कासगंज की न्यौली चीनी मिल पर 18.54 करोड़ का गन्ना बकाया: 3,965 किसानों को एक सप्ताह में भुगतान की गारंटी, वसूली सर्टिफिकेट जारी

लंबे समय से अपने पैसे का इंतजार कर रहे कासगंज के गन्ना किसानों के लिए राहत की खबर आई है। न्यौली चीनी मिल पर किसानों के 18 करोड़ 54 लाख रुपये के बकाया भुगतान को लेकर तहसील प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने मिल के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट यानी आरसी जारी कर दी है और प्रबंधन को एक सप्ताह के अंदर किसानों का पूरा बकाया चुकाने के निर्देश दिए हैं। समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर मिल के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
दैनिक जागरण की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बृहस्पतिवार को एसडीएम सदर एसएन त्रिपाठी, तहसीलदार बलवंत उपाध्याय और नायब तहसीलदार सुरेश चौधरी खुद मिल परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने बकाया भुगतान की स्थिति जानने की कोशिश की, लेकिन बैठक में व्यस्तता का हवाला देकर मिल के अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन ने बकाया वसूली के लिए आरसी जारी करने का फैसला लिया।
फैक्ट फाइल: कितना भुगतान हुआ, कितना बाकी है
न्यौली चीनी मिल का पेराई सत्र 2025-26 वर्ष के लिए 22 नवंबर 2025 को शुरू हुआ था और इसका समापन 2 फरवरी 2026 को हुआ। रिपोर्ट के फैक्ट फाइल के अनुसार मिल ने अब तक किसानों को 25.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, लेकिन 15.99 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य अब भी बकाया है। इसमें 2.55 करोड़ रुपये ब्याज की राशि भी शामिल है। इस तरह कुल बकाया राशि 18.54 करोड़ रुपये बनती है और इससे 3,965 गन्ना किसान सीधे प्रभावित हैं।
यानी मिल ने एक सत्र में खरीदा गया गन्ना तो पूरी तरह पेर लिया, लेकिन किसानों की जेब तक पैसा पूरी तरह नहीं पहुंचा। ब्याज की राशि का बकाये में शामिल होना इस बात का संकेत है कि भुगतान में देरी लंबी खिंची है।
अधिकारियों ने क्या कहा
जिला गन्ना अधिकारी कासगंज ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि तहसील प्रशासन की ओर से न्यौली चीनी मिल के खिलाफ आरसी जारी कर एक सप्ताह में भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने साफ किया कि निर्देशों का पालन कराया जाएगा और ऐसा नहीं होने पर मिल के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम कासगंज एसएन त्रिपाठी ने भी पुष्टि की कि चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 18.54 करोड़ रुपये बकाया है। उनके अनुसार बकाया वसूली के लिए आरसी जारी कर एक सप्ताह में भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं और निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से समय सीमा तय किए जाने के बाद किसानों के बीच भुगतान की उम्मीद जरूर जगी है। किसान महीनों से खेती की लागत, खाद-बीज और घरेलू खर्चों के लिए अपने ही पैसों का इंतजार कर रहे हैं।
यह मिल पहले भी विवादों में रही है
न्यौली चीनी मिल को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। चिनिमंडी और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार इस मिल का संचालन शेरवानी शुगर सिंडिकेट लिमिटेड करती है। इससे पहले बकाया भुगतान न करने के मामले में मिल के प्रबंध निदेशक कुणाल यादव, यूनिट हेड इसरार अहमद और एजीएम (लेखा/वित्त) वेदप्रकाश शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी प्रणय सिंह के निर्देश पर हुई थी।
जिला सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड के सचिव प्रदीप कुमार वर्मा की शिकायत के अनुसार मिल ने 2 फरवरी 2026 तक 10.37 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की थी। शासन द्वारा निर्धारित दरों के हिसाब से किसानों को करीब 41.23 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और 57.06 लाख रुपये गन्ना विकास अंशदान का भुगतान किया जाना था। 19 जून 2026 तक मिल पर किसानों का 19.18 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और 27.06 लाख रुपये गन्ना विकास अंशदान बकाया था।
14 दिन का नियम और ब्याज का हक
उत्तर प्रदेश के नियमों के मुताबिक चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों का भुगतान करना अनिवार्य है। समय पर भुगतान न होने पर किसानों को बकाये पर ब्याज पाने का अधिकार है। इसी नियम के तहत न्यौली मिल के बकाये में 2.55 करोड़ रुपये ब्याज की राशि जुड़ी हुई है।
जिला गन्ना अधिकारी से लेकर उप गन्ना आयुक्त, गन्ना आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर से इस मिल को कई बार नोटिस और चेतावनी जारी की गई, लेकिन इसके बावजूद भुगतान पूरा नहीं हुआ। अब आरसी जारी होने के बाद प्रशासन के पास संपत्ति कुर्की तक की विधिक कार्रवाई का रास्ता खुला है।
पेराई सत्र नजदीक, किसान तैयारी में जुटे
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें 2026-27 का पेराई सत्र करीब 20 अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी में हैं। किसान संगठनों ने नए सत्र में समय पर भुगतान और गन्ना भाव बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। ऐसे में पुराने बकाये पर प्रशासन की सख्ती किसानों के मनोबल के लिए महत्वपूर्ण है।
गन्ना विभाग की सलाह है कि किसान अपने गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, रकबा और किस्म की जानकारी जांच लें और बैंक खाता सक्रिय रखें ताकि भुगतान में कोई तकनीकी अड़चन न आए।
जवाब जानिए
न्यौली चीनी मिल पर किसानों का कितना बकाया है? दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार न्यौली चीनी मिल पर 3,965 गन्ना किसानों के कुल 18.54 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसमें 15.99 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और 2.55 करोड़ रुपये ब्याज की राशि शामिल है।
प्रशासन ने मिल के खिलाफ क्या कार्रवाई की है? तहसील प्रशासन ने मिल के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किया है और एक सप्ताह के अंदर पूरा बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में भुगतान न होने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आरसी जारी होने का किसानों को क्या फायदा होगा? आरसी जारी होने के बाद प्रशासन के पास बकाया वसूली के लिए संपत्ति कुर्की जैसी कानूनी कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है, जिससे मिल प्रबंधन पर भुगतान का दबाव बढ़ता है।
न्यौली चीनी मिल पर पहले भी कोई कार्रवाई हुई थी? हां। चिनिमंडी और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार बकाया भुगतान न करने के मामले में मिल के प्रबंध निदेशक समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
2026-27 के गन्ने के भाव की घोषणा हुई है? नहीं। 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने मूल्य वृद्धि का ऐलान नहीं किया है।
स्रोत: दैनिक जागरण, चिनिमंडी/अमर उजाला
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