बाद चीनी की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं — खुदरा भाव ₹55-56 प्रति किलो चल रहा है। दूसरी ओर, सूखे से महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना उत्पादन प्रभावित हुआ है। किसानों का आरोप है कि त्योहारी सीजन में उपलब्धता के नाम पर कच्चे गन्ने की पेराई कराई जा रही है, जिसका नुकसान किसान उठाएगा। किसान नेता राजू शेट्टी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जब तक चीनी का एमएसपी ₹50, एथेनॉल का भाव ₹70 और गन्ने का एमएसपी ₹5,000 प्रति टन नहीं होता, मिलें बंद रखी जाएं।

ऐसे में 12 अक्टूबर की बैठक देश के करोड़ों गन्ना किसानों की निगाहों का केंद्र बन गई है। यूपी के किसानों के लिए भी यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि एफआरपी और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य पर केंद्र का कोई भी फैसला उनके भुगतान और आगामी SAP — दोनों की जमीन तय करेगा।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 13 अक्टूबर से कर्नाटक के किसान क्या करने वाले हैं? उत्तर: अगर 12 अक्टूबर को प्रह्लाद जोशी के साथ दिल्ली बैठक में मांगें नहीं मानी गईं, तो 13 अक्टूबर से राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर नेशनल हाईवे का अनिश्चितकालीन जाम शुरू होगा।

प्रश्न 2: सबसे बड़ी मांग क्या है? उत्तर: 9.25% रिकवरी पर ₹5,500 प्रति टन (₹550/क्विंटल) न्यूनतम समर्थन मूल्य। साथ में कटाई के 14 दिन में भुगतान, देरी पर 15% ब्याज और कटाई-ढुलाई का खर्च मिलों द्वारा वहन करने की मांग।

प्रश्न 3: कर्नाटक के किसान यूपी का उदाहरण क्यों दे रहे हैं? उत्तर: संगठन ने यूपी-उत्तराखंड की तर्ज पर कर्नाटक में भी SAP व्यवस्था की मांग की है। यूपी में 2025-26 का अगेती SAP ₹400/क्विंटल था, जो केंद्र के एफआरपी (₹365/क्विंटल) से ऊपर है।

प्रश्न 4: इस बैठक का यूपी के किसानों पर क्या असर पड़ेगा? उत्तर: एफआरपी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल कीमत पर कोई भी फैसला यूपी की 122 मिलों और करीब 48 लाख किसान परिवारों को प्रभावित करेगा। यूपी का 2026-27 SAP अभी घोषित नहीं हुआ है — इस आंदोलन का दबाव उस फैसले को भी प्रभावित कर सकता है।

स्रोत: द हिंदू (9 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (10 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट/द इकोनॉमिक टाइम्स, डेक्कन हेराल्ड

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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