गेट बंद देख टिकैत लखनऊ में गेट नंबर 1 पर ही बैठ गए: गन्ना भाव, बकाया भुगतान समेत किसानों की 4 मांगें

लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान (शुगरकेन इंस्टीट्यूट) के गेट बंद मिलने पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत किसान नेताओं ने गुरुवार (22 अक्टूबर) की शाम को संस्थान के गेट नंबर 1 के बाहर ही धरना लगा दिया। किसान नेता शुक्रवार (23 अक्टूबर) को संस्थान में होने वाली किसान बैठक की तैयारियों के लिए वहां पहुंचे थे, लेकिन गेट बंद होने और बैठक से जुड़ा सामान अंदर न जाने देने पर उन्होंने करीब 2 से 3 घंटे तक धरना दिया।
धरने के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि अगर गेट नहीं खोला गया तो वे रात भर वहीं डटे रहेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि बैठक 23 अक्टूबर को तय थी, और गेट खुलने तक वे वहीं बैठेंगे — जरूरत पड़ी तो पूरी रात भी। इस दौरान उनकी मुख्य मांगों में गन्ने का भाव बढ़ाना, बकाया भुगतान की निकासी, धान खरीद केंद्रों का सुचारू संचालन और भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा शामिल रहा।
टिकैत ने क्या कहा: “गेट नहीं खोला तो पूरी रात यहीं बैठेंगे”
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, “हमारी बैठक 23 अक्टूबर को तय है, लेकिन उन्होंने गेट बंद कर दिए हैं। हमारा सामान अंदर जाना था, लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। हम यहां बैठे हैं और गेट खुलने तक बैठे रहेंगे। जरूरत पड़ी तो हम रात यहीं बिताएंगे।”
टिकैत ने स्पष्ट किया कि अगर अंदर बैठक की अनुमति नहीं मिली तो किसान गेट के बाहर ही बैठक करेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि गेट बंद रहा तो रात भर धरना जारी रहेगा।
किसानों की 4 बड़ी मांगें
इस धरने और 23 अक्टूबर की बैठक के केंद्र में किसानों की चार प्रमुख मांगें हैं:
- गन्ने के भाव में वृद्धि — किसान गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इससे ठीक दो दिन पहले 21 अक्टूबर को बिजनौर की नुमाइश ग्राउंड में हुई किसान महापंचायत में भी गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग प्रमुखता से उठी थी।
- बकाया गन्ना भुगतान की निकासी — टिकैत ने कहा कि गन्ना किसानों का भुगतान अभी भी बकाया है, जिसमें पिछले सत्र की भी राशि शामिल है। किसानों की मांग है कि बकाया राशि का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।
- धान खरीद केंद्रों का सुचारू संचालन — किसानों ने मांग की है कि धान खरीद केंद्र खोले जाएं और खरीद सही तरीके से हो। टिकैत का दावा है कि किसानों को धान अपेक्षित दर से लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम पर बेचना पड़ रहा है।
- भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा — किसानों ने विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के उचित मुआवजे की मांग उठाई है। टिकैत ने आपत्ति जताई कि जमीन का अधिग्रहण मौजूदा समय में हो रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट पर की जा रही है।
धान खरीद केंद्रों पर गंभीर आरोप: 1,000 रुपये कम की दर
राकेश टिकैत ने धान किसानों की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि किसानों को धान अपेक्षित मूल्य से लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम पर बेचना पड़ रहा है। किसानों की मांग है कि धान खरीद केंद्र खोले जाएं और वहां खरीद सही तरीके से की जाए, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
2013 के सर्किल रेट पर मुआवजे पर आपत्ति
भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी धरने की मुख्य मांगों में शामिल रहा। टिकैत ने आरोप लगाया कि जमीन का अधिग्रहण वर्तमान समय में किया जा रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट के आधार पर की जा रही है। उनका कहना है कि इससे किसानों का बड़ा नुकसान हो रहा है, क्योंकि मौजूदा बाजार दर और पुराने सर्किल रेट में भारी अंतर है।
टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की तुलना में उद्योगपतियों और बड़े व्यापारिक समूहों को प्राथमिकता दे रही है।
बिजनौर महापंचायत की कड़ी: 600 रुपये भाव की मांग
लखनऊ का यह धरना बिजनौर महापंचायत की कड़ी में अगला कदम माना जा रहा है। 21 अक्टूबर को बिजनौर की नुमाइश ग्राउंड में हुई महापंचायत में टिकैत ने गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान के मुआवजे और सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की थी। उसके बाद ज्ञापन संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा गया था, और अब लखनऊ की बैठक को इन्हीं मांगों को आगे बढ़ाने का मंच माना जा रहा है।
गन्ना किसानों के लिए मौजूदा स्थिति क्या है
पृष्ठभूमि समझना जरूरी है। 2025-26 पेराई सत्र के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है — यानी अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस सत्र में गन्ने का भाव क्या रहेगा।
किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, और किसानों का आरोप है कि भुगतान में देरी कई जगहों पर अभी भी बनी हुई है।
23 अक्टूबर की बैठक: क्या उम्मीद करें
आज (23 अक्टूबर) की किसान बैठक में चारों मांगों — गन्ना भाव, बकाया भुगतान, धान खरीद केंद्र और भूमि मुआवजा — पर चर्चा के आसार हैं। गन्ना किसानों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि 2026-27 सत्र का SAP कब घोषित होगा। पेराई सत्र अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए भाव की घोषणा में देरी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
जवाब जानिए
लखनऊ में गन्ना संस्थान के बाहर धरना क्यों हुआ? 23 अक्टूबर की किसान बैठक की तैयारियों के लिए पहुंचे किसान नेताओं ने गेट बंद पाया और बैठक का सामान अंदर नहीं जाने दिया गया। इसी के विरोध में राकेश टिकैत समेत किसान नेताओं ने 22 अक्टूबर की शाम गेट नंबर 1 पर 2-3 घंटे धरना दिया।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं? गन्ने के भाव में वृद्धि, बकाया गन्ना भुगतान की निकासी, धान खरीद केंद्रों का सुचारू संचालन और भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा — ये चार प्रमुख मांगें हैं।
गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग किसने की? 21 अक्टूबर को बिजनौर की महापंचायत में राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की थी। लखनऊ की बैठक में भी इसी मांग को उठाया गया।
2026-27 सत्र का गन्ना भाव (SAP) घोषित हुआ है? नहीं। 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 सत्र का SAP अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
धान खरीद केंद्रों पर टिकैत का क्या आरोप है? टिकैत का दावा है कि किसानों को धान अपेक्षित दर से लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम पर बेचना पड़ रहा है, इसलिए खरीद केंद्र खोले जाएं और खरीद सही तरीके से हो।
भूमि अधिग्रहण मुआवजे पर क्या आपत्ति है? टिकैत ने आपत्ति जताई कि जमीन का अधिग्रहण वर्तमान समय में हो रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट पर की जा रही है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
स्रोत: ThePrint (पीटीआई), Lokmat Times (पीटीआई)
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