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3 घंटे चली बैठक, 1 हफ्ते में हाई-लेवल कमेटी: गन्ने की तौल-रिकवरी में गड़बड़ी पर होगी वैज्ञानिक जांच, किसानों ने रखीं ये 5 मांगें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 13, 2026 • 6 min read
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3 घंटे चली बैठक, 1 हफ्ते में हाई-लेवल कमेटी: गन्ने की तौल-रिकवरी में गड़बड़ी पर होगी वैज्ञानिक जांच, किसानों ने रखीं ये 5 मांगें
अंतिम अपडेट: October 13, 2026 12:47 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नई दिल्ली के पूसा परिसर में सोमवार, 12 अक्टूबर को करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की पुरानी शिकायतों के लिए एक हफ्ते के भीतर हाई-लेवल संयुक्त कमेटी बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के करीब 80-90 किसान प्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा की, जिसमें दोनों राज्यों के मंत्री भी मौजूद रहे।

बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह कमेटी केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ विषय विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को मिलाकर बनेगी। कमेटी गन्ने की कटाई के समय, चीनी रिकवरी के वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक प्रयोगशाला जांच व्यवस्था और तौल की सटीकता जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच कर तय समय-सीमा में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। किसानों की सबसे बड़ी मांग उत्पादन लागत बढ़ने के हवाले से समर्थन मूल्य बढ़ाने और चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की रही।

कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा

सरकारी बयान के मुताबिक प्रस्तावित कमेटी में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों के नुमाइंदे, किसान संगठनों के नेता, चीनी मिल उद्योग के प्रतिनिधि, विषय विशेषज्ञ और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। यानी पहली बार किसानों की शिकायतों की जांच में मिलों और वैज्ञानिकों को एक ही टेबल पर बिठाकर तकनीकी सच्चाई सामने लाने की कोशिश होगी।

बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दिए। उनका साफ कहना था कि किसानों के शोषण को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कमेटी किन मुद्दों की जांच करेगी

कमेटी का काम पूरे सिस्टम को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए सिफारिशें देना होगा। जिन बिंदुओं की जांच होगी, उनमें ये प्रमुख हैं:

  • कटाई का सही समय: गन्ना कब काटा जाए ताकि चीनी की मात्रा अधिकतम मिले — जल्दी या देर से कटाई पर किसान और मिल दोनों का नुकसान होता है।
  • रिकवरी के वैज्ञानिक मानक: मिलें जो रिकवरी प्रतिशत बताती हैं, वह सही है या नहीं — इसकी जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशाला व्यवस्था की सिफारिश होगी।
  • तौल की सटीकता: धर्मकांटों पर वजन में कथित कटौती की शिकायतें लंबे समय से आ रही हैं। कमेटी तौल व्यवस्था की निष्पक्षता परखेगी।
  • भुगतान विवाद और फसल बीमा: बकाया भुगतान, ब्याज और गन्ना फसल के बीमा से जुड़े विवादों के स्थायी समाधान पर भी विचार होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बैठक में गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया भी समझाई और हर स्तर पर पारदर्शिता का भरोसा दिया।

किसानों ने रखीं ये 5 बड़ी मांगें

करीब तीन घंटे चली चर्चा में किसान प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें खुलकर रखीं। प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं:

  1. समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी: उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए किसानों ने गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग की। कर्नाटक के किसान संगठनों ने प्रति टन 5,500 रुपये की मांग रखी है।
  2. चीनी की एमएसपी 31 से 50 रुपये: चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग, ताकि मिलों की हालत सुधरे और भुगतान समय पर हो।
  3. रिकवरी आंकड़ों में पारदर्शिता: मिलों द्वारा बताई गई चीनी रिकवरी पर किसानों को भरोसा नहीं है। स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग उठी।
  4. तौल में कटौती बंद हो: गन्ना तौल केंद्रों पर वजन में कथित कटौती रोकने के लिए सख्त व्यवस्था की मांग की गई।
  5. कर्नाटक में एसएपी: कई संगठनों ने कर्नाटक में भी यूपी, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु की तरह राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय करने की मांग की। प्रहलाद जोशी ने भी कर्नाटक सरकार से केंद्र के एफआरपी से ऊपर एसएपी तय करने का आग्रह किया।

बैठक के बाद कर्नाटक के एक किसान नेता ने कहा कि कमेटी बनना लंबी प्रक्रिया है, उन्हें तत्काल समाधान चाहिए — यानी भाव बढ़ोतरी। अब किसान संगठन आपस में चर्चा कर अगली रणनीति तय करेंगे।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

भले ही यह बैठक महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों से हुई हो, लेकिन कमेटी की सिफारिशों का असर पूरे देश पर पड़ेगा — उत्तर प्रदेश पर सबसे ज्यादा, क्योंकि यहां देश की सबसे अधिक 122 चीनी मिलें हैं और सबसे ज्यादा गन्ना किसान भी यहीं हैं।

रिकवरी मानक, प्रयोगशाला जांच और तौल व्यवस्था पर जो भी वैज्ञानिक नियम बनेंगे, वे केंद्रीय स्तर के होंगे और यूपी की मिलों पर भी लागू होंगे। अगर चीनी की एमएसपी 31 से बढ़कर 50 रुपये होती है, तो मिलों की नकदी स्थिति सुधरेगी, जिससे बकाया भुगतान समय पर मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

भाव के मोर्चे पर यूपी के किसानों को यह जानना जरूरी है: 2026-27 सत्र के लिए केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय है। यूपी में 2025-26 सत्र का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था, लेकिन 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — पिछले सत्र का भाव इस सत्र का भाव न समझें। अधिक जानकारी के लिए एफआरपी बनाम एसएपी का पूरा गणित यहां पढ़ें।

पेराई सत्र शुरू, किसानों के लिए जरूरी बातें

2026-27 का चीनी सत्र 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुका है और पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। इस समय तीन बातें सबसे अहम हैं: गन्ना सर्वे रिकॉर्ड में रकबा और किस्म का विवरण सही रखें; बैंक खाता सक्रिय और आधार से लिंक रखें ताकि भुगतान में देरी न हो; तौल के समय पर्ची पर दर्ज वजन खुद मिलान करें और कटौती दिखे तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: केंद्र की हाई-लेवल कमेटी कब बनेगी और इसमें कौन होगा? जवाब: सरकारी बयान के मुताबिक 12 अक्टूबर की बैठक के एक हफ्ते के भीतर कमेटी बनेगी। इसमें केंद्र, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों, विषय विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के प्रतिनिधि होंगे।

सवाल: कमेटी किन मुद्दों की जांच करेगी? जवाब: कटाई का सही समय, रिकवरी के वैज्ञानिक मानक, आधुनिक प्रयोगशाला जांच, तौल की सटीकता, भुगतान विवाद और फसल बीमा — इन सभी पर कमेटी तय समय में सिफारिशें देगी।

सवाल: किसानों ने चीनी की एमएसपी को लेकर क्या मांग रखी? जवाब: किसानों ने चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है, ताकि मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरे और गन्ना भुगतान समय पर हो।

सवाल: 2026-27 सत्र में गन्ने का सरकारी भाव क्या है? जवाब: केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है। रिकवरी 0.1 प्रतिशत बढ़ने पर 3.56 रुपये का प्रीमियम और घटने पर इतनी ही कटौती होगी; 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर न्यूनतम 338.30 रुपये मिलेगा। यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

सवाल: क्या इस कमेटी का फायदा यूपी के किसानों को मिलेगा? जवाब: हां। रिकवरी, तौल और जांच पर जो वैज्ञानिक मानक बनेंगे, वे राष्ट्रीय स्तर के होंगे और यूपी की 122 चीनी मिलों पर भी लागू होंगे।

स्रोत: डेक्कन हेराल्ड, टाइम्स ऑफ इंडिया, आवाज़ द वॉयस, आईएएनएस/भास्कर लाइव — 12-13 अक्टूबर 2026

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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