लखीमपुर खीरी: गोला गोकर्णनाथ में गन्ना भुगतान पर हंगामा, किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित भुगतान की मांग की — पेराई सत्र रोकने की चेतावनी

🚨 उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ में सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की बैठक में रविवार को बकाया गन्ना भुगतान को लेकर जमकर हंगामा हुआ। किसानों और समिति के डेलीगेटों ने चीनी मिल पर बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। किसानों की मांग है कि 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान कराया जाए, और ऐसा न होने पर आगामी पेराई सत्र शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में क्या हुआ
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, गोला गोकर्णनाथ स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की बैठक में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब किसानों और डेलीगेटों ने गन्ना भुगतान का मुद्दा उठाया। किसानों का आरोप था कि भुगतान के लिए वे लगातार परेशान हो रहे हैं, लेकिन समिति की बैठक के एजेंडे में इस सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे को शामिल ही नहीं किया गया था।
बैठक शुरू होने से पहले ही समिति के डेलीगेट अनिल कुमार, जगदीश प्रसाद, विनोद कुमार, भूपराम और प्रेम सागर ने सचिव बलवंत चौधरी को लिखित प्रस्ताव सौंपा, जिसमें कहा गया कि बजाज चीनी मिल से गन्ना भुगतान के लिए किसान लगातार परेशान हैं।
डेलीगेटों ने मांग की कि 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान कराने और भुगतान न होने पर आगामी पेराई सत्र शुरू करने की अनुमति न देने का प्रस्ताव पारित किया जाए।
किसानों की तीन बड़ी मांगें
राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने बैठक में कहा कि समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने सचिव को पत्र लिखकर गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का हिसाब मांगा था। इसके बावजूद किसानों के भुगतान का विषय बैठक में नहीं रखा गया, जबकि यही किसानों के हित से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा था। बैठक में किसानों ने तीन मुख्य मांगें रखीं:
- 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान — बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान ब्याज के साथ कराया जाए।
- शपथपत्र की मांग — बिना बकाया भुगतान किए और आगामी सत्र के गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का शपथपत्र दिए बिना मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा।
- पिछला सत्र पहले — बजाज चीनी मिल पहले पिछले पेराई सत्र का गन्ना भुगतान करे, उसके बाद ही मिल का संचालन शुरू हो।
विधायक से बहस, अध्यक्ष और सचिव की मौजूदगी
बैठक में बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक के मंच पर मौजूद होने पर भी पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने सवाल उठाए। इस मुद्दे को लेकर उनकी विधायक अमन गिरि से बहस हो गई। विधायक अमन गिरि ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और सहकारी गन्ना विकास समिति किसानों के हित में काम कर रही है।
बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने की, जबकि संचालन सचिव बलवंत चौधरी ने किया।
बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल
संतोष सिंह ने बैठक में बताया कि भारी बारिश और तेज हवाओं से गन्ना और धान की फसल खेतों में गिर गई है। ऐसे समय में किसानों को फसल संभालने के लिए पैसों की जरूरत है, इसलिए गन्ने का भुगतान तत्काल कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान अपने गन्ने का भुगतान पाने के लिए परेशान हैं और अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए।
15 प्रतिशत ब्याज की कानूनी लड़ाई भी जारी
बकाया भुगतान पर ब्याज की मांग को लेकर किसानों की कानूनी लड़ाई भी चल रही है। हिंदुस्तान की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी दीक्षित ने कहा है कि गन्ना किसानों के विलंबित भुगतान पर गन्ना अधिनियम के अनुसार 15 प्रतिशत ब्याज दिलाने की मांग को लेकर लंबे समय से लड़ाई चल रही है।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को गन्ना पेराई सत्र 1996-97 से अब तक किसानों को विलंबित गन्ना भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज दिलाने के संबंध में आदेश पारित किया था। 31 अगस्त की सुनवाई में जिला अधिकारियों को विलंब भुगतान के ब्याज की रिकवरी कर किसानों को दिलाने के निर्देश दिए गए थे, और अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है। किसान नेताओं के मुताबिक किसान वर्षों से कर्ज के बोझ तले दबे हैं, और यदि गन्ने का भुगतान समय से हुआ होता तो उन पर इतना कर्ज नहीं होता।
यूपी में गन्ना भुगतान की स्थिति
चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश सरकार ने बताया था कि 2025-26 पेराई सत्र में गन्ना किसानों के कुल बकाये का 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया था, और किसानों को अब तक 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। इस सत्र में उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों ने मिलकर 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई की थी। सरकार ने इस सत्र में गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी भी की थी, जिसके बाद जल्दी पकने वाली प्रजातियों के लिए SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था।
हालांकि, कई चीनी मिलों पर अभी भी बकाया भुगतान लंबित है। हिंदुस्तान की एक अन्य खबर के अनुसार, सहारनपुर में सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में भी बजाज की गांगनौली चीनी मिल पर करीब 90 करोड़ रुपये से अधिक के गन्ना मूल्य बकाया का मुद्दा उठा था, और नाराज 10 गांवों के किसानों ने लिखित प्रस्ताव देकर उस मिल को गन्ना नहीं देने का ऐलान किया था।
किसानों के लिए क्या जरूरी है
आगामी पेराई सत्र 2026-27 को देखते हुए किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- 30 सितंबर की समय-सीमा — गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है। जो किसान अभी तक समिति के सदस्य नहीं हैं, वे समय रहते आवेदन कर लें।
- सट्टा प्रदर्शन मेलों में रिकॉर्ड जांचें — समितियों में लग रहे सट्टा प्रदर्शन मेलों में अपने गन्ने के रकबे, सट्टे और आपूर्ति रिकॉर्ड की जांच कराकर गलतियों का सुधार करा सकते हैं।
- टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर — भुगतान संबंधी किसी भी समस्या के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 संचालित है।
- ब्याज का हिसाब मांगें — विलंबित भुगतान पर ब्याज का कानूनी अधिकार गन्ना अधिनियम के तहत है। किसान अपनी समिति से देय ब्याज का हिसाब जरूर मांगें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किसानों ने गन्ना भुगतान के लिए कब तक की मांग की?
किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज सहित पूरा भुगतान कराने की मांग की है।
भुगतान न होने पर किसानों ने क्या चेतावनी दी है?
किसानों ने चेतावनी दी है कि बकाया भुगतान किए बिना और आगामी पेराई सत्र के गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का शपथपत्र दिए बिना चीनी मिल का चक्का नहीं घूमने दिया जाएगा।
यह बैठक कहां और कब हुई?
गोला गोकर्णनाथ स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की बैठक रविवार, 27 सितंबर 2026 को हुई थी। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष बीना सिंह ने की और संचालन सचिव बलवंत चौधरी ने किया।
विलंबित गन्ना भुगतान पर कितना ब्याज मिल सकता है?
गन्ना अधिनियम के तहत विलंबित भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज का प्रावधान है। इस मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में 15 अक्टूबर को होनी है।
बकाया भुगतान की शिकायत किसान कहां कर सकते हैं?
किसान टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं। वे अपनी गन्ना समिति और गन्ना आयुक्त को लिखित शिकायत भी दे सकते हैं।
स्रोत: हिंदुस्तान (लखीमपुर खीरी और सहारनपुर रिपोर्ट), चीनीमंडी
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