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कर्नाटक में गन्ना किसान आंदोलन तेज़: आज केंद्रीय मंत्री के घर घेराव, ₹5,500/टन भाव की मांग

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 29, 2026 • 6 min read
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कर्नाटक में गन्ना किसान आंदोलन तेज़: आज केंद्रीय मंत्री के घर घेराव, ₹5,500/टन भाव की मांग
अंतिम अपडेट: September 29, 2026 9:40 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

🚨 BREAKING: कर्नाटक के गन्ना किसानों ने आज यानी 29 सितंबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुब्बल्ली स्थित आवास के घेराव का ऐलान किया है। किसानों की मांग साफ है — गन्ने का उचित और वैज्ञानिक तरीके से तय भाव ₹5,500 प्रति टन किया जाए और चीनी मिलों द्वारा किसानों के कथित शोषण पर रोक लगे। यह खबर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी अहम है, क्योंकि देशभर में गन्ना भाव को लेकर बनता दबाव केंद्र सरकार के फैसलों को प्रभावित करता है।

आज का घेराव: क्या है योजना

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के विभिन्न जिलों से गन्ना किसान आज हुब्बल्ली पहुंचेंगे और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करेंगे। किसान संगठन कर्नाटक राज्य रैत संघ के जिला अध्यक्ष संगमेश सागर ने आरोप लगाया कि चीनी मिलें दशकों से गन्ना किसानों का शोषण कर रही हैं और किसानों को लगभग 30 वर्षों से उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।

संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष शंतगौड़ा पाटिल नडहल्ली ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने की मांग रखी है। साथ ही चीनी मिलों में डिजिटल तौल मशीनें लगाने, पैदावार तय करते समय किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी, और भुगतान सीधे बैंक खातों में करने की भी मांग है।

10 अक्टूबर की डेडलाइन: आंदोलन की चेतावनी

इस घेराव से पहले ही किसान संगठनों ने केंद्र को समय सीमा दे रखी है। द हिंदू की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 10 अक्टूबर 2026 तक FRP नहीं बढ़ाया गया, तो राज्यभर में आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। संगठन के अध्यक्ष कुरुबूर शांतकुमार ने बताया कि 3 सितंबर को संगठन का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जोशी से मिलकर ज्ञापन सौंप चुका है। कोई ठोस फैसला न आने पर किसान अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।

किसानों की मांगे: FRP कितना चाहते हैं?

किसान संगठनों की मांगें बेहद विस्तृत हैं। गन्ना नियंत्रण बोर्ड की बैठक में किसानों के प्रतिनिधियों ने तमिलनाडु की तर्ज पर ₹800 प्रति टन अतिरिक्त SAP (राज्य परामर्शित मूल्य) तय करने की मांग की है। एसोसिएशन चाहती है कि केंद्र सरकार FRP को चीनी रिकवरी के हिसाब से इन स्तरों पर तय करे — 10.25% रिकवरी पर ₹4,500/टन, 11.25% पर ₹4,850/टन, 12.25% पर ₹5,200/टन और 13.25% पर ₹5,550/टन। गौरतलब है कि पिछले साल (2025-26) केंद्र ने 10.25% रिकवरी के लिए FRP ₹3,550 प्रति टन तय किया था।

इसके अलावा किसान चाहते हैं: चीनी का MSP ₹31/किग्रा से बढ़ाकर ₹60/किग्रा किया जाए — यह भाव 9 साल से नहीं बदला, जबकि खेती की लागत तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। गन्ना कटाई-ढुलाई का खर्च सरकार ने ₹800/टन तय किया है; उससे ज्यादा कटौती करने वाली मिलों के खिलाफ किसान उपायुक्त से शिकायत करें। मिलों को इस साल की कीमत से ₹200/टन अतिरिक्त भी चुकाना होगा।

महाराष्ट्र में भी गर्जना

किसान तक की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के बीड़ जिले के किसानों ने ₹4,250 प्रति टन की पहली किस्त और ₹5,000 प्रति टन अंतिम भाव की मांग करते हुए कई चीनी मिलों के सामने प्रदर्शन किया। कम बारिश से गन्ने की बढ़वार और वजन घटा है, जबकि सिंचाई का खर्च बढ़ा है।

पेराई सत्र की तारीख पर भी विवाद है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, सरकार ने 15 अक्टूबर से पेराई का आदेश दिया है, जबकि मिल महासंघ ने लिखित में 1 नवंबर की मांग की थी। किसान नेता राजू शेट्टी का कहना है कि जल्दी पेराई से रिकवरी 1% घटेगी — प्रति टन 10 किग्रा चीनी कम, यानी ₹370-400/टन का नुकसान, जिसका खामियाजा आखिरकार किसानों को ही भुगतना पड़ेगा।

यूपी किसानों पर क्या पड़ेगा असर?

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान यह खबर ध्यान से देखें, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर गन्ना भाव को लेकर बनता दबाव अंततः केंद्र सरकार के FRP और राज्यों के SAP दोनों को प्रभावित करता है। कुछ अहम तथ्य:

  • कर्नाटक की मांग: ₹5,500/टन — यूपी के मौजूदा SAP से ₹1,500/टन ज्यादा
  • बीड़ (महाराष्ट्र) की मांग: ₹5,000/टन अंतिम भाव
  • यूपी के किसानों की अपनी मांग: हापुड़ सहित कई जिलों में किसान ₹600/क्विंटल भाव मांग रहे हैं

अगर कर्नाटक का आंदोलन सफल होता है और केंद्र चीनी का MSP बढ़ाता है, तो मिलों की आय बढ़ेगी — और आय बढ़ने पर किसानों को ज्यादा भाव देने की गुंजाइश भी बढ़ेगी। यही वह कड़ी है जो यूपी के किसानों को भी सीधे जोड़ती है।

यूपी में भुगतान: 94.86% बकाया चुका

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार 2025-26 सत्र में 94.86% से ज्यादा गन्ना मूल्य चुकाया जा चुका है: 102 मिलों ने 100% भुगतान पूरा किया, 23 सहकारी मिलों ने ₹2,820 करोड़ और निगम की 3 मिलों ने ₹543.51 करोड़ चुकाए। अब तक किसानों के खातों में ₹3.25 लाख करोड़ सीधे हस्तांतरित हुए हैं और औसत आय प्रति हेक्टेयर ₹40,720 बढ़ी है। 2025-26 में यूपी का SAP अगेती प्रजातियों के लिए ₹400/क्विंटल और सामान्य के लिए ₹390/क्विंटल तय था।

किसान क्या करें: अभी से रखें नजर

  1. 30 सितंबर की डेडलाइन न भूलें — यूपी में गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है
  2. राष्ट्रीय आंदोलन पर नजर रखें — FRP या चीनी MSP में बढ़ोतरी का फैसला यूपी के भाव पर भी असर डालेगा
  3. कटाई-ढुलाई कटौती पर शिकायत करें — अगर मिल तय सीमा से ज्यादा कटौती करे तो उपायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं
  4. सट्टा रिकॉर्ड जांच लें — पेराई सत्र 2026-27 से पहले सट्टा प्रदर्शन मेलों में अपने रिकॉर्ड का मिलान जरूर कराएं

स्रोत: न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, डेक्कन हेराल्ड, हिंदुस्तान टाइम्स, किसान तक, चिनीमंडी, टाइम्स ऑफ इंडिया, फ्री प्रेस जर्नल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: कर्नाटक के किसान आज कहां आंदोलन कर रहे हैं? उत्तर: कर्नाटक के गन्ना किसान आज (29 सितंबर 2026) केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुब्बल्ली स्थित आवास का घेराव कर रहे हैं। वे गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: कर्नाटक के किसान FRP में कितनी बढ़ोतरी चाहते हैं? उत्तर: रिकवरी के हिसाब से FRP ₹4,500 से ₹5,550/टन के बीच तय करने की मांग है। पिछले साल FRP ₹3,550/टन था। साथ ही तमिलनाडु की तर्ज पर ₹800/टन अतिरिक्त SAP की मांग है।

प्रश्न 3: क्या कर्नाटक के आंदोलन का असर यूपी के गन्ना भाव पर पड़ेगा? उत्तर: अप्रत्यक्ष असर संभव है। चीनी MSP या FRP में बढ़ोतरी पूरे देश के भाव को प्रभावित करेगी। यूपी में किसान पहले से ₹600/क्विंटल भाव मांग रहे हैं — राष्ट्रीय दबाव इसे बल दे सकता है।

प्रश्न 4: यूपी में मौजूदा गन्ना भाव क्या है? उत्तर: 2025-26 सत्र के लिए SAP अगेती प्रजातियों के लिए ₹400/क्विंटल और सामान्य के लिए ₹390/क्विंटल है। यह योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बढ़ोतरी थी।

प्रश्न 5: महाराष्ट्र में गन्ना किसानों की क्या मांग है? उत्तर: बीड़ के किसानों ने ₹4,250/टन की पहली किस्त और ₹5,000/टन अंतिम भाव मांगा है। 15 अक्टूबर से जल्दी पेराई के सरकारी आदेश पर भी किसान और मिलें दोनों नाराज हैं।

प्रश्न 6: यूपी में गन्ना भुगतान की ताजा स्थिति क्या है? उत्तर: 2025-26 सत्र के 94.86% बकाये का भुगतान हो चुका है; 102 मिलों ने 100% भुगतान पूरा किया। कुछ मिलों का भुगतान लंबित है, जिसे जल्द पूरा करने के निर्देश हैं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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