होम › लखीमपुर खीरी में पहली बार आएगी ₹1 करोड़ …

लखीमपुर खीरी में पहली बार आएगी ₹1 करोड़ की केन हार्वेस्टर मशीन, सूखी पत्तियों के लिए मल्चर भी — मजदूरों की कमी से मिलेगी राहत

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 25, 2026 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
लखीमपुर खीरी में पहली बार आएगी ₹1 करोड़ की केन हार्वेस्टर मशीन, सूखी पत्तियों के लिए मल्चर भी — मजदूरों की कमी से मिलेगी राहत
अंतिम अपडेट: October 25, 2026 11:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखीमपुर खीरी के गन्ना किसानों के लिए इस पेराई सत्र में बड़ी राहत की खबर आई है। जिले में पहली बार केन हार्वेस्टर मशीन आने जा रही है, जिससे गन्ने की कटाई तेज होगी और मजदूरों की कमी से जूझ रहे किसानों को सीधी मदद मिलेगी। कृषि विभाग के मुताबिक, इस मशीन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है, इसलिए किसानों को यह मशीन अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इसी के साथ कटाई के बाद बची सूखी पत्तियों के प्रबंधन के लिए मल्चर के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान पत्तियां जलाने के बजाय उन्हें खेत में ही खाद में बदल सकें।

लखीमपुर खीरी में हजारों किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं, और पेराई सत्र में कटाई-छिलाई का काम सबसे ज्यादा मजदूर मांगता है।

पहली बार जिले में आएगी केन हार्वेस्टर मशीन

न्यूज18 की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लखीमपुर खीरी में गन्ने की कटाई के लिए पहली बार केन हार्वेस्टर मशीन आने जा रही है। कृषि उपनिदेशक गिरीश चंद्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मशीन से कटाई का काम आसान होगा और मजदूरों की कमी से किसानों को राहत मिल सकती है। जिले में इस तरह की मशीन पहले कभी नहीं आई, इसलिए स्थानीय किसानों को पहली बार आधुनिक कटाई तकनीक का सीधा लाभ मिलने जा रहा है।

मशीन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है, इसलिए कोई अकेला छोटा किसान इसे नहीं खरीद सकता और विभाग की योजना इसे अनुदान पर उपलब्ध कराने की है। हालांकि रिपोर्ट में मशीन के मॉडल, अनुदान की प्रतिशत दर और जिले में पहुंचने की सटीक तारीख का उल्लेख नहीं है। इसलिए किसानों को सलाह है कि वे अनुदान और उपलब्धता की पक्की जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय से सीधे संपर्क करें।

मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी

गन्ने की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक काफी मेहनत लगती है। फसल तैयार होने के बाद कटाई, पत्तियों की सफाई और छिलाई में बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है। कई बार समय पर मजदूर नहीं मिलते, जिससे कटाई लटक जाती है और मिल के कैलेंडर के हिसाब से गन्ना पहुंचाने में देरी होती है। ऊपर से मजदूरी की बढ़ती लागत खेती के खर्च को भी बढ़ा रही है।

केन हार्वेस्टर इसी समस्या का हल बन सकता है। मशीन से कटाई और उससे जुड़े काम व्यवस्थित तरीके से होंगे, मजदूरों पर निर्भरता घटेगी और समय पर खेत खाली होने से अगली फसल की तैयारी में आसानी होगी। खासकर बड़े रकबे वाले किसानों के लिए यह राहत बड़ी होगी, जिन्हें हर सत्र में दर्जनों मजदूर जुटाने पड़ते हैं।

मशीन कैसे काम करती है

केन हार्वेस्टर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जिसका उपयोग गन्ने की कटाई के लिए किया जाता है। मशीन के डिजाइन और मॉडल के अनुसार यह गन्ने को काटने, पत्तियों को अलग करने और कटे हुए गन्ने को एकत्र करने जैसे कार्य करती है। इससे खेत में हाथ से किए जाने वाले कुछ कामों की जरूरत कम हो सकती है।

सूखी पत्तियों के लिए मल्चर का रास्ता

कटाई के बाद खेत में सूखी पत्तियां बच जाती हैं, और अगली फसल के लिए खेत साफ करना जरूरी होता है। इसी समस्या को लेकर लखीमपुर खीरी में कृषि विभाग किसानों को मल्चर के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग का कहना है कि सूखी पत्तियों को जलाने के बजाय मल्चर से प्रबंधित किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण कम हो और मिट्टी की सेहत सुधरे।

मल्चर सूखी पत्तियों को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में ही फैला देता है। नमी और अनुकूल परिस्थितियों में ये टुकड़े धीरे-धीरे सड़कर जैविक पदार्थ में बदल जाते हैं, जिससे मिट्टी की संरचना सुधरती है और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके विश्वकर्मा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि किसान अक्सर खेत जल्दी साफ करने के लिए अवशेष जला देते हैं, लेकिन आधुनिक मशीनों से इन्हें खेत में ही उपयोगी बनाया जा सकता है।

पत्तियां जलाने से नुकसान और जुर्माने का खतरा

अवशेष जलाने से धुआं और प्रदूषक फैलते हैं, मिट्टी की ऊपरी परत के लाभदायक जीवों को नुकसान पहुंचता है और अवशेषों में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। यानी खेत जल्दी साफ करने का छोटा फायदा मिलता है, लेकिन मिट्टी की उर्वरता का लंबा नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा अवशेष जलाने पर जुर्माने का भी खतरा रहता है।

अमर उजाला की इटावा की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वहां पराली जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि के लिए पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक दस हजार और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर तीस हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जा सकती है। यह आंकड़ा इटावा की रिपोर्ट का है, लेकिन इससे साफ है कि प्रदेश भर में अवशेष जलाने को लेकर प्रशासन गंभीर है।

यंत्रों पर अनुदान और आवेदन

फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्रों पर अनुदान प्रदेश सरकार की योजना के तहत चल रहा है। दैनिक जागरण की मथुरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रा चापर, श्रेडर, मल्चर और बेलर जैसे यंत्र शामिल हैं। उसी रिपोर्ट की सूची के अनुसार, स्ट्रा चापर-मल्चर पर 72,500 रुपये का अनुदान बताया गया है। यह आंकड़ा उस रिपोर्ट की सूची का है, इसलिए लखीमपुर खीरी के किसान अपने जिले में उपलब्धता और मौजूदा अनुदान राशि की पुष्टि जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से जरूर कर लें।

जागरण के अनुसार, अनुदान के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल पर किसान कॉर्नर में यंत्र बुकिंग का विकल्प मिलता है। आवेदन से पहले पात्रता और दस्तावेज जांच लें।

किसान अभी ये काम कर लें

कटाई की तारीख और मिल के कैलेंडर का मिलान कर लें, जिला कृषि कार्यालय से हार्वेस्टर की उपलब्धता और अनुदान की लिखित जानकारी लें, और मल्चर की जरूरत हो तो किराए की मशीन पहले से बुक कर लें। पत्तियां न जलाएं, और यंत्र लेने से पहले उसका मॉडल व क्षमता जांच लें।

आपके सवाल

लखीमपुर खीरी में केन हार्वेस्टर मशीन कब आएगी? न्यूज18 की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मशीन आने जा रही है, पर सटीक तारीख रिपोर्ट में नहीं है। जिला कृषि विभाग से संपर्क करें।

केन हार्वेस्टर मशीन की कीमत कितनी है? रिपोर्ट के अनुसार, मशीन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है। इसी वजह से किसानों को इसे अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना है।

मल्चर से सूखी पत्तियों का क्या फायदा है? मल्चर पत्तियों को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैला देता है। ये टुकड़े सड़कर जैविक पदार्थ बन जाते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और पत्तियां जलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

पत्तियां जलाने पर जुर्माना कितना लग सकता है? इटावा की रिपोर्ट के अनुसार, दो एकड़ से कम पर पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक दस हजार और पांच एकड़ से अधिक पर तीस हजार रुपये तक क्षतिपूर्ति वसूली जा सकती है।

यंत्रों पर अनुदान के लिए कहां आवेदन करें? उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर किसान कॉर्नर में यंत्र बुकिंग का विकल्प मिलता है। आवेदन से पहले पात्रता, दस्तावेज और अपने जिले में यंत्र की उपलब्धता जरूर जांच लें।

स्रोत: न्यूज18 हिंदी (22 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी, दैनिक जागरण, अमर उजाला।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में