चीनी स्टॉक सीमा में बड़ा संशोधन — पूर्वोत्तर सप्लाई के चलते कोलकाता क्षेत्र को 4,000 क्विंटल की विशेष छूट

नई दिल्ली / कोलकाता: केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आगामी 15 सितंबर 2026 से देश भर के थोक चीनी व्यापारियों पर लागू होने जा रही 2,000 क्विंटल (200 टन) स्टॉक सीमा के संबंध में एक महत्वपूर्ण भौगोलिक संशोधन और स्पष्टीकरण आदेश जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जहां उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और अन्य सभी राज्यों में थोक व्यापारियों के लिए 2,000 क्विंटल की सख्त सीमा प्रभावी रहेगी, वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता नगर निगम क्षेत्र और उसके आसपास के लॉजिस्टिक्स हब के लिए स्टॉक सीमा को 4,000 क्विंटल (400 टन) पर यथावत रखने का विशेष निर्णय लिया गया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के संयुक्त सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह विशेष छूट पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश) में आगामी दुर्गा पूजा और दिवाली के दौरान चीनी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से दी गई है।
पूर्वोत्तर राज्यों का मुख्य ट्रांजिट गेटवे है कोलकाता
व्यापारिक संगठनों और पूर्वी भारत चीनी व्यापारी संघ (EISDA) ने केंद्रीय खाद्य मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया था कि पूर्वोत्तर के 7 पहाड़ी राज्यों में अपनी कोई बड़ी चीनी मिल नहीं है और वे अपनी 100% खपत के लिए कोलकाता की थोक मंडी और गोदामों पर निर्भर हैं।
कोलकाता से असम या त्रिपुरा तक मालगाड़ियों और ट्रकों द्वारा चीनी पहुंचने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। यदि कोलकाता के थोक स्टॉकिस्टों की सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी जाती, तो पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में चीनी की भारी किल्लत हो जाती और खुदरा भाव ₹60 प्रति किलो पार कर जाते। मंत्रालय ने इस लॉजिस्टिक्स चुनौती को स्वीकार करते हुए कोलकाता ट्रांजिट हब को 4,000 क्विंटल रखने की मंजूरी दी।
30 दिन के भीतर माल डिस्पैच करने का नियम यथावत
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्टॉक सीमा में छूट के बावजूद कोलकाता के व्यापारियों को भी 30 दिन के भीतर माल आगे भेजने (Turnover Rule) का कड़ाई से पालन करना होगा। किसी भी व्यापारी को 30 दिन से अधिक समय तक सट्टेबाजी के उद्देश्य से चीनी रोकने की इजाजत नहीं होगी।
इसके अतिरिक्त देश के अन्य सभी राज्यों में 15 सितंबर से 2,000 क्विंटल की सीमा पर कोई समझौता नहीं होगा। राज्य सरकारों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 सितंबर की सुबह से ही थोक गोदामों का भौतिक सत्यापन शुरू करें ताकि त्योहारी सीजन में आम जनता को ₹40 से ₹42 प्रति किलो के उचित दाम पर चीनी मिल सके।
राष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कोई कमी नहीं
खाद्य मंत्रालय ने पुनः आश्वस्त किया है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। चालू सत्र में 300 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन और 80 लाख टन का शुरुआती कैरीओवर स्टॉक देश की वार्षिक खपत (285 लाख टन) को पूरा करने के बाद भी पर्याप्त अधिशेष सुनिश्चित करता है।
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