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आंदोलन रुका, 26 नवंबर तक केंद्र को अल्टीमेटम: जोशी से आधी रात तक चली बैठक के बाद कर्नाटक के गन्ना किसानों ने थामा प्रदर्शन

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 20, 2026 • 6 min read
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आंदोलन रुका, 26 नवंबर तक केंद्र को अल्टीमेटम: जोशी से आधी रात तक चली बैठक के बाद कर्नाटक के गन्ना किसानों ने थामा प्रदर्शन
अंतिम अपडेट: October 20, 2026 7:35 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

सप्ताह भर से सड़कों पर चल रहा कर्नाटक के गन्ना किसानों का “हुब्बल्लि चलो” आंदोलन सोमवार शाम को थम गया। किसान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ आधी रात के बाद करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद प्रदर्शन अस्थायी रूप से स्थगित करने का ऐलान किया। लेकिन राहत शर्तों के साथ आई है — किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार को 26 नवंबर तक मांगें मानने की मोहलत दी है, और चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो 27 नवंबर से आंदोलन पहले से भी बड़ा होगा। (द हिंदू, 19 अक्टूबर 2026)

आधी रात 12:30 से सुबह 3:30 तक: जोशी के साथ क्या बात हुई

किसान नेताओं का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रविवार देर रात हुब्बल्लि के सर्किट हाउस पहुंचा, जहां उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ बैठक रात 12:30 बजे शुरू होकर सुबह करीब 3:30 बजे तक चली। प्रतिनिधिमंडल में कर्नाटक राज्य रैता संघ और हसीरू सेने के अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी तथा मानद अध्यक्ष शशिकांत गुरुजी थे। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और बेलगावी-धारवाड़ के जिलाधिकारी भी मौजूद रहे। (द साउथ फर्स्ट, 19 अक्टूबर 2026; न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)

सोमवार को किसान नेताओं ने विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों से सलाह की। हावेरी से मार्च करता जत्था दोपहर करीब 2 बजे हुब्बल्लि के बाहरी इलाके यरिकोप्पा पहुंचा था, जबकि बेलगावी का जत्था तेगुर होकर आया। शाम को यरिकोप्पा में अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा हुई। (द हिंदू, 19 अक्टूबर 2026)

शशिकांत गुरुजी ने कहा कि मंत्री ने मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए समय चाहिए। उनके मुताबिक, मांगों पर विचार के लिए बनाई जाने वाली समिति पहले कर्नाटक आएगी और रिपोर्ट सौंपने के बाद मांगें मानी जाएंगी। (न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)

किसानों की तीन बड़ी मांगें

आंदोलन के केंद्र में तीन बड़े मुद्दे हैं — गन्ने की कीमत, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल नीति:

  • गन्ना भाव: मौजूदा ₹3,650 प्रति टन से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति टन करने की मांग। प्रति क्विंटल के हिसाब से यह मौजूदा ₹365 से बढ़ाकर ₹550 की मांग के बराबर है।
  • चीनी का एमएसपी: चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की मांग। किसानों का कहना है कि चीनी का एमएसपी 2019 से नहीं बढ़ा है, जबकि लागत लगातार बढ़ी है।
  • एथेनॉल नीति में बदलाव: गन्ने से बने एथेनॉल की खरीद नीति की समीक्षा की मांग।

इसके अलावा गन्ने की तौल और शर्करा रिकवरी दर में पारदर्शिता, समय पर भुगतान और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग भी रखी गई है। (द साउथ फर्स्ट, 19 अक्टूबर 2026; डेक्कन हेराल्ड, 19 अक्टूबर 2026)

26 नवंबर की डेडलाइन और 27 नवंबर की चेतावनी

स्थगन के साथ किसान नेताओं ने दो तारीखें साफ कर दीं। केंद्र और राज्य सरकार को 26 नवंबर 2026 तक मांगें पूरी करनी होंगी। ऐसा न हुआ तो 27 नवंबर से आंदोलन फिर शुरू होगा — इस बार हुब्बल्लि में मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास के घेराव के साथ। नेताओं ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो एक करोड़ किसान घेराव में जुटेंगे। (द हिंदू, 19 अक्टूबर 2026; चीनीमंडी, 19 अक्टूबर 2026)

चुनप्पा पुजेरी ने कहा कि मंत्री ने आश्वासन तो दिया है, लेकिन गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विचार के लिए और समय मांगा गया है। उन्होंने मांग की है कि अगले चार-पांच दिनों में बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में चीनी मिल मालिकों और किसान नेताओं की बैठक बुलाई जाए, ताकि मिल गेट पर एकसमान भाव तय हो सके। (चीनीमंडी, 19 अक्टूबर 2026)

23 अक्टूबर से मिलें चलाने की बात

बैठक में 23 अक्टूबर से चीनी मिलें चलाने पर सहमति बनी है। किसान नेताओं की मांग है कि मिलें शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मिल प्रबंधकों के साथ बैठक कर सभी किसानों के लिए एकसमान गन्ना भाव तय कराएं। यरिकोप्पा में किसानों को संबोधित करते हुए मंत्री जोशी ने भी कहा कि गन्ना किसानों को एकसमान भाव दिलाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। (न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी 19 अक्टूबर को केंद्र से जल्द फैसले की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि उत्तर कर्नाटक में पेराई सत्र में देरी से किसानों को नुकसान होगा, और एफआरपी की गणना के लिए आधार रिकवरी दर को 10.25 प्रतिशत से घटाकर 9.50 प्रतिशत करने पर विचार होना चाहिए। (गांव जंक्शन, 19 अक्टूबर 2026)

यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है यह खबर

कर्नाटक का आंदोलन सिर्फ एक राज्य की कहानी नहीं है। यूपी में भी किसान संगठन पेराई सत्र 2026-27 के लिए ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना भाव की मांग कर रहे हैं — 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई मूल्य उप-समिति की बैठक में यह मांग उठी थी। (चीनीमंडी, 9 अक्टूबर 2026)

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की समस्याओं की जांच के लिए समिति गठित की है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता वाली यह समिति एफआरपी वृद्धि, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन और भुगतान के मुद्दों की समीक्षा करेगी। जोशी ने कर्नाटक के किसान नेताओं को भरोसा दिया है कि उनकी मांगें उपयुक्त समिति के समक्ष रखी जाएंगी। (गांव जंक्शन, 19 अक्टूबर 2026; हिंदी बिजनेस स्टैंडर्ड, 15 अक्टूबर 2026)

यानी केंद्र की समिति की रिपोर्ट और कर्नाटक की 26 नवंबर की डेडलाइन — दोनों का असर देश भर के गन्ना भाव पर पड़ सकता है। यूपी के किसान के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि 2026-27 पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कर्नाटक के गन्ना किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं? गन्ना भाव ₹3,650 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति टन, चीनी का एमएसपी ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो, एथेनॉल खरीद नीति में बदलाव, तौल और रिकवरी दर में पारदर्शिता, समय पर भुगतान और स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करना।

आंदोलन क्यों स्थगित किया गया? 19 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ आधी रात तक चली बैठक में मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा मिला। इसके बाद किसान नेताओं ने जिला प्रतिनिधियों से सलाह करके प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिया।

26 नवंबर की डेडलाइन का क्या मतलब है? किसानों ने सरकार को 26 नवंबर 2026 तक मांगें मानने की मोहलत दी है। मांगें न मानी गईं तो 27 नवंबर से आंदोलन फिर शुरू होगा, जिसमें मंत्री जोशी के हुब्बल्लि आवास के घेराव की चेतावनी है।

क्या कर्नाटक में चीनी मिलें पेराई शुरू करेंगी? किसान नेताओं के मुताबिक 23 अक्टूबर से मिलें चलाने पर सहमति बनी है। उनकी मांग है कि इससे पहले मुख्यमंत्री मिल प्रबंधकों के साथ बैठक कर एकसमान गन्ना भाव तय कराएं।

यूपी के गन्ना किसानों पर इसका क्या असर होगा? यूपी में भी ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग है और 2026-27 के एसएपी की घोषणा बाकी है। केंद्र की समिति की रिपोर्ट और कर्नाटक की डेडलाइन का असर राष्ट्रीय गन्ना मूल्य नीति पर पड़ सकता है।

स्रोत: द हिंदू (19 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (19 अक्टूबर 2026), द साउथ फर्स्ट (19 अक्टूबर 2026), न्यू इंडियन एक्सप्रेस (20 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (19 अक्टूबर 2026), गांव जंक्शन (19 अक्टूबर 2026), हिंदी बिजनेस स्टैंडर्ड (15 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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