लखीमपुर खीरी किसान दिवस: डिफाल्टर चीनी मिलों से 15% ब्याज समेत भुगतान की मांग — किसानों का अल्टीमेटम: बकाया नहीं चुकाया तो नए सत्र में नहीं चलने देंगे मिल

लखीमपुर खीरी (CaneUp विशेष ब्यूरो — 16 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश के गन्ना का कटोरा कहे जाने वाले लखीमपुर खीरी जनपद में आगामी पेराई सत्र 2026-27 से ठीक पहले गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर तनाव बढ़ गया है। बुधवार 16 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में आयोजित मासिक ‘किसान दिवस’ में गन्ना किसानों और किसान नेताओं ने जिले की डिफाल्टर चीनी मिलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
किसानों ने जिला प्रशासन के सामने साक्ष्य रखते हुए कहा कि गन्ने की तौल के 14 दिन के अंदर भुगतान करने का वैधानिक कानून है, लेकिन बजाज समूह की मिलें महीनों तक किसानों का अरबों रुपया दबाकर बैठी रहती हैं। किसानों ने स्पष्ट मांग की कि — “अब केवल मूलधन का आश्वासन नहीं चलेगा। उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम, 1953 की धारा 17 और गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 के तहत 14 दिन की मियाद बीतने के बाद बकाए पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़कर किसानों के खातों में ट्रांसफर कराया जाए।”
📊 लखीमपुर खीरी की चीनी मिलों पर वर्तमान बकाए की स्थिति
लखीमपुर खीरी जनपद में 9 चीनी मिलें संचालित होती हैं, जिनमें से बजाज समूह की तीनों मिलें भुगतान में सबसे फिसड्डी हैं:
| चीनी मिल का नाम | स्वामित्व | कुल पेराई मूल्य | वर्तमान बकाया (Arrears) | स्थिति / किसानों की मांग |
|---|---|---|---|---|
| बजाज हिन्दुस्थान, पलिया कलां | बजाज ग्रुप | ~₹440 करोड़ | ₹112.40 करोड़ | सबसे अधिक बकाया; किसानों का लगातार धरना। |
| बजाज हिन्दुस्थान, गोला गोकर्णनाथ | बजाज ग्रुप | ~₹520 करोड़ | ₹84.15 करोड़ | 15% ब्याज जोड़ने की औपचारिक याचिका दाखिल। |
| बजाज हिन्दुस्थान, खंभारखेड़ा | बजाज ग्रुप | ~₹365 करोड़ | ₹58.80 करोड़ | रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी करने की मांग। |
| बलरामपुर चीनी मिल, कुंभी | बलरामपुर ग्रुप | ~₹490 करोड़ | ₹0.00 (100% चुकता) | समय पर भुगतान; किसान संतुष्ट। |
| डीएससीएल शुगर मिल, अजबापुर | डीसीएम श्रीराम | ~₹610 करोड़ | ₹0.00 (100% चुकता) | 14 दिन के अंदर पूरा भुगतान। |
⚖️ किसानों का अल्टीमेटम: 4 प्रमुख चेतावनियां
किसान दिवस में विभिन्न किसान संगठनों (भाकियू अराजनैतिक, भाकियू टिकैत व राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन) के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को 4 सूत्रीय अल्टीमेटम सौंपा:
- बकाया नहीं तो पेराई नहीं: 15 अक्टूबर 2026 तक यदि पिछला एक-एक रुपया किसानों के खाते में नहीं आता, तो किसान किसी भी मिल को बॉयलर पूजन नहीं करने देंगे और तौल केंद्रों पर ताले जड़ेंगे।
- चीनी व शीरा स्टॉक की जब्ती: जिला प्रशासन भू-राजस्व अधिनियम के तहत डिफाल्टर मिलों के गोदामों को सील करे और 20 लाख क्विंटल चीनी स्टॉक को नीलाम कर किसानों को सीधे आरटीजीएस कराए।
- 15% ब्याज की कानूनी वसूली: मिल मालिकों ने जो पैसा बैंकों और डिस्टिलरियों में लगाकर मुनाफा कमाया है, उसका 15% ब्याज किसानों का कानूनी अधिकार है।
- बाढ़ व जलभराव का मुआवजा: शारदा और घाघरा नदी की बाढ़ से प्रभावित धौरहरा, पलिया और निघासन के गन्ना किसानों को प्रति एकड़ ₹25,000 का विशेष कृषि मुआवजा दिया जाए।
🏛️ प्रशासनिक अधिकारियों का रुख
बैठक में उपस्थित मुख्य विकास अधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी (DCO) ने किसानों को आश्वस्त किया कि शासन स्तर पर बजाज समूह के शीर्ष प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा चुका है। जिला प्रशासन ने मिल प्रबंधन को 25 सितंबर तक कम से कम ₹70 करोड़ की विशेष किस्त जारी करने का कड़ा निर्देश दिया है, अन्यथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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