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₹5500 प्रति टन गन्ना भाव पर अड़े कर्नाटक के किसान, बोले — पहले रेट तय, तभी चलेंगी मिलें; यूपी के 48 लाख किसानों के लिए भी 3 बड़े संकेत

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 16, 2026 • 6 min read
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₹5500 प्रति टन गन्ना भाव पर अड़े कर्नाटक के किसान, बोले — पहले रेट तय, तभी चलेंगी मिलें; यूपी के 48 लाख किसानों के लिए भी 3 बड़े संकेत
अंतिम अपडेट: October 16, 2026 2:19 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मैसूर में बीते गुरुवार को गुस्साए गन्ना किसानों ने कोई बड़ा भाषण नहीं दिया। उन्होंने आपस में एक-एक और पांच-पांच रुपये के सिक्के जमा किए — कुल ₹1,770। यह चंदा नहीं था। यह सरकार की सूखा राहत को “खैरात” बताकर खारिज करने और उसे बैंक ड्राफ्ट से वापस भेजने का ऐलान था। कर्नाटक में गन्ना किसानों का गुस्सा अब इसी स्तर पर है — राज्यभर में किसान ₹5,500 प्रति टन भाव की मांग पर सड़कों पर हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम हैं, और कलबुर्गी प्रशासन ने चीनी मिलों को भाव तय करने के लिए सिर्फ एक हफ्ते की मोहलत दे दी है। इस आंदोलन की हर मांग का नाता उत्तर प्रदेश के किसानों से भी है — यहां 2026-27 का नया गन्ना मूल्य (एसएपी) अभी घोषित होना बाकी है।

मैसूर में सिक्कों वाला विरोध: राहत नहीं, न्याय चाहिए

कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरबुर शांतकुमार के नेतृत्व में किसानों ने मैसूर में कृषि उपज मंडी समिति के सामने प्रदर्शन किया। उनका गुस्सा दो बातों पर था — एफआरपी में बढ़ोतरी की देरी, और केंद्र की रमेश चंद समिति में किसान प्रतिनिधि का न होना। किसानों ने चेतावनी दी कि एफआरपी बढ़ाने में और देरी हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में किसानों ने साफ आर्थिक तर्क रखा: खेती की लागत काफी बढ़ चुकी है, इसलिए केंद्र 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर एफआरपी बढ़ाकर ₹4,500 प्रति टन (₹450 प्रति क्विंटल) करे। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 का हवाला देते हुए उन्होंने मांग की कि उपभोक्ता और वाणिज्यिक इस्तेमाल वाली चीनी के दाम अलग-अलग तय हों, ताकि मिलों का अतिरिक्त मुनाफा किसानों से साझा हो।

यहीं सिक्कों वाली घटना हुई। किसानों का कहना था कि राज्य के 217 तालुक भीषण सूखे की चपेट में हैं, 20 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई और नुकसान ₹20,000 करोड़ से ज्यादा आंका गया है। ऐसे में सरकार की राहत “खैरात” जैसी है। अब ₹1,770 का ड्राफ्ट बनाकर सरकार को भेजा जाएगा, और मांग है कि सूखा प्रभावित हर किसान को ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजा मिले।

कलबुर्गी में केपीआरएस की हुंकार: ₹5500/टन से कम कुछ नहीं

कर्नाटक प्रांता रैयत संघ (केपीआरएस) ने कलबुर्गी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीधी चुनौती दी — गन्ने का मूल्य ₹5,500 प्रति टन (₹550 प्रति क्विंटल) तय हो, और जब तक भाव तय न हो, मिलों को गन्ना पेराई की इजाजत न मिले। संगठन के जिला अध्यक्ष शरणबसप्पा मामशेट्टी ने कहा कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उचित मूल्य मिलना चाहिए। एक बड़ी मांग यह भी थी कि चीनी मिलें गन्ने से बनने वाले उप-उत्पादों — एथनॉल, शीरा, डिस्टिलरी उत्पाद और बिजली — के मुनाफे का 50 प्रतिशत किसानों को दें। साथ ही एसएपी में एफआरपी के ऊपर ₹900 प्रति टन अतिरिक्त, तौल और शुगर रिकवरी में गड़बड़ी रोकने और कटाई-ढुलाई का खर्च घटाने की मांग की गई।

प्रशासन भी उतरा मैदान में: 5 मिलों को एक हफ्ते की मोहलत

आंदोलन का असर प्रशासनिक स्तर पर भी दिखा। कलबुर्गी के डिप्टी कमिश्नर इकराम शरीफ ने जिले की पांचों चीनी फैक्ट्रियों को निर्देश दिया कि 2026-27 के पेराई सत्र की कटाई शुरू होने से पहले एक हफ्ते के भीतर किसानों के साथ भाव, कटाई और ढुलाई के मुद्दों पर समझौता कर लें।

डीसी ने कहा कि फैक्ट्रियां आपस में सलाह करके उचित मूल्य पर आम सहमति बनाएं, क्योंकि फसल कटाई के लिए तैयार है। भीषण सूखे को देखते हुए उन्होंने मिलों से उदार रहने को कहा — चीनी और एथनॉल के दाम बढ़े हैं और मिलें मुनाफा कमा रही हैं, तो इसका फायदा किसानों से भी साझा होना चाहिए। अलग-अलग भाव, कटाई शेड्यूल में भेदभाव, तौल में गड़बड़ी और भुगतान में देरी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने बकाया जल्द चुकाने का निर्देश दिया।

मिलों को किसानों को कटाई शेड्यूल, वजन और भुगतान की जानकारी देने वाली एसएमएस आधारित प्रणाली लागू करने को कहा गया है, और तौल की शिकायतों पर विधिक माप विज्ञान विभाग फैक्ट्रियों में अचानक निरीक्षण करेगा।

हाईवे जाम, रातभर डेरा: आंदोलन कई जिलों में फैला

यह आंदोलन अब बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, कलबुर्गी, कोप्पल, हावेरी, धारवाड़, मांड्या, मैसूर और चामराजनगर तक फैल चुका है। बेलगावी में किसानों ने पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर हट्टर्गी, कुगनोली और हीरेबागवाड़ी टोल प्लाजा के पास सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारी रातभर हाईवे पर डेरा डाले रहे। कलबुर्गी में राम मंदिर सर्किल पर जाम लगा और हुमनाबाद रिंग रोड 45 मिनट बंद रही।

किसान नेताओं ने केंद्र को जवाब के लिए दो दिन की मोहलत दी है — संतोषजनक फैसला न हुआ तो आंदोलन और तेज होगा, राज्यव्यापी बंद तक का आह्वान हो सकता है।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए 3 बड़े संकेत

पहला संकेत — एसएपी की लड़ाई अब राष्ट्रीय मुद्दा है। कर्नाटक के किसान तमिलनाडु मॉडल का हवाला देकर एफआरपी से ₹800-900 प्रति टन ऊपर एसएपी मांग रहे हैं। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खुद कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसएपी पर विचार करने को कहा है। वहीं यूपी में 2026-27 का एसएपी अभी घोषित ही नहीं हुआ है। 2025-26 में यह अगेती के लिए ₹400 और सामान्य गन्ने के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था। किसानों को साफ समझ लेना चाहिए कि पुराने सत्र का भाव नए सत्र का भाव नहीं है — नए एसएपी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

दूसरा संकेत — उप-उत्पादों के मुनाफे की हिस्सेदारी की मांग तेज हो रही है। कर्नाटक के किसान मांग कर रहे हैं कि एथनॉल, शीरा और बिजली से मिलों के मुनाफे का 50 प्रतिशत उन्हें मिले। यूपी में भी यही सवाल उठता रहा है — मिलें चीनी के अलावा एथनॉल से अच्छी कमाई करती हैं, लेकिन किसान का भाव उसी पुराने ढर्रे पर तय होता है।

तीसरा संकेत — तौल और रिकवरी में पारदर्शिता हर राज्य में एक जैसी मांग है। कलबुर्गी में प्रशासन ने तौल मशीनों के अचानक निरीक्षण के आदेश दिए हैं। यूपी में भी किसान घटतौली और रिकवरी में गड़बड़ी की शिकायत करते हैं। केंद्र की रमेश चंद समिति इन्हीं मुद्दों की वैज्ञानिक जांच करेगी।

इस बीच केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत रिकवरी आधार)। रिकवरी हर 0.1 प्रतिशत बढ़ने पर ₹3.56 प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेगा, और 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर भी न्यूनतम ₹338.3 प्रति क्विंटल मिलेगा। यूपी में करीब 122 चीनी मिलें हैं और पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है। पेराई से पहले किसान अपने गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड, बैंक खाते और पर्ची की व्यवस्था दुरुस्त कर लें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक के किसान गन्ने का कितना भाव मांग रहे हैं? केपीआरएस ₹5,500 प्रति टन (₹550 प्रति क्विंटल) और कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ एफआरपी ₹4,500 प्रति टन की मांग कर रहा है। दोनों एसएपी में एफआरपी से ₹800-900 प्रति टन अतिरिक्त चाहते हैं।

कर्नाटक में आंदोलन क्यों हो रहा है? एफआरपी में देरी, तौल-रिकवरी में गड़बड़ी, कटाई-ढुलाई का बढ़ता खर्च, उप-उत्पादों के मुनाफे में हिस्सेदारी न मिलना और रमेश चंद समिति में किसान प्रतिनिधि न होना मुख्य कारण हैं। 217 तालुकों में सूखे से 20 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद होने के बाद अपर्याप्त राहत ने गुस्सा बढ़ाया है।

कलबुर्गी प्रशासन ने चीनी मिलों को क्या निर्देश दिए हैं? डिप्टी कमिश्नर ने जिले की 5 फैक्ट्रियों को एक हफ्ते में किसानों से भाव पर समझौता करने, एसएमएस आधारित कटाई शेड्यूल प्रणाली लागू करने, बकाया चुकाने और तौल मशीनों के अचानक निरीक्षण का निर्देश दिया है।

यूपी में 2026-27 का गन्ना एसएपी कब घोषित होगा? अभी 2026-27 का एसएपी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 में यह अगेती के लिए ₹400 और सामान्य गन्ने के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था। केंद्र का एफआरपी 2026-27 के लिए ₹365 प्रति क्विंटल तय है। नए एसएपी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

स्रोत: The Hindu (15 अक्टूबर 2026 — दो रिपोर्ट), AgriInsite (16 अक्टूबर 2026), Siasat, Deccan Herald.

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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