लखीमपुर गोला में 4 दिन का किसान सत्याग्रह खत्म: बजाज मिल दीपावली से पहले देगी 15 करोड़, 216 करोड़ बकाया पर विधायकों ने CM योगी से ये कहा

लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में गन्ना किसानों का चार दिवसीय सत्याग्रह समाप्त हो गया है। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने भाजपा के पलिया विधायक रोमी साहनी और गोला विधायक अमन गिरि के आश्वासन पर धरना खत्म किया। 18 अक्टूबर को दोनों विधायक सहकारी गन्ना विकास समिति कार्यालय पहुंचे, जहां संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। बजाज चीनी मिल के अधिकारियों ने विधायकों के सामने बैंक खुलते ही किसानों के खातों में 10 करोड़ रुपये उसी दिन और दीपावली से पहले 5 करोड़ रुपये और देने का वचन दिया। (अमर उजाला, 18 अक्टूबर 2026; लाइव हिंदुस्तान, 19 अक्टूबर 2026)
सत्याग्रह समाप्त होने के साथ ही दीपावली से ठीक पहले गोला क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद बंधी है। लेकिन सवाल बना हुआ है कि 216 करोड़ रुपये के कुल बकाए में से केवल 15 करोड़ मिलने के बाद बाकी रकम का क्या होगा — क्योंकि संगठन का कहना है कि मिल के पास बेचने लायक केवल 18 करोड़ रुपये की चीनी ही बची है।
विधायकों के सामने क्या-क्या तय हुआ
धरना स्थल पर दोनों विधायकों की मौजूदगी में कई ठोस बातें तय हुईं:
1. बैंक खुलते ही 10 करोड़: बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक पीएस चतुर्वेदी ने वचन दिया कि बैंक खुलने पर किसानों के खातों में उसी दिन 10 करोड़ रुपये और दीपावली से पहले 5 करोड़ रुपये और दिए जाएंगे। कारखाना प्रबंधक अजीत तिवारी भी मौजूद थे।
2. मुख्यमंत्री को ज्ञापन: संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने दोनों विधायकों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपे। विधायकों ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा और आगामी पेराई सत्र से गन्ना भुगतान 14 दिन के भीतर सुनिश्चित कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
3. सीएम और कुशाग्र बजाज से बात: विधायकों ने भुगतान न होने पर नाराजगी जताई और कहा कि वे मुख्यमंत्री और बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड के चेयरमैन कुशाग्र बजाज से सीधे बात करेंगे, ताकि अगले सत्र से 14 दिन में गन्ना भुगतान हो सके।
4. 216 करोड़ बकाया, सिर्फ 18 करोड़ का स्टॉक: संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने विधायकों के सामने कहा कि किसानों का 216 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि मिल के पास केवल 18 करोड़ रुपये की चीनी बची है। शेष चीनी, एथेनॉल, शीरा, प्रेस मड और बैगास आदि की बिक्री हो चुकी है।
1978 करोड़ की मांग: प्रोत्साहन नीति-2004 का पैसा सीधे किसानों के खाते में
सत्याग्रह समाप्ति पर मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापनों में एक बड़ी वित्तीय मांग भी है। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट (प्रयागराज) के आदेशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग प्रोत्साहन नीति-2004 के तहत बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड को राज्य सरकार से ब्याज सहित 1978 करोड़ रुपये मिलने हैं।
किसानों की मांग है कि यह 1978 करोड़ रुपये कंपनी को देने के बजाय उसकी 14 चीनी मिलों के गन्ना किसानों के एस्क्रो खातों में भेजे जाएं, और सरकार कंपनी को बैंकों से कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट बनवाने का निर्देश दे — ताकि पुराना बकाया भी चुक जाए और आगामी सत्र का भुगतान 14 दिन में हो सके। (अमर उजाला; लाइव हिंदुस्तान)
पृष्ठभूमि: ₹100 करोड़ तुरंत की मांग पर शुरू हुआ था धरना
यह सत्याग्रह गन्ना किसानों के धैर्य टूटने के बाद शुरू हुआ था। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने चार मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया था:
- बकाया भुगतान में से ₹100 करोड़ रुपये तुरंत और शेष दीपावली से पहले
- गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए
- बाढ़ और अतिवृष्टि से खराब फसल का मुआवजा
- जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसलों और किसानों की सुरक्षा
अब चार दिवसीय सत्याग्रह समाप्त हुआ है, लेकिन संगठन की नजर बैंक खुलने के बाद मिलने वाले 10 करोड़ रुपये और दीपावली से पहले के 5 करोड़ रुपये पर रहेगी।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम
पेराई सत्र दरवाजे पर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। पुराना बकाया न चुकने का मतलब है कि किसान बिना पैसों के ही नई पेराई में गन्ना देने पर मजबूर होंगे।
14 दिन का नियम फिर चर्चा में: गन्ना कानून के अनुसार, गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है और देरी पर ब्याज मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में राज्य सरकार की चुनौती खारिज करते हुए 15 प्रतिशत ब्याज के प्रावधान को किसानों की अनिवार्य सुरक्षा बताया। (चिनीमंडी, अक्टूबर 2026)
दीपावली से पहले का भरोसा: दीपावली के खर्च के लिए किसानों के पास पैसा होना जरूरी है। 10 करोड़ और 5 करोड़ का वादा समय पर पूरा हुआ तो गोला क्षेत्र के हजारों किसान परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
आगे क्या: दीपावली तक की परीक्षा
सत्याग्रह समाप्त हुआ, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू हुई है। पहला मील का पत्थर बैंक खुलने पर 10 करोड़ रुपये और दूसरा दीपावली से पहले 5 करोड़ रुपये का भुगतान होगा। वादा टूटा तो संगठन फिर से धरने पर बैठने की चेतावनी पहले ही दे चुका है।
किसान संगठन की बड़ी मांग — 1978 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के एस्क्रो खातों में — अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाई जाएगी। यह मांग सिर्फ गोला तक सीमित नहीं है, बल्कि बजाज समूह की 14 चीनी मिलों के लाखों किसानों को प्रभावित कर सकती है।
गन्ना किसानों को सलाह है कि बकाए की स्थिति ई-गन्ना पोर्टल पर नियमित जांचें और देरी पर जिला गन्ना अधिकारी या टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।
आपके सवाल
सत्याग्रह क्यों समाप्त हुआ? भाजपा के पलिया विधायक रोमी साहनी और गोला विधायक अमन गिरि ने 18 अक्टूबर को धरना स्थल पर पहुंचकर आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन पहुंचाया जाएगा और आगामी पेराई सत्र से 14 दिन में गन्ना भुगतान का प्रयास होगा। (अमर उजाला; लाइव हिंदुस्तान)
बजाज मिल ने कितने भुगतान का वादा किया है? मिल के गन्ना महाप्रबंधक ने बैंक खुलते ही किसानों के खातों में उसी दिन 10 करोड़ रुपये और दीपावली से पहले 5 करोड़ रुपये देने का वचन दिया है — यानी दीपावली से पहले कुल 15 करोड़ रुपये। (अमर उजाला; लाइव हिंदुस्तान)
किसानों का कुल कितना बकाया है? संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, किसानों का 216 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि मिल के पास केवल 18 करोड़ रुपये की चीनी बची है। (अमर उजाला; लाइव हिंदुस्तान)
1978 करोड़ रुपये की मांग क्या है? संगठन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के तहत उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग प्रोत्साहन नीति-2004 से बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड को ब्याज सहित 1978 करोड़ रुपये मिलने हैं। किसान चाहते हैं कि यह राशि कंपनी की बजाय उसकी 14 चीनी मिलों के किसानों के एस्क्रो खातों में जाए। (अमर उजाला; लाइव हिंदुस्तान)
14 दिन में भुगतान का नियम क्या है? गन्ना कानून के तहत गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है और देरी पर ब्याज मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2026 में 15 प्रतिशत ब्याज के प्रावधान को किसानों की अनिवार्य सुरक्षा बताया। (चिनीमंडी)
भुगतान न मिले तो किसान कहां शिकायत करें? गन्ना किसान ई-गन्ना पोर्टल पर बकाए की स्थिति जांच सकते हैं और देरी पर जिला गन्ना अधिकारी या टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला (18 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (19 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (अक्टूबर 2026)
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