लखनऊ: गन्ना संस्थान के गेट पर लटका ताला 3 घंटे बाद खुला — राकेश टिकैत ने 7000 किसानों के सामने 600 रुपये भाव का अल्टीमेटम दिया

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गन्ना किसानों का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत जब गुरुवार शाम को 23 अक्टूबर की किसान महापंचायत की तैयारियों का जायजा लेने लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान पहुंचे, तो उन्हें मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। टिकैत समर्थकों के साथ गेट पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। करीब तीन घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन ने गेट का ताला खोल दिया। शुक्रवार को टिकैत ने महापंचायत में गन्ना किसानों की मांगें रखीं और सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया — गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और बकाया भुगतान नए पेराई सत्र से पहले कराया जाए, वरना राज्यव्यापी आंदोलन होगा।
गुरुवार शाम: गेट पर ताला, किसान धरने पर
राकेश टिकैत ने बताया कि किसानों की बैठक 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है और वे इसकी तैयारियों के लिए संस्थान पहुंचे थे। उनके मुताबिक, गेट नंबर एक पर ताला लटका था और बैठक की तैयारियों से जुड़ा सामान परिसर के अंदर नहीं ले जाने दिया जा रहा था। टिकैत ने पीटीआई-वीडियो से कहा कि अगर किसानों को परिसर के अंदर बैठक करने की इजाजत नहीं दी गई, तो वे गेट के बाहर ही बैठक करेंगे और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। किसानों ने गेट नहीं खुलने पर रातभर धरने पर बैठे रहने की चेतावनी दी थी।
किसानों का जमावड़ा शुरू होते ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। भाकियू के उत्तर प्रदेश युवा अध्यक्ष अनुज सिंह ने चेतावनी दी कि लखनऊ प्रशासन कान खोलकर सुन ले — गन्ना संस्थान के गेट पर ताला लगाकर किसानों की महापंचायत रोकने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाकियू का आरोप है कि प्रशासन महापंचायत को रोकना चाहता है। करीब दो से तीन घंटे तक चले धरने के बाद संस्थान का गेट खोल दिया गया।
शुक्रवार: 7000 किसान लखनऊ में डटे
शुक्रवार को गन्ना संस्थान में किसान महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें राकेश टिकैत ने गन्ना किसानों के मुद्दों पर बात रखी। आईएएनएस के मुताबिक टिकैत महापंचायत में किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए शामिल हुए। भाकियू के अयोध्या मंडल प्रभारी निसार मेहदी के मुताबिक लखनऊ में 5 हजार से ज्यादा किसानों ने डेरा डाल दिया था, और किसान इंडिया को उन्होंने बताया कि 7 हजार से ज्यादा किसान लखनऊ पहुंच चुके हैं। उनका कहना था कि जब तक राकेश टिकैत या शीर्ष नेतृत्व आदेश नहीं करेगा, किसान वापस नहीं जाएंगे।
महापंचायत में प्रदेश के समस्त गन्ना उत्पादक जनपदों के किसान-मजदूर साथियों ने भाग लिया। गन्ना मूल्य बढ़ोतरी, बकाया भुगतान और टॉप बोरर कीट से हुए नुकसान जैसे मुद्दे उठाए गए। बीकेयू ने टॉप बोरर कीट से बचाव के लिए रात में 6 से 12 बजे बिजली सप्लाई की मांग भी रखी है।
टिकैत का अल्टीमेटम — 600 रुपये प्रति क्विंटल
भाकियू के उत्तर प्रदेश युवा अध्यक्ष अनुज सिंह ने महापंचायत में कहा कि गन्ना पेराई कई राज्यों में शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक गन्ना मूल्य बढ़ाने की बात तक नहीं की जा रही है। उन्होंने योगी सरकार से मांग की कि गन्ना किसानों के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य तय किया जाए और इसकी जल्द घोषणा की जाए। चेतावनी दी गई कि अगर सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो किसान राज्यव्यापी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों के हितों के मुकाबले उद्योगपतियों और बड़े कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना था कि जब सरकार आम लोगों की समस्याएं नहीं सुनती, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन करना पड़ता है। टिकैत ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर किसानों से धरना-प्रदर्शन करने का आह्वान भी किया।
धान की खरीद और जमीन मुआवजे के मुद्दे
महापंचायत में सिर्फ गन्ना ही नहीं, दूसरे किसान मुद्दे भी उठे। टिकैत ने दावा किया कि धान अपेक्षित दर से करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम पर बिक रहा है। उन्होंने धान खरीद केंद्रों के सुचारु संचालन की मांग रखी। साथ ही, विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन का मुआवजा वर्ष 2013 की सर्किल दरों के आधार पर तय किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। टिकैत ने बिजली से जुड़े मुद्दे भी उठाए और कहा कि किसानों की बैठक के बाद अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चा का भी 23 अक्टूबर को प्रदर्शन
भाकियू के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी 23 अक्टूबर को राज्यभर में जिलाधिकारी कार्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया। मोर्चा की मांग एक ही है — गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए और कई मिलों पर बकाया राशि का भुगतान नए पेराई सत्र से पहले कराया जाए। पदाधिकारी जिलाधिकारियों के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज रहे हैं।
पेराई सत्र से पहले की नाराजगी — आंकड़े
उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) अगेती गन्ने पर 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। किसान संगठनों का कहना है कि बीज, उर्वरक, मजदूरी और बिजली की बढ़ी लागत के सामने यह भाव घाटे का सौदा है। यूपी में पेराई आमतौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है और इस बार 20 अक्टूबर के आसपास कुछ मिलों में पेराई की संभावना है — लेकिन सरकार की ओर से अभी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है।
किसान अब क्या करें
जो किसान महापंचायत में शामिल होना चाहते हैं, वे स्थानीय भाकियू पदाधिकारियों से पहले संपर्क कर लें। पेराई सत्र नजदीक है — अपने गन्ने की पर्ची, तौल और भुगतान से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें और कटाई का शेड्यूल चीनी मिल के सट्टा विभाग से पहले से पक्का कर लें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल: लखनऊ में गन्ना संस्थान के गेट पर ताला कब लगा और कब खुला? जवाब: गुरुवार शाम 22 अक्टूबर को राकेश टिकैत और किसान नेताओं को गन्ना संस्थान, डालीबाग के गेट पर ताला लटका मिला। टिकैत समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए और करीब 2 से 3 घंटे बाद प्रशासन ने गेट खोल दिया।
सवाल: 23 अक्टूबर की महापंचायत में क्या मांगें रखी गईं? जवाब: गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने, बकाया भुगतान नए पेराई सत्र से पहले कराने, धान खरीद केंद्रों का सुचारु संचालन, अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा और रात में 6 से 12 बजे बिजली सप्लाई की मांगें उठीं।
सवाल: टिकैत ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है? जवाब: राकेश टिकैत और भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर 600 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की जल्द घोषणा नहीं हुई, तो किसान राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी धरने का आह्वान किया गया है।
सवाल: कितने किसान लखनऊ पहुंचे हैं? जवाब: भाकियू के अयोध्या मंडल प्रभारी निसार मेहदी के मुताबिक 7 हजार से ज्यादा किसानों ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है, और नेतृत्व के आदेश तक वे वापस नहीं जाएंगे।
सवाल: पेराई सत्र 2026-27 कब शुरू होगा? जवाब: यूपी में पेराई आमतौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है। इस बार 20 अक्टूबर के आसपास कुछ मिलों में पेराई शुरू होने की संभावना है, लेकिन सरकार की ओर से अभी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है।
स्रोत: किसान इंडिया (23 अक्टूबर 2026), रूरल वॉइस (23 अक्टूबर 2026), टाइम्स नाउ नवभारत / पीटीआई (22 अक्टूबर 2026), आईएएनएस (23 अक्टूबर 2026)
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


