दीपावली से पहले ₹100 करोड़ तुरंत दो: गोला में बजाज मिल के खिलाफ किसानों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह, ₹600 भाव की मांग

लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में गन्ना किसानों का धैर्य अब टूट गया है। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के बकाया गन्ना भुगतान समेत चार मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया है। संगठन की दो बड़ी मांगें हैं — बकाया भुगतान में से ₹100 करोड़ रुपये तुरंत दिए जाएं और बाकी रकम दीपावली से पहले किसानों के खातों में पहुंचे। साथ ही गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग भी धरने के एजेंडे में शामिल है। (अमर उजाला, 16 अक्टूबर 2026)
यह धरना ऐसे समय शुरू हुआ है जब नया पेराई सत्र दरवाजे पर खड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, लेकिन संगठन का कहना है कि पिछले सत्र का करोड़ों रुपये का भुगतान अभी तक बकाया है। किसानों की चेतावनी सीधी है — मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना खत्म नहीं होगा।
धरने पर क्या-क्या हुआ: मिल के दोनों प्रबंधक पहुंचे
सत्याग्रह शुरू होने के बाद बजाज मिल प्रबंधन की ओर से गन्ना प्रबंधक पीएस चतुर्वेदी और कारखाना प्रबंधक अजीत तिवारी धरना स्थल पर पहुंचे। किसानों ने उनके सामने साफ शर्त रखी — बकाया भुगतान का आधा हिस्सा, यानी ₹100 करोड़ रुपये तत्काल दिया जाए और शेष राशि दीपावली से पहले अदा की जाए। (अमर उजाला, 16 अक्टूबर 2026)
धरने की अगुवाई संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा कर रहे हैं। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष शिवदयाल वर्मा, संतोष सिंह भदौरिया, डेलीगेट अनिल कुमार, राधेश्याम, राजेश कुमार और जगदीश प्रसाद समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने कहा कि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन पिछले सत्र का करोड़ों रुपये का भुगतान अब तक बकाया है। संगठन का यह भी कहना है कि गन्ना भुगतान पर ब्याज देने के पुराने आदेशों के बावजूद मिलों ने ब्याज नहीं दिया — यह बात संगठन अपने ज्ञापन में भी उठा रहा है।
चार मांगें: भुगतान से लेकर छुट्टा पशुओं तक
इस सत्याग्रह में किसानों ने सिर्फ बकाया भुगतान ही नहीं, खेती से जुड़ी रोजमर्रा की परेशानियां भी एजेंडे में रखी हैं। चारों मांगें इस प्रकार हैं:
1. बकाया गन्ना भुगतान तुरंत हो — बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड पर पिछले सत्र का करोड़ों रुपये बकाया है। किसानों की मांग है कि ₹100 करोड़ तुरंत और बाकी रकम दीपावली से पहले दी जाए।
2. गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल — संगठन चाहता है कि आगामी सत्र के लिए गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल घोषित हो, ताकि बढ़ती लागत के बीच किसान को उचित दाम मिल सके।
3. बाढ़ और अतिवृष्टि का मुआवजा — इस बार बाढ़ और ज्यादा बारिश से जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाए।
4. जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से सुरक्षा — बाघ, तेंदुआ, हाथी, सुअर और छुट्टा पशुओं से किसानों और फसलों की सुरक्षा की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। तराई क्षेत्र के किसानों के लिए यह रोज की परेशानी है।
पृष्ठभूमि: सितंबर में हंगामा, 15 अक्टूबर की डेडलाइन बीत गई
यह सत्याग्रह अचानक नहीं शुरू हुआ है। इसकी जड़ें सितंबर में हुई सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की बैठक में हैं, जहां बकाया भुगतान को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। उस बैठक में किसानों और डेलीगेटों ने आरोप लगाया था कि बैठक के एजेंडे में भुगतान जैसे सबसे अहम मुद्दे को शामिल ही नहीं किया गया था। (द दस्तक 24)
बैठक से पहले ही डेलीगेट अनिल कुमार, जगदीश प्रसाद, विनोद कुमार, भूपराम और प्रेम सागर ने सचिव बलवंत चौधरी को लिखित प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें कहा गया था कि 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान कराया जाए, और भुगतान न होने पर आगामी पेराई सत्र शुरू करने की अनुमति न देने का प्रस्ताव पारित किया जाए। बैठक में गोला विधायक अमन गिरि भी मौजूद थे।
उस समय पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने चेतावनी दी थी कि बिना बकाया भुगतान किए और आगामी सत्र के गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का शपथपत्र दिए बिना मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा। अब 15 अक्टूबर की समय-सीमा बीत चुकी है और भुगतान नहीं हुआ, तो संगठन ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह का रास्ता चुना है।
बजाज मिल पर पहले भी उठे हैं सवाल
गौरतलब है कि बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड की मिलों पर भुगतान को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। किसानों का तर्क है कि जब मिल नया पेराई सत्र शुरू करने की तैयारी कर रही है, तो पुराने सत्र का भुगतान पहले साफ होना चाहिए।
किसानों के लिए क्या अहम है
अगर आप लखीमपुर खीरी या आसपास के गन्ना किसान हैं, तो इन बातों पर नजर रखें:
- भुगतान की स्थिति: अपनी गन्ना समिति और ई-गन्ना पोर्टल पर बकाया भुगतान की स्थिति नियमित जांचते रहें। धरने के बाद भुगतान की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।
- ब्याज का दावा: संगठन ब्याज सहित भुगतान की मांग कर रहा है। अपने बकाये का हिसाब-किताब लिखित में रखें — कितने क्विंटल गन्ना, किस तारीख को आपूर्ति, कितना भुगतान मिला।
- फसल नुकसान की सूचना: बाढ़ या अतिवृष्टि से नुकसान हुआ है तो कृषि विभाग और गन्ना समिति में सूचना दर्ज कराएं, ताकि मुआवजे की सूची में नाम छूटे नहीं।
- पेराई सत्र की तैयारी: धरने के बावजूद पेराई सत्र की तैयारियां चल रही हैं। अपनी पर्ची और सट्टा-आंकड़े पहले से जांच लें।
आगे क्या: दीपावली तक की समय-सीमा
किसानों ने शेष भुगतान के लिए दीपावली तक की समय-सीमा दी है। अब देखना होगा कि मिल प्रबंधन और जिला प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाते हैं। संगठन ने साफ कहा है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो सत्याग्रह जारी रहेगा — यानी पेराई सत्र की शुरुआत के ठीक पहले यह मुद्दा और गरमा सकता है।
गोला की यह लड़ाई सिर्फ एक मिल की नहीं है। प्रदेश की कई मिलों पर बकाया भुगतान का मुद्दा लंबित है, और दीपावली से पहले भुगतान की मांग अब कई जिलों में उठ रही है। गोला के सत्याग्रह का नतीजा दूसरे जिलों के किसानों के लिए भी संकेत होगा।
स्रोत: अमर उजाला (16 अक्टूबर 2026), द दस्तक 24।
पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल: गोला में सत्याग्रह क्यों शुरू हुआ है? जवाब: राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के बकाया गन्ना भुगतान समेत चार मांगों को लेकर गोला गोकर्णनाथ में सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया है। सितंबर में दी गई 15 अक्टूबर की समय-सीमा बीतने के बाद यह कदम उठाया गया है।
सवाल: किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं? जवाब: ₹100 करोड़ का तत्काल भुगतान और शेष रकम दीपावली से पहले, गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल, बाढ़-अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को मुआवजा, और जंगली जानवरों व छुट्टा पशुओं से फसलों की सुरक्षा।
सवाल: मिल प्रबंधन की ओर से कौन धरने पर आया? जवाब: बजाज मिल के गन्ना प्रबंधक पीएस चतुर्वेदी और कारखाना प्रबंधक अजीत तिवारी धरना स्थल पर पहुंचे थे, जहां किसानों ने उनके सामने ₹100 करोड़ तत्काल भुगतान की मांग रखी।
सवाल: क्या यह धरना पेराई सत्र को प्रभावित करेगा? जवाब: संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो सत्याग्रह जारी रहेगा। पेराई सत्र 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


