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कोल्हुओं में गन्ना 500 रुपये क्विंटल बिका, मिल भाव से 100 रुपये ज्यादा — चुनावी साल में क्या SAP बढ़ाएगी योगी सरकार?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 4, 2026 • 6 min read
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कोल्हुओं में गन्ना 500 रुपये क्विंटल बिका, मिल भाव से 100 रुपये ज्यादा — चुनावी साल में क्या SAP बढ़ाएगी योगी सरकार?
अंतिम अपडेट: October 4, 2026 1:37 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

चीनी मिलें अभी चली भी नहीं हैं, लेकिन गन्ने का खुले बाजार का भाव मिल भाव को पीछे छोड़ चुका है। इस हफ्ते पश्चिम यूपी के कोल्हुओं और क्रेशरों में गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा गया — जो चीनी मिलों के मौजूदा राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) से करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक रुड़की के झबरेड़ा में बुधवार को कोल्हुओं में पेराई शुरू होने के पहले ही दिन गन्ने का भाव 400 से 470 रुपये क्विंटल रहा, और गुड़ बनाने का काम भी साथ ही शुरू हो गया।

यहीं से सवाल खड़ा होता है जो इस समय प्रदेश के 46 लाख गन्ना किसान पूछ रहे हैं — 2027 में विधानसभा चुनाव हैं, और हर बार चुनावी साल में गन्ना मूल्य बढ़ा है। तो क्या इस बार भी दीपावली से पहले गन्ना मूल्य बढ़ने का ऐलान होगा?

कोल्हुओं में गन्ना 500 रुपये तक क्यों बिका

नवभारत टाइम्स (मेरठ) की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में ही कोल्हू चलने शुरू हो गए थे, जबकि चीनी मिलें अक्टूबर में चलेंगी। खुले बाजार में गन्ना 490 से 500 रुपये क्विंटल में खरीदा जा रहा है। गुड़ और खांडसारी को बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं, इसलिए कोल्हू संचालक भी गन्ने के लिए ज्यादा भाव देने को तैयार हैं।

रुड़की के झबरेड़ा, कोटवाल आलमपुर और भक्तोंवाली में इस हफ्ते कोल्हू चले, और शेरपुर खेलमऊ के गन्ना क्रेशर में भी पेराई शुरू कर दी गई। किसानों का कहना है कि कोल्हू चलने से खेतों से फसल निकालना आसान हो गया है और गन्ने की पत्तियां पशुओं के चारे के काम आ रही हैं।

लेकिन यही ऊंचा कोल्हू भाव सरकार के लिए परेशानी का सबब भी है। जब खुले बाजार में गन्ना 500 रुपये बिक रहा है, तो किसानों का सवाल सीधा है — चीनी मिलें अभी भी पिछले सत्र के 400 रुपये भाव पर गन्ना क्यों लेंगी?

मिल भाव बनाम कोल्हू भाव — पूरा हिसाब

यहां भाव की पूरी तस्वीर समझना जरूरी है, क्योंकि कई किसान FRP और SAP को मिलाकर उलझ जाते हैं:

  • SAP 2025-26 (यूपी, मौजूदा लागू भाव): अगेती किस्म 400 रुपये/क्विंटल, सामान्य किस्म 390 रुपये/क्विंटल। यह भाव पिछले सत्र में 30 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर तय किया गया था।
  • FRP 2026-27 (केंद्र सरकार, अक्टूबर 2026 से लागू): 365 रुपये/क्विंटल (10.25% रिकवरी पर)। केंद्र ने मई 2026 में इसकी घोषणा की थी। FRP न्यूनतम भाव है — यूपी में SAP इससे ऊपर है।
  • SAP 2026-27 (यूपी): अभी घोषित नहीं हुआ है। राज्य परामर्शी समिति की बैठक अभी होनी है। जब तक नया भाव घोषित नहीं होता, किसानों को पिछले सत्र का SAP ही मिलेगा।

अब गणित साफ है — कोल्हू में 490-500 रुपये मिल रहे हैं, जबकि मिल का भाव अभी भी 400/390 पर अटका है। करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल का यह अंतर ही वह दबाव है, जिसे लेकर किसान संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

चुनावी साल का गणित — कब-कब बढ़ा गन्ना मूल्य

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में गन्ना मूल्य बढ़ने का पुराना पैटर्न रहा है — अक्सर चुनावी साल में ही बढ़ोतरी हुई है:

  • 2017-19: सरकार बनने के बाद 10 रुपये/क्विंटल की बढ़ोतरी।
  • 2021-22: 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 25 रुपये/क्विंटल बढ़ा — गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल हुआ।
  • 2023-24: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले 20 रुपये/क्विंटल बढ़ा — अगेती का भाव 370, सामान्य का 360 और अनुपयुक्त प्रजाति का 355 रुपये तय हुआ।
  • 2025-26: बिना चुनावी साल के भी 30 रुपये/क्विंटल की बढ़ोतरी — अगेती 400 रुपये, सामान्य 390 रुपये।

अब 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। किसान संगठनों को उम्मीद है कि सरकार दीपावली के आसपास गन्ना मूल्य बढ़ाने का तोहफा दे सकती है। जानकार 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं — हालांकि सरकार ने इस पर अभी कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है।

किसान संगठनों की मांग और सरकार पर दबाव

भारतीय किसान यूनियन समेत किसान संगठन पेराई सत्र 2026-27 के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग कर रहे हैं। संगठन का तर्क है कि इस बार चीनी के दाम अचानक बढ़े हैं, जिससे चीनी मिलों को फायदा पहुंचा — तो उस लाभ का हिस्सा किसानों को भी मिलना चाहिए।

दूसरा तर्क लागत का है। खाद, बीज, सिंचाई, बुवाई, गुढाई, मजदूरी और डीजल — खेती का हर खर्च महंगा हुआ है, लेकिन गन्ना मूल्य उसी हिसाब से नहीं बढ़ा। किसान नेताओं का यह भी कहना है कि जिस तरह केंद्र सरकार MSP और FRP समय से पहले तय कर देती है, उसी तरह राज्य सरकार को भी पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ना मूल्य घोषित कर देना चाहिए।

पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियां जोरों पर हैं। शामली के जिलाधिकारी ने तीनों चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 तक पेराई हर हाल में शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश की 122 चीनी मिलों में ज्यादातर के बॉयलर पूजन और मेंटेनेंस का काम पूरा होने वाला है। नया सत्र शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं — और उसी के साथ गन्ना मूल्य की घोषणा का समय भी नजदीक आ रहा है।

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

पहली बात — खुले बाजार का 500 रुपये भाव मिलने की खुशी में मिल का गन्ना कोल्हू को बेचने का फैसला सोच-समझकर करें। मिल में सप्लाई करने पर आपको SAP का सुरक्षित भाव और ब्याज सहित भुगतान का कानूनी हक मिलता है, जबकि कोल्हू भाव रोज घट-बढ़ सकता है। दूसरी बात — नया SAP घोषित होने तक पुराना भाव (अगेती 400, सामान्य 390) ही मिलेगा, इसलिए जल्दबाजी में कोई ठोस फैसला न लें। राज्य परामर्शी समिति की बैठक के बाद तस्वीर साफ होगी।

पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यूपी में 2026-27 का SAP घोषित हो गया है? नहीं। अभी राज्य परामर्शी समिति की बैठक नहीं हुई है। जब तक नया भाव घोषित नहीं होता, तब तक पेराई सत्र 2025-26 का SAP लागू रहेगा — अगेती 400 रुपये और सामान्य 390 रुपये प्रति क्विंटल।

कोल्हुओं में गन्ना कितने भाव बिक रहा है? इस हफ्ते पश्चिम यूपी में कोल्हुओं में गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका है। रुड़की के झबरेड़ा में पेराई के पहले दिन भाव 400 से 470 रुपये क्विंटल रहा।

केंद्र का FRP क्या है और यह SAP से कैसे अलग है? 2026-27 सत्र के लिए केंद्र सरकार का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल है (10.25% रिकवरी पर)। FRP न्यूनतम भाव होता है जो पूरे देश में लागू होता है। SAP राज्य सरकार का तय भाव है जो यूपी में FRP से ऊपर रहता है।

चुनावी साल में गन्ना मूल्य कितना बढ़ सकता है? इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। जानकार 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।

गन्ना मूल्य की घोषणा कब हो सकती है? नया पेराई सत्र अक्टूबर में शुरू हो रहा है। किसान संगठनों को उम्मीद है कि दीपावली से पहले राज्य परामर्शी समिति की बैठक में भाव की घोषणा हो सकती है।

स्रोत: नवभारत टाइम्स, लाइव हिंदुस्तान, ट्रैक्टर जंक्शन, इन्फॉर्मिस्ट मीडिया

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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