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लखीमपुर व पीलीभीत में रेड रॉट का प्रकोप — गन्ना शोध केंद्र गोला गोकर्णनाथ ने जारी की आपात एडवाइजरी: फसल बचाने के 3 त्वरित उपाय

Aamir Raza Sep 15, 2026 3 min read
लखीमपुर व पीलीभीत में रेड रॉट का प्रकोप — गन्ना शोध केंद्र गोला गोकर्णनाथ ने जारी की आपात एडवाइजरी: फसल बचाने के 3 त्वरित उपाय
अंतिम अपडेट: September 15, 2026 5:20 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गोला गोकर्णनाथ / लखीमपुर खीरी (CaneUp ब्यूरो — 15 सितंबर 2026, शाम 5:20 IST): उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक तराई क्षेत्र (लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर और शाहजहांपुर) में मानसून की विदाई के समय अचानक बढ़े तापमान और 90% से अधिक नमी के चलते Co 0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग (Red Rot) ने एक बार फिर भयानक रूप दिखाना शुरू कर दिया है।

लखीमपुर खीरी के पलिया, गोला, मोहम्मदी और पीलीभीत के पूरनपुर व बीसलपुर क्षेत्रों में गन्ने की ऊपरी तीसरी और चौथी पत्ती पीली पड़कर सूखने और गन्ने को चीरने पर भीतर से शराब जैसी दुर्गंध व सफेद धब्बे आने की सैकड़ों शिकायतें दर्ज हुई हैं।

इसे देखते हुए गन्ना शोध केंद्र, गोला गोकर्णनाथ के वरिष्ठ पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. वी.के. पाठक और उनकी टीम ने मंगलवार को प्रभावित क्षेत्रों का औचक दौरा कर किसानों के लिए आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है।


🧪 वैज्ञानिकों द्वारा जारी 3 त्वरित उपचार कदम (Immediate SOP)

1. रोगी थान (Infected Clump) को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें

  • जिस गन्ने का अगोला सूख चुका है, उसका कोई इलाज नहीं हो सकता। उसे जड़ समेत जमीन से बाहर निकालें।
  • उखाड़े गए स्थान के गड्ढे में 25 से 50 ग्राम बुझा हुआ चूना (Lime Powder) या ब्लीचिंग पाउडर अवश्य डालें ताकि मिट्टी में मौजूद फंगस के बीजाणु (Spores) दूसरे पौधों में न फैलें।
  • उखाड़े गए गन्ने को खेत की मेढ़ पर न फेंकें, बल्कि खेत से दूर गड्ढा खोदकर दबा दें या जला दें।

2. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड व ट्राइकोडर्मा का ड्रेंचिंग स्प्रे

वैज्ञानिकों ने प्रति एकड़ निम्नलिखित घोल का नाली में छिड़काव (Root Drenching) करने की सिफारिश की है:

  • स्प्रे घोल: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (500 ग्राम) + स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (40 ग्राम) + 200 लीटर पानी प्रति एकड़
  • इस घोल को गन्ने की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करते हुए स्प्रे करें।
  • जैविक विकल्प के रूप में 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma viride) को 100 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर खेत की नालियों में बिखरवाएं।

3. जलभराव न होने दें (Drain Excess Water)

  • रेड रॉट फंगस पानी के बहाव के साथ एक खेत से दूसरे खेत में सबसे तेजी से फैलता है। अतः खेत में भरे हुए बरसाती पानी को तत्काल बाहर निकालें और नालियों की सफाई करें।

🚫 अगले सत्र के लिए Co 0238 का बीज न रखने की सख्त सलाह

वैज्ञानिकों ने किसानों को कड़े शब्दों में आगाह किया है कि जिन खेतों में 5% भी लाल सड़न का लक्षण दिखाई दिया है, उस खेत के गन्ने को भूलकर भी शरदकालीन बुवाई के बीज के रूप में उपयोग न करें। ऐसे किसान गन्ना समिति से प्रमाणित Co 0118, Co 15023 या CoLk 14201 का नया रोगमुक्त बीज ही 50% सब्सिडी पर प्राप्त करें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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