लखीमपुर खीरी में 30 साल के बकाया गन्ना भुगतान ब्याज पर बड़ा आंदोलन, हाईकोर्ट के आदेश के बाद RKMS का अनिश्चितकालीन धरना

लखीमपुर खीरी में 30 साल के बकाया गन्ना भुगतान ब्याज पर बड़ा आंदोलन, हाईकोर्ट के आदेश के बाद RKMS का अनिश्चितकालीन धरना
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Aamir Raza - 2026-08-30
लखीमपुर खीरी/लखनऊ (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले लखीमपुर खीरी में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन (आरकेएमएस) के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि चीनी मिलों ने बीते तीन दशकों में गन्ने का भुगतान महीनों की देरी से किया, लेकिन कानून सम्मत 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दबाकर बैठ गईं।
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता सरदार वी.एम. सिंह ने 16 जुलाई 2026 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में हुई ऐतिहासिक सुनवाई का विस्तृत ब्योरा दिया।
सिंह ने कहा, “न्यायालय ने गन्ना आयुक्त को वर्ष 1996-97 से 2025-26 तक की अवधि में चीनी मिलों द्वारा किए गए विलंबित भुगतान पर देय 15 प्रतिशत ब्याज की गणना करने और किसानों को भुगतान सुनिश्चित कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। जब किसान बैंक या समिति से खाद-बीज का कर्ज लेता है, तो एक दिन की देरी होने पर भी बैंक चक्रवृद्धि ब्याज और पेनाल्टी वसूलता है। ऐसे में चीनी मिलों द्वारा भुगतान में महीनों की देरी पर किसानों का ब्याज किसी भी हाल में माफ नहीं होना चाहिए।”
600 रुपये प्रति क्विंटल भाव की उठी मांग
धरने के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी दीक्षित ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग रखी।
दीक्षित ने कहा, “वर्तमान में थोक बाजार में चीनी 55 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रही है। एक क्विंटल गन्ने से 11 किलो चीनी, 4.5 किलो शीरा, एथेनॉल और बिजली तैयार होती है। मिलें इन सह-उत्पादों से भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि किसानों की खेती की लागत डीजल, खाद, कीटनाशक और मजदूरी बढ़ने से दोगुनी हो चुकी है। इसलिए 600 रुपये का भाव पूरी तरह न्यायसंगत है।”
| कालखंड | प्रमुख प्रभावित जिले | कानूनन देय ब्याज दर | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1996-97 से 2010-11 | लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, पीलीभीत | 15% प्रति वर्ष | अदालत के आदेशानुसार गणना प्रक्रियाधीन |
| 2011-12 से 2020-21 | मुरादाबाद, मेरठ, अमरोहा, शामली | 15% प्रति वर्ष | आरसी और नोटिस जारी |
| 2021-22 से 2025-26 | प्रदेश की समस्त 120 चीनी मिलें | 15% प्रति वर्ष | समितियों में दावे जमा हो रहे हैं |
जिला प्रशासन और चीनी मिल प्रबंधन पर बढ़ा दबाव
धरना स्थल पर मौजूद गोला गोकर्णनाथ, पलिया और खंभारखेड़ा क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उन्होंने पिछले सत्रों के पर्ची चालान और बैंक पासबुक की प्रतियां संलग्न कर व्यक्तिगत क्लेम फॉर्म जिला गन्ना अधिकारी को सौंपे हैं।
किसान प्रतिनिधि रामकुमार वर्मा ने कहा, “हमारे क्षेत्र की मिलों ने तीन-तीन महीने बाद भुगतान किया था। उस समय हमें बच्चों की फीस और खाद के लिए साहूकारों से 24 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा था। अब हमें अपना कानूनी हक चाहिए।”
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से ज्ञापन लेकर शासन स्तर पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान संगठन के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा है कि जब तक ब्याज भुगतान का शासनादेश जारी नहीं होता, धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की चीनी मिलों समेत चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल और अगवानपुर चीनी मिल के किसान भी अपने सट्टे और आपूर्ति के आंकड़े जुटा रहे हैं।
किसान अपना पुराना आपूर्ति रिकॉर्ड और गन्ना भुगतान स्थिति विभागीय पोर्टल enquiry.caneup.in अथवा ई-गन्ना ऐप पर देख सकते हैं। किसी भी विसंगति पर विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 पर संपर्क किया जा सकता है। विस्तृत जानकारी के लिए गन्ना विभाग हेल्पलाइन डायरेक्टरी देखें।
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