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लखनऊ में ₹52 किलो मिल रही चीनी: गन्ना किसान संस्थान के काउंटर पर 5 किलो ₹250 में, जानिए टाइमिंग और दोनों मिलों के रेट

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 14, 2026 • 6 min read
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लखनऊ में ₹52 किलो मिल रही चीनी: गन्ना किसान संस्थान के काउंटर पर 5 किलो ₹250 में, जानिए टाइमिंग और दोनों मिलों के रेट
अंतिम अपडेट: October 14, 2026 6:38 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

लखनऊ में रहने वालों के लिए चीनी थोड़ी सस्ती हो गई है। उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने राजधानी के लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में आम लोगों को ₹52 प्रति किलो की दर से चीनी बेचना शुरू कर दिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है, जिन्होंने चीनी के दामों को लेकर विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।

काउंटर पर दो मिलों की चीनी मिल रही है। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की मुण्डेरवां मिल की रिफाइंड चीनी का 5 किलो का पैकेट ₹250 में मिल रहा है, जबकि सहकारी चीनी मिल सम्पूर्णानगर की चीनी का 5 किलो का पैकेट ₹245 का है। काउंटर हर कार्यदिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलता है।

दोनों मिलों के पैकेट-वार रेट

काउंटर पर चीनी पैकेट में बिक रही है। दोनों मिलों के रेट अलग-अलग हैं, इसलिए खरीदने से पहले तुलना कर लेना फायदेमंद रहेगा।

पैकेटचीनी निगम मुण्डेरवां (रिफाइंड)सहकारी मिल सम्पूर्णानगर
1 किलो₹52₹51
2 किलो₹102₹102
5 किलो₹250₹245
50 किलो₹2,500₹2,400

रेटों को ध्यान से देखें तो 1 किलो के पैकेट पर सम्पूर्णानगर की चीनी ₹1 सस्ती है। 2 किलो पर दोनों के रेट बराबर हैं। 5 किलो पर सम्पूर्णानगर ₹5 सस्ती पड़ती है और 50 किलो के बोरे पर ₹100 का फर्क है। अगर घर के लिए बड़ा पैकेट लेना है तो सम्पूर्णानगर की चीनी थोड़ी सस्ती पड़ेगी, जबकि छोटी खरीद पर फर्क लगभग नहीं के बराबर है।

काउंटर कहां है और कब खुलता है

यह बिक्री केंद्र लखनऊ के लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित है। यहां चीनी निगम और सहकारी चीनी मिल संघ का चीनी विक्रय केंद्र पहले से है, जहां यह विशेष व्यवस्था शुरू की गई है।

काउंटर हर कार्यदिवस पर नियमित रूप से संचालित होगा। समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।

एक बात साफ रखना जरूरी है: स्रोतों में किसी व्यक्ति-सीमा (प्रति व्यक्ति कितनी चीनी) का जिक्र नहीं है। अगर आप बड़ी मात्रा में खरीदने जा रहे हैं तो काउंटर पर पहले पूछताछ कर लेना बेहतर रहेगा। इसी तरह, यह व्यवस्था अभी लखनऊ के इस एक केंद्र तक ही सीमित बताई गई है। दूसरे जिलों में ऐसे काउंटर खुलेंगे या नहीं, इस बारे में स्रोतों में कोई जानकारी नहीं है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया

चीनी के दाम पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़े हैं। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी का औसत फुटकर भाव ₹55.28 प्रति किलो तक पहुंच गया था, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव बना हुआ है।

सरकार चीनी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, 2026-27 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (जो 1 नवंबर से शुरू होता है) में गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे को इथेनॉल के लिए मोड़ने पर रोक लगाई जा सकती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा गन्ना चीनी बनाने में जाए। द हिंदू बिज़नेस लाइन के अनुसार, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 2019 से ₹31 प्रति किलो पर ही अटका हुआ है, जबकि 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया गया है।

गन्ना किसान के लिए इस खबर का क्या मतलब है

पहली नजर में यह खबर उपभोक्ताओं की लग सकती है, लेकिन गन्ना किसानों के लिए भी इसमें कई संकेत छिपे हैं।

पहला संकेत यह है कि सरकार चीनी के दामों पर बारीक नजर रख रही है। किसान संगठनों की मांग रही है कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो किया जाए, ताकि मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरे और वे किसानों को बेहतर दाम दे सकें। महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर चल रहे आंदोलन में भी यही मांग उठी है।

दूसरा संकेत मिलों की सीधी बिक्री से जुड़ा है। जब मिल की चीनी बिना बिचौलियों के सीधे जनता तक पहुंचती है, तो मिल को पूरा मूल्य मिलता है। मिलों की आर्थिक सेहत का सीधा संबंध किसानों के भुगतान से है।

तीसरा और सबसे काम का पहलू यह है कि किसानों को अपने हक के रेटों पर नजर रखनी चाहिए। 2026-27 के लिए केंद्र का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 2026-27 के लिए राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था। जब तक नई एसएपी की घोषणा नहीं होती, पिछले सत्र के रेट को इस सत्र का रेट मानकर न चलें।

खरीदने से पहले 5 बातें जान लें

  1. दोनों मिलों के रेट तुलना करके जाएं: 1 किलो पर ₹1 और 50 किलो पर ₹100 का फर्क है। बड़ी खरीद में सम्पूर्णानगर की चीनी सस्ती पड़ती है।
  2. समय का ध्यान रखें: काउंटर सिर्फ कार्यदिवस पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुलता है।
  3. पैकेट की सील और वजन जांचें: पैकेट लेते समय सील और वजन जरूर देखें। रसीद लेना न भूलें।
  4. सीमा के बारे में पूछ लें: स्रोतों में प्रति व्यक्ति सीमा का जिक्र नहीं है, लेकिन बड़ी खरीद से पहले काउंटर पर पूछताछ कर लेना समझदारी है।
  5. यह सुविधा सिर्फ लखनऊ में है: अभी यह काउंटर सिर्फ लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर, लखनऊ में है। दूसरे जिलों के किसान या उपभोक्ता इसे अपने जिले की व्यवस्था न समझें।

आपके सवाल

क्या लखनऊ में चीनी ₹52 किलो सच में मिल रही है? हां। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर के बिक्री केंद्र पर ₹52 प्रति किलो की दर से चीनी उपलब्ध कराई है। यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई है।

काउंटर कितने बजे तक खुला रहता है? हर कार्यदिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक।

सबसे सस्ता पैकेट कौन सा है? प्रति किलो के हिसाब से सम्पूर्णानगर मिल की चीनी थोड़ी सस्ती है। उसका 1 किलो का पैकेट ₹51 का है, जबकि मुण्डेरवां की रिफाइंड चीनी का 1 किलो का पैकेट ₹52 का है। 50 किलो के बोरे पर सम्पूर्णानगर ₹100 सस्ती पड़ती है।

क्या यह सुविधा पूरे यूपी में है? नहीं। यह व्यवस्था अभी सिर्फ लखनऊ के गन्ना किसान संस्थान परिसर के बिक्री केंद्र पर है।

चीनी के दाम बढ़ क्यों रहे हैं? त्योहारी मांग, कम शुरुआती स्टॉक और उत्पादन को लेकर चिंता से दामों पर दबाव है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, औसत फुटकर भाव ₹55.28 प्रति किलो तक पहुंच गया था, जो पिछले साल से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है।

2026-27 के लिए गन्ने का रेट क्या तय हुआ है? केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है। यूपी में एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था।

स्रोत: नया लुक, केसरिया न्यूज़, भारत बज़ लाइव (14 अक्टूबर 2026); संदर्भ: फाइनेंशियल एक्सप्रेस, द हिंदू बिज़नेस लाइन।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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