लखीमपुर के अचल मिश्रा को राष्ट्रीय सम्मान: 15 अक्टूबर को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी सम्मानित, जानिए पूरी वजह

खेत की मेहनत को जब राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलती है, तो यह सिर्फ एक किसान की जीत नहीं होती — पूरे जिले के किसानों के लिए हौसले की कहानी बन जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ है लखीमपुर खीरी के प्रगतिशील गन्ना किसान अचल मिश्रा के साथ। गन्ने की खेती में उत्कृष्ट योगदान और कृषि के प्रति समर्पण के लिए उन्हें आज राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) के 91वें स्थापना दिवस समारोह में दिया जाएगा, जहां उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल खुद उन्हें पुरस्कार प्रदान करेंगी।
कार्यक्रम आज 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे संस्थान परिसर स्थित शर्करा सौध में होगा। इस समारोह में प्रदेश के गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा के मुताबिक, इस अवसर पर न सिर्फ प्रगतिशील किसानों को, बल्कि संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
कौन हैं अचल मिश्रा और क्यों मिला यह सम्मान?
अचल मिश्रा लखीमपुर खीरी के प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने गन्ने की खेती में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। उन्हें गन्ना खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चुना गया है। संस्थान के मुताबिक, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों और उन्नत गन्ना किस्मों को अपनाकर प्रति हेक्टेयर उल्लेखनीय पैदावार प्राप्त करने वाले प्रगतिशील किसानों को इस समारोह में सम्मानित किया जा रहा है।
लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादन के प्रमुख जिलों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका गन्ने की खेती पर निर्भर है। ऐसे में जिले के एक किसान को देश के प्रतिष्ठित चीनी संस्थान के मंच पर सम्मानित किया जाना पूरे कृषि समुदाय के लिए गौरव का अवसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान दूसरे किसानों को भी खेती में नई तकनीक अपनाने, उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
90 साल पुराना है राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का इतिहास
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की कहानी अक्टूबर 1936 से शुरू होती है, जब हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट के शर्करा अनुभाग को अलग करके इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई थी। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी रखा गया, और वर्ष 1957 में इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कर दिया गया।
वर्ष 1963 में संस्थान को कल्याणपुर स्थित 525 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले परिसर में स्थानांतरित किया गया, जहां यह आज भी देश के चीनी उद्योग का सबसे बड़ा तकनीकी केंद्र है। संस्थान चीनी, एथेनॉल, सह-उत्पादों और जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने के साथ-साथ अनुसंधान एवं परामर्श सेवाएं भी प्रदान करता है। भारतीय चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण और तकनीकी विकास में इस संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। आज जब यह अपना 91वां स्थापना दिवस मना रहा है, तो इस मंच से किसानों का सम्मान एक प्रतीकात्मक संदेश भी देता है — देश की चीनी अर्थव्यवस्था की बुनियाद खेत में खड़ा किसान ही है।
समारोह में जल संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी भी
स्थापना दिवस समारोह के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीपीसीबी 2.0 चार्टर के तहत जल संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में चीनी और आसवनी उद्योगों के अधिकारियों तथा तकनीकी कर्मियों को अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों के प्रभावी संचालन, जल संरक्षण, उपचारित जल के पुनः उपयोग, शून्य तरल-निष्कासन और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
संगोष्ठी में गन्ना उद्योग, कृषि विकास और चीनी उत्पादन से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा। यानी यह समारोह सिर्फ सम्मान समारोह नहीं, बल्कि चीनी उद्योग के भविष्य पर राष्ट्रीय मंथन का मंच भी है।
सम्मान से किसानों को क्या सीख मिलती है?
ऐसे सम्मान बताते हैं कि आज की गन्ना खेती में सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीका भी जरूरी है। संस्थान ने साफ कहा है कि सम्मान उन किसानों को दिया जा रहा है जिन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक जल प्रबंधन और उन्नत किस्मों को अपनाया है। अगर आप भी अपनी पैदावार बढ़ाना चाहते हैं, तो इन बातों पर ध्यान दें:
- उन्नत किस्मों का चयन: प्रमाणित नर्सरी या सरकारी केंद्र से ही बीज लें। किस्म का चुनाव पैदावार का सबसे बड़ा कारक होता है।
- जल प्रबंधन: जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें। फालतू पानी न सिर्फ लागत बढ़ाता है, बल्कि गन्ने की चीनी मात्रा (रिकवरी) को भी घटाता है। पेराई सीजन से पहले सिंचाई का सही समय जानने के लिए हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें: गन्ना पेराई से पहले आखिरी सिंचाई कब रोकें
- संतुलित उर्वरक: मिट्टी परीक्षण करवाकर ही उर्वरक डालें। अंधाधुंध खाद से लागत बढ़ती है और खेत की सेहत बिगड़ती है।
- रोग और कीट प्रबंधन: समय पर रोग की पहचान और उपचार से बड़ी हानि से बचा जा सकता है।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: खेती की लागत कम करने के लिए अनुदान और ऋण की योजनाओं की जानकारी रखें: गन्ना किसानों के लिए 7 सरकारी योजनाएं — अनुदान, लोन और सब्सिडी की पूरी जानकारी
लखीमपुर खीरी के किसानों के लिए गौरव का दिन
लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के उन जिलों में है, जहां गन्ना सिर्फ फसल नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन है। जिले में चीनी मिलों का बड़ा नेटवर्क है और लाखों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गन्ने से जुड़े हैं। ऐसे जिले के किसान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलना, पूरे जिले की पहचान को ऊंचा करता है।
इस सम्मान का एक बड़ा असर यह भी होगा कि युवा किसान गन्ना खेती को गंभीरता से लेंगे। अक्सर युवा पीढ़ी खेती से दूर होती है, लेकिन जब एक किसान को राज्यपाल के हाथों सम्मान मिलता है, तो यह संदेश जाता है कि खेती भी प्रतिष्ठा और पहचान का क्षेत्र हो सकता है — बशर्ते उसे वैज्ञानिक तरीके और समर्पण से किया जाए।
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: अचल मिश्रा को सम्मान कहां और कब मिलेगा? उत्तर: आज 15 अक्टूबर को कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के 91वें स्थापना दिवस समारोह में। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शर्करा सौध में होगा और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल खुद पुरस्कार प्रदान करेंगी।
प्रश्न: यह सम्मान क्यों दिया जा रहा है? उत्तर: गन्ने की खेती में उत्कृष्ट योगदान और कृषि के प्रति समर्पण के लिए। संस्थान वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक जल प्रबंधन और उन्नत किस्मों से उल्लेखनीय पैदावार हासिल करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कर रहा है।
प्रश्न: समारोह में और कौन-कौन शामिल होंगे? उत्तर: गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि होंगे। इसके अलावा संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
प्रश्न: राष्ट्रीय शर्करा संस्थान क्या है? उत्तर: यह 1936 में स्थापित देश का प्रमुख चीनी तकनीकी संस्थान है, जो चीनी, एथेनॉल, सह-उत्पादों और जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करता है और अनुसंधान करता है। 1963 से यह कानपुर के कल्याणपुर में 525 एकड़ के परिसर में है।
प्रश्न: समारोह में संगोष्ठी किस विषय पर होगी? उत्तर: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चार्टर 2.0 के तहत जल संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी, जिसमें चीनी और आसवनी उद्योगों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
स्रोत: जागरण (लखीमपुर संस्करण), लाइव हिंदुस्तान, न्यूज़ आउटलुक — 13–15 अक्टूबर 2026 के प्रकाशित समाचार।
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