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23 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना किसानों की महापंचायत — 600 रुपये क्विंटल मांग पर पेराई से पहले सरकार पर बनेगा बड़ा दबाव

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 19, 2026 • 6 min read
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23 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना किसानों की महापंचायत — 600 रुपये क्विंटल मांग पर पेराई से पहले सरकार पर बनेगा बड़ा दबाव
अंतिम अपडेट: October 19, 2026 7:02 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अक्टूबर का आखिरी हफ्ता निर्णायक साबित हो सकता है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी और बकाया भुगतान की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को लखनऊ में किसान-मजदूर महापंचायत का ऐलान कर दिया है। संगठन ने अपने राष्ट्रीय कार्यालय से कार्यक्रम सूचना लेटर जारी करते हुए प्रदेश के सभी गन्ना उत्पादक जनपदों के किसानों और मजदूरों को लखनऊ के गन्ना संस्थान में जुटने का आह्वान किया है। महापंचायत की मुख्य मांग है — गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए और पुराने सत्र का बकाया भुगतान नए पेराई सत्र शुरू होने से पहले कराया जाए।

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत खुद इस महापंचायत के सबसे बड़े चेहरे होंगे। रविवार को बागपत के दोघट में पत्रकार वार्ता में उन्होंने साफ कहा कि गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम हरगिज नहीं होना चाहिए, वरना यह किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होगा।

23 अक्टूबर को लखनऊ में क्या-क्या होगा

भाकियू द्वारा जारी सूचना के मुताबिक 23 अक्टूबर को लखनऊ स्थित गन्ना संस्थान में किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन होगा। इसमें उत्तर प्रदेश के समस्त गन्ना उत्पादक जनपदों तथा राज्य राजधानी क्षेत्र से जुड़े जनपदों के किसान और मजदूर साथी भाग लेंगे। महापंचायत में गन्ना किसानों की समस्याओं, गन्ना मूल्य भुगतान, बकाया गन्ना मूल्य, गन्ना मूल्य में वृद्धि तथा अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी। संगठन ने सभी पदाधिकारियों को पंचायत में पहुंचने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों के हक में आवाज को और मजबूती मिल सके।

महापंचायत में गन्ना मूल्य बढ़ोतरी, बकाया भुगतान और टॉप बोरर कीट जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक महापंचायत में हजारों किसानों के जुटने की उम्मीद है। यह पहला बड़ा मौका होगा जब पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले किसान अपनी मांगों को लेकर राजधानी में एकजुट होंगे।

600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग — आंकड़े क्या कहते हैं

किसान संगठनों की मांग गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की है। इस मांग के पीछे किसानों का तर्क साफ है — बीज, उर्वरक, पानी और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि वर्तमान गन्ना मूल्य उत्पादन लागत को कवर नहीं कर पा रहा।

संदर्भ के लिए समझें: उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना पेराई सत्र 2025-26 के लिए राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) अगेती प्रजाति के गन्ने पर 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। किसानों का कहना है कि इतने में खेती की बढ़ी हुई लागत के सामने कमाई नहीं बचती। भाकियू का तर्क है कि जब बाजार में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं, तो किसान के गन्ने का भाव भी बढ़ना चाहिए। चौधरी नरेश टिकैत ने पत्रकार वार्ता में यही बात कही — चीनी पर दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन किसान के गन्ने का भाव नहीं बढ़ाया जा रहा, यह सरकार की किसान विरोधी नीति को दिखाता है।

बकाया भुगतान और 20 अक्टूबर से पेराई की संभावना

गन्ना मूल्य के साथ-साथ बकाया भुगतान भी इस आंदोलन का बड़ा मुद्दा है। किसान संगठनों का कहना है कि कई चीनी मिलों पर किसानों का अभी भी बकाया है और इसका भुगतान नए पेराई सत्र से पहले किया जाना चाहिए। महापंचायत में इस मांग को भी मजबूती से उठाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई आमतौर पर 1 नवंबर से हर चीनी मिल में शुरू हो जाती है। इस बार संभावना जताई जा रही है कि 20 अक्टूबर से पेराई सत्र शुरू हो सकता है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। किसानों को उम्मीद है कि यूपी सरकार पेराई शुरू होने से पहले गन्ना मूल्य बढ़ाएगी और बकाया भुगतान के निर्देश चीनी मिलों को देगी। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से ऐसे निर्देश न मिलने से गन्ना किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।

संयुक्त किसान मोर्चा भी मैदान में — डीएम कार्यालयों में धरना

भाकियू के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है। मोर्चा की ओर से कहा गया है कि 23 अक्टूबर को राज्यभर में जिलाधिकारी कार्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। दोनों संगठन एक ही मांग पर एकजुट हैं — गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल और बकाया का पूरा भुगतान।

यह भी अहम है कि भाकियू की मांगों में टॉप बोरर कीट से गन्ने की फसल को हुए नुकसान का मुद्दा भी शामिल है। संगठन ने योगी सरकार से रात में बिजली सप्लाई की मांग की थी, जिसे कुछ इलाकों में अब तक पूरा नहीं किया गया है। महापंचायत में इस मुद्दे के भी उठने की संभावना है।

टिकैत का बयान और सरकार का रुख

बागपत के दोघट में राजेंद्र चौधरी के आवास पर हुई पत्रकार वार्ता में चौधरी नरेश टिकैत ने तीखे लहजे में कहा कि सरकार आंदोलन करने वालों पर दबाव बनाकर चुप कराना चाहती है, लेकिन मनमानी से देश नहीं चल सकता। उनका कहना था कि सरकार को उनकी समस्या सुनकर समाधान करना चाहिए। इस दौरान किसान सेना जैसे कई संगठनों ने सरकार को लिखित याचिका भी सौंपने की बात कही है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कृषि विभाग की ओर से इतना ही कहा गया है कि कीमतों के पुनरावलोकन की प्रक्रिया चल रही है। किसानों ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की अपील की है। अब सबकी नजर 23 अक्टूबर की महापंचायत पर है, जिसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर साफ तस्वीर सामने आएगी।

किसान अब क्या करें

अगर आप गन्ना किसान हैं तो अपनी पर्ची, तौल और भुगतान से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि बकाया के दावे में कोई दिक्कत न हो। महापंचायत में शामिल होने वाले किसान स्थानीय पदाधिकारियों से पहले संपर्क कर लें, और पेराई से पहले अपने गन्ने की कटाई का शेड्यूल चीनी मिल के सट्टा विभाग से पक्का कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: 23 अक्टूबर को लखनऊ में कौन सी महापंचायत हो रही है? जवाब: भारतीय किसान यूनियन ने 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना संस्थान में किसान-मजदूर महापंचायत का ऐलान किया है। इसमें गन्ना मूल्य बढ़ोतरी, बकाया भुगतान और अन्य किसान मुद्दों पर चर्चा होगी।

सवाल: गन्ने का कौन सा भाव मांगा जा रहा है? जवाब: किसान संगठनों की मांग है कि गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। वर्तमान में यूपी में 2025-26 सत्र का एसएपी अगेती गन्ने पर 400 रुपये प्रति क्विंटल है।

सवाल: क्या सरकार ने नया गन्ना मूल्य घोषित किया है? जवाब: अभी तक राज्य सरकार ने नया गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है। कृषि विभाग के मुताबिक कीमतों के पुनरावलोकन की प्रक्रिया चल रही है।

सवाल: पेराई सत्र 2026-27 कब से शुरू होगा? जवाब: यूपी में पेराई आमतौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है। इस बार 20 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से अभी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है।

सवाल: संयुक्त किसान मोर्चा का कार्यक्रम क्या है? जवाब: संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 अक्टूबर को ही राज्यभर में जिलाधिकारी कार्यालयों में धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसमें जिलाधिकारियों के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।

स्रोत: किसान इंडिया (18 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (18 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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