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15 नवंबर से पहले गन्ना पेराई नहीं: किसान संगठनों की कड़ी चेतावनी, 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री की बैठक — यूपी किसानों पर असर

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 6 min read
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15 नवंबर से पहले गन्ना पेराई नहीं: किसान संगठनों की कड़ी चेतावनी, 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री की बैठक — यूपी किसानों पर असर
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 4:45 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ना बेल्ट में बड़ा टकराव खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि 15 नवंबर से पहले चीनी मिलों में गन्ना पेराई नहीं होने देंगे। महाराष्ट्र सरकार ने इस बार 15 अक्टूबर से पेराई सत्र शुरू करने की घोषणा की है, और केंद्र ने भी दिवाली पर चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए मिलों से करीब एक महीने पहले पेराई शुरू करने को कहा है। किसान संगठनों का कहना है कि अपरिपक्व गन्ने की पेराई से किसान और मिल दोनों को भारी नुकसान होगा, और इस नुकसान की भरपाई सरकार को करनी होगी। दबाव बढ़ने पर केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 12 अक्टूबर को बैठक बुलाई है।

15 नवंबर की मांग — पूरा मामला

बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी) की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठन इस बार एकजुट हो गए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने सिर्फ त्योहारों के मौसम में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए, किसान और मिल के नुकसान की परवाह किए बिना, जल्दी पेराई का फरमान जारी कर दिया है।

संगठनों ने चीनी मिलों और गन्ना उत्पादकों से अपील की है कि जब तक मांगों पर फैसला नहीं होता, तब तक गन्ने की कटाई और पेराई शुरू न की जाए। किसान नेता और पूर्व विधायक संपतबापू पवार ने कहा कि वर्षों से किसान असंगठित रहने के कारण उनके पसीने और मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिला; अब सभी संगठनों का व्यापक सम्मेलन करके आंदोलन का बिगुल बजाने की तैयारी है।

12 अक्टूबर की बैठक — क्यों है अहम

किसानों की मांग पर केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 12 अक्टूबर को बैठक बुलाई है। इसमें जल्दी पेराई, गन्ना मूल्य, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल के दाम जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत की करीब आधी चीनी महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के दोनों ओर स्थित चीनी मिलों में पैदा होती है, और इन इलाकों में इस समय सूखे जैसी परिस्थितियां भी बनी हुई हैं — जिससे केंद्र के लिए यह मामला और संवेदनशील हो गया है।

जल्दी पेराई से किसान को क्या-क्या नुकसान

किसान संगठनों का सबसे मजबूत तर्क आंकड़ों पर टिका है, और यह बात यूपी के किसानों के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है:

  • प्रति एकड़ करीब 6 टन तक उत्पादन कम हो सकता है — अपरिपक्व गन्ने की पेराई से उपज और वजन दोनों घटते हैं। किसान नेताओं के आकलन के मुताबिक इससे प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान संभव है।
  • चीनी की रिकवरी कम होगी — नवंबर के बाद गन्ने में सुक्रोज की मात्रा सामान्य तौर पर बढ़ती है। अक्टूबर के गन्ने में मिठास कम होती है, इसलिए समय से पहले पेराई पर चीनी की रिकवरी घटती है।
  • असर अगले साल के भुगतान पर भी पड़ेगा — गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) चीनी की रिकवरी से जुड़ा है। अगर रिकवरी निर्धारित स्तर से नीचे रही, तो मिलों की कमाई घटेगी और इसका सीधा असर अगले सीजन में किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ेगा।

उद्योग के विशेषज्ञ भी यही कहते हैं। द हिंदू बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, समय से पहले पेराई से अक्टूबर-नवंबर में चीनी की आपूर्ति तो बढ़ेगी, लेकिन पूरे सीजन में कम रिकवरी की वजह से कुल उत्पादन घट सकता है। यहां एक गणित समझना जरूरी है: केंद्र ने सीजन 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 3,650 रुपये प्रति टन (365 रुपये प्रति क्विंटल) तय किया है, और मिलों को इस बेसिक भाव पर न्यूनतम भुगतान करना ही होता है — भले ही वास्तविक रिकवरी इससे कम हो। यानी जल्दी पेराई में घटी रिकवरी सीधे मिल की भुगतान क्षमता पर चोट करेगी, जिसका खामियाजा आखिर में किसान ही भुगतेगा।

किसानों की 5 बड़ी मांगें

किसान संगठनों की मांगें सिर्फ पेराई की तारीख तक सीमित नहीं हैं:

  1. गन्ने का भाव बढ़े — सरकार और कृषि मूल्य आयोग द्वारा तय एफआरपी किसानों को मंजूर नहीं। जय शिवराय संगठन के शिवाजी माने ने कहा कि अगर खेती की सारी लागतें सही तरीके से जोड़ी जाएं, तो किसानों को करीब 7,000 रुपये प्रति टन का भाव मिलना चाहिए।
  2. चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी — इससे मिलों की कमाई बढ़ेगी और किसानों को बेहतर भुगतान की क्षमता बनेगी।
  3. एथेनॉल के दाम बढ़ें — खासकर सी-हेवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल के दाम। राजू शेट्टी ने सतारा में यह मांग रखी, साथ ही मिलों को किसानों का बकाया चुकाने के लिए कर्ज की व्यवस्था की मांग भी की।
  4. कटाई-ढुलाई की कटौती पर लगाम — कर्नाटक में कटाई और परिवहन शुल्क 800 रुपये प्रति टन तय है; मिलें इससे ज्यादा काटें तो जिलाधिकारी से शिकायत की अपील।

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब

यह लड़ाई महाराष्ट्र-कर्नाटक से शुरू हुई है, लेकिन यूपी के किसानों से इसका सीधा संबंध है। पश्चिमी यूपी में इस बार पेराई सत्र करीब 10 दिन पहले, यानी 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद है — इसलिए अपरिपक्व गन्ने की पेराई का सवाल यूपी के किसानों के लिए भी उतना ही अहम है। साथ ही, यूपी में एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है — पिछले सत्र (2025-26) में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था। 12 अक्टूबर की केंद्रीय बैठक से जो संदेश निकलेगा, उसका असर यूपी के मूल्य-निर्धारण पर भी पड़ सकता है।

अभी किसान क्या करें

अपने गन्ने की परिपक्वता खुद जांचें — कच्चा गन्ना काटने से उपज और भाव दोनों का नुकसान होता है। गन्ना सर्वे रिकॉर्ड सत्यापित करें: रकबा और किस्म का रिकॉर्ड, बैंक खाता सक्रिय और आधार से लिंक — भुगतान में देरी से बचने के लिए ये कागजी काम पेराई से पहले निपटा लें। अपनी चीनी मिल और गन्ना समिति की ओर से पेराई तिथि और पर्ची कैलेंडर की आधिकारिक सूचना का इंतजार करें, अफवाहों पर गन्ना न काटें। और 12 अक्टूबर की बैठक की खबर पर ध्यान दें — यह फैसला पूरे देश के गन्ना किसानों के लिए दिशा तय कर सकता है।

जवाब जानिए

क्या 15 नवंबर से पहले पेराई रुक जाएगी? अभी यह किसान संगठनों की मांग और ऐलान है, अंतिम फैसला नहीं। महाराष्ट्र सरकार ने 15 अक्टूबर से पेराई की घोषणा की है। 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की बैठक में इस पर चर्चा होगी, उसके बाद स्थिति साफ होगी।

जल्दी पेराई से किसान को कितना नुकसान हो सकता है? किसान नेताओं के आकलन के मुताबिक अपरिपक्व गन्ने की पेराई से प्रति एकड़ करीब 6 टन तक उत्पादन कम हो सकता है, जिससे लगभग 20 हजार रुपये प्रति एकड़ का आर्थिक नुकसान संभव है। चीनी की रिकवरी भी घटती है।

रिकवरी कम होने से गन्ने के भाव पर क्या असर पड़ता है? एफआरपी चीनी की रिकवरी से जुड़ा है। हालांकि मिलों को 10.25 प्रतिशत रिकवरी के बेसिक भाव पर न्यूनतम भुगतान करना ही होता है, लेकिन कम रिकवरी से मिलों की कमाई घटती है, जिससे भुगतान क्षमता और भविष्य के भाव दोनों पर दबाव पड़ता है।

इस सीजन का एफआरपी क्या तय हुआ है, और यूपी की पेराई कब शुरू होगी? केंद्र ने सीजन 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर एफआरपी 3,650 रुपये प्रति टन (365 रुपये प्रति क्विंटल) तय किया है। यूपी का एसएपी 2026-27 अभी घोषित नहीं हुआ है। पश्चिमी यूपी में मिलों की तैयारी 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की है — अंतिम तिथि मौसम और आधिकारिक घोषणाओं पर निर्भर करेगी।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी), 8 अक्टूबर 2026; किसान इंडिया, 5 अक्टूबर 2026; द हिंदू बिज़नेसलाइन, 16 सितंबर 2026।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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