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बिना भुगतान नहीं घूमेगा चक्का! गोला में बजाज मिल के बकाया भुगतान पर किसानों ने दिया 15 अक्टूबर का अल्टीमेटम

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 27, 2026 • 6 min read
बिना भुगतान नहीं घूमेगा चक्का! गोला में बजाज मिल के बकाया भुगतान पर किसानों ने दिया 15 अक्टूबर का अल्टीमेटम
अंतिम अपडेट: September 27, 2026 6:51 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

🚨 ब्रेकिंग: लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय बैठक में बकाया भुगतान को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान मांगा और चेतावनी दी कि भुगतान न हुआ तो आगामी पेराई सत्र शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

यह बैठक रविवार को हुई, जिसमें किसानों और समिति के डेलीगेटों ने आरोप लगाया कि भुगतान का मुद्दा एजेंडे में शामिल ही नहीं किया गया था। बैठक में बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक के मौजूद होने के बाद भी किसानों के सवालों का जवाब नहीं मिला, जिसके बाद किसान नेताओं की विधायक से बहस भी हो गई।

बैठक में क्या हुआ — एजेंडे से गायब रहा सबसे बड़ा मुद्दा

गोला गोकर्णनाथ की सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की बैठक रविवार को समिति अध्यक्ष बीना सिंह की अध्यक्षता में हुई। संचालन सचिव बलवंत चौधरी ने किया। बैठक शुरू होने से पहले ही माहौल गरमा गया, जब डेलीगेट अनिल कुमार, जगदीश प्रसाद, विनोद कुमार, भूपराम और प्रेम सागर ने सचिव बलवंत चौधरी को एक लिखित प्रस्ताव सौंपा। प्रस्ताव में कहा गया कि बजाज चीनी मिल से गन्ना भुगतान के लिए किसान लगातार परेशान हैं, फिर भी भुगतान का विषय एजेंडे में नहीं रखा गया। डेलीगेटों ने मांग की कि 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत भुगतान का प्रस्ताव पारित हो और भुगतान न होने पर पेराई सत्र रोकने के प्रस्ताव की प्रति गन्ना आयुक्त को भेजी जाए।

15 अक्टूबर का अल्टीमेटम — “बिना भुगतान नहीं घूमेगा चक्का”

राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने किसानों का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने खुद सचिव को पत्र लिखकर भुगतान पर देय ब्याज का हिसाब मांगा था, इसके बावजूद बैठक के एजेंडे में विषय न रखना किसानों के साथ अन्याय है।

श्रीकृष्ण वर्मा ने दो टूक कहा कि बकाया भुगतान किए बिना और आगामी सत्र के गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का शपथपत्र दिए बिना मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा — “अब किसानों को सिर्फ आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए।”

संगठन के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने मांग रखी कि बजाज चीनी मिल पहले पिछले पेराई सत्र का भुगतान करे, तभी मिल संचालन शुरू हो। उन्होंने बताया कि भारी बारिश और तेज हवाओं से गन्ना और धान की फसल खेतों में गिर गई है, ऐसे समय में किसानों को फसल संभालने के लिए नकद पैसों की सख्त जरूरत है।

भुगतान के मुद्दे पर विधायक से हुई बहस

बैठक में उस समय बहस तीखी हो गई, जब बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक के मंच पर मौजूद होने के बावजूद श्रीकृष्ण वर्मा ने भुगतान को लेकर सवाल उठाए। इसी बात को लेकर उनकी विधायक अमन गिरि से बहस हो गई।

विधायक अमन गिरि ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन किसानों का कहना है कि बैठकों में दिए गए आश्वासनों का भुगतान में तब्दील होना अब तक दिखाई नहीं दिया है।

पृष्ठभूमि: अगस्त से ही गरमा रहा है ब्याज का मुद्दा

यह हंगामा अचानक नहीं हुआ है। अगस्त 2026 में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष अंजनी कुमार दीक्षित ने जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के सामने 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की थी, ताकि प्रत्येक किसान के भुगतान में हुई देरी पर बने ब्याज का अलग-अलग हिसाब मांगा जा सके। पलिया गन्ना समिति परिसर में संगठन के कार्यकर्ता 20 अगस्त से ही धरने पर थे।

किसान संगठनों का आरोप है कि जिले की मिलों पर वर्षों से ब्याज की रकम बकाया है और इसमें सबसे बड़ी रकम बजाज ग्रुप की मिलों के खिलाफ बनती है। किसान नेता यह भी मांग कर चुके हैं कि मिलों के चालू होने से पहले सरकार गन्ने का मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करे, क्योंकि चीनी के भाव ऊंचे चल रहे हैं।

वादा था सितंबर तक पूर्ण भुगतान का — अब महीना खत्म होने को है

इस साल मई में उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने खुद गोला में आश्वासन दिया था कि सीजन का सारा बकाया गन्ना भुगतान सितंबर तक निपटा दिया जाएगा। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया था कि गोला और कुछ अन्य क्षेत्रों से भुगतान की शिकायतें मिल रही हैं।

अब सितंबर खत्म होने को है और किसान समिति की बैठक में 15 अक्टूबर की नई डेडलाइन मांग रहे हैं। किसानों का सवाल है कि अगर आश्वासन पर भुगतान होना होता, तो उन्हें बैठक में हंगामा क्यों करना पड़ता।

डेडलाइन क्यों मायने रखती है — पेराई सत्र सिर पर

यह टकराव इसलिए और गंभीर है क्योंकि नया पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है। जिले की सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां ने 15 नवंबर 2026 से पेराई शुरू करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें करीब 70 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य है। किसानों की चेतावनी साफ है — पहले बकाया और ब्याज का हिसाब, तभी मिल चलेगी। अगर 15 अक्टूबर की डेडलाइन को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो सीजन की शुरुआत में ही टकराव बनेगा, जिसका असर हजारों किसानों की पर्ची और आपूर्ति पर पड़ेगा।

ब्याज का नियम — हर किसान को यह जानना चाहिए

चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। इससे ज्यादा देरी पर बकाया रकम पर किसान को ब्याज पाने का हक बनता है। यही वजह है कि किसान संगठन सिर्फ मूल भुगतान नहीं, बल्कि ब्याज का हिसाब भी मांग रहे हैं। किसान अपनी पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान की रसीदें संभाल कर रखें — ब्याज का दावा इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर बनता है।

किसानों के लिए आगे की राह

  • गन्ना समिति की सट्टा प्रदर्शन बैठकों में अपने भुगतान का रिकॉर्ड जरूर जांचें।
  • देरी से हुए भुगतान की तारीखें नोट करके रखें — ब्याज के दावे में काम आएंगी।
  • शिकायत के लिए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
  • समिति की आगामी बैठकों में भुगतान का मुद्दा एजेंडे में शामिल कराने की मांग जारी रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोला गोकर्णनाथ की बैठक में क्या मांग रखी गई?

किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान मांगा और चेतावनी दी कि भुगतान न होने पर आगामी पेराई सत्र शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

बैठक में हंगामा क्यों हुआ?

किसानों और डेलीगेटों का आरोप है कि भुगतान का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं था, जबकि यही सबसे अहम विषय था। इसी को लेकर बहस हुई।

विधायक से बहस किस मुद्दे पर हुई?

राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने बजाज मिल के गन्ना महाप्रबंधक के मौजूद होने के बावजूद जवाब न मिलने पर सवाल उठाए, जिस पर उनकी विधायक अमन गिरि से बहस हो गई।

किसानों ने मिल संचालन को लेकर क्या कहा?

किसान नेताओं ने कहा कि बकाया भुगतान किए बिना और नए सत्र के गन्ने का 14 दिन में भुगतान का शपथपत्र दिए बिना मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा।

सरकार ने भुगतान को लेकर क्या आश्वासन दिया था?

मई 2026 में गन्ना विकास मंत्री ने गोला में कहा था कि सीजन का सारा बकाया भुगतान सितंबर तक निपटा दिया जाएगा। किसान अब उसी वादे का हिसाब मांग रहे हैं।

स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (27 सितंबर 2026, 26 अगस्त 2026); चिनीमंडी (27 अगस्त 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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