गड़ौरा मिल को 20 नवंबर तक 1.80 करोड़ जमा करने का अल्टीमेटम, कुर्की की चेतावनी — निचलौल के किसान क्रशर पर 200 रुपये में गन्ना बेच रहे हैं

महराजगंज के निचलौल क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए नवंबर दोहरी परीक्षा लेकर आया है। जिला प्रशासन ने गड़ौरा चीनी मिल को 20 नवंबर तक 1.80 करोड़ रुपये जमा करने का अल्टीमेटम दिया है, वरना कुर्की होगी। उधर, जिन मिलों को गड़ौरा क्षेत्र का गन्ना आवंटित हुआ है, उन्होंने निचलौल की किसी भी ग्राम पंचायत में अब तक कांटा या क्रय केंद्र नहीं लगाया है। इसलिए किसान स्थानीय क्रशर पर 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल पर गन्ना बेच रहे हैं।
अमर उजाला की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिला गन्ना अधिकारी की आख्या पर जिलाधिकारी कार्यालय से यह रिकवरी नोटिस जारी हुआ है। एसडीएम निचलौल अवनीश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि समय पर भुगतान न होने पर कुर्की की कार्रवाई होगी।
1.80 करोड़ रुपये किस बात की वसूली है
पहले यह भ्रम दूर करें कि 1.80 करोड़ मिल का कुल बकाया है — ऐसा नहीं है। अमर उजाला की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि पेराई सत्र 2024-25 में 14 दिन के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज की वसूली है। नियम है कि मिल को खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है; चूक पर ब्याज की देनदारी बनती है।
मूल बकाया इससे अलग है। जागरण की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मिल पर किसानों का 7.72 करोड़ रुपये बकाया है, मिल से करीब 9,038 किसान जुड़े हैं और पिछले सत्र में इसे 60.73 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ था। यानी 1.80 करोड़ की रिकवरी कुल देनदारी का एक हिस्सा भर है।
निचलौल में क्रय केंद्र क्यों नहीं लगे
इस मुश्किल की जड़ पिछले महीने का फैसला है: गन्ना आयुक्त ने बकाया लंबित होने और देनदारी स्पष्ट न होने के कारण पेराई सत्र 2026-27 के लिए गड़ौरा का आवंटन प्रस्ताव खारिज कर दिया था। इसके बाद क्षेत्र का गन्ना हाटा, रामकोला, पिपराइच और सिसवा बाजार मिलों को आवंटित हुआ था।
कागज पर व्यवस्था बन गई, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है। अमर उजाला के अनुसार, विभाग का दावा है कि हाटा और पिपराइच मिलें गन्ना खरीदेंगी, पर अब तक इन दोनों गैर-जनपद मिलों ने निचलौल की किसी भी ग्राम पंचायत में कांटा या क्रय केंद्र स्थापित नहीं किया है। ऐसे में तैयार फसल लेकर किसान कहां जाएं, यह बड़ा सवाल है।
इसी मजबूरी का फायदा स्थानीय क्रशर उठा रहे हैं, जहां किसान 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल पर गन्ना बेच रहे हैं। तुलना करें तो पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। क्रशर का भाव पिछले सत्र के भाव से भी लगभग आधा है, और उस पर 14 दिन के भुगतान नियम की सुरक्षा भी नहीं मिलती।
श्रम विभाग की कार्रवाई और बिना पर्ची खरीद का आरोप
गड़ौरा मिल की मुश्किलें सिर्फ गन्ना भुगतान तक सीमित नहीं हैं। अमर उजाला की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से सितंबर और अक्टूबर में तीन नोटिस जारी किए जाने के बावजूद मिल प्रबंधन का कोई अधिकृत प्रतिनिधि पक्ष रखने नहीं पहुंचा। इस पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी महराजगंज ने 30 अक्टूबर को श्रम कानूनों के उल्लंघन की विस्तृत आख्या उप श्रमायुक्त कार्यालय गोरखपुर को भेजते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है।
मिल मजदूर यूनियन का आरोप है कि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा रही, बिना पंजीकरण काम कराया जा रहा है, सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है और सैकड़ों कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में अंशदान जमा नहीं हुआ है। श्रम विभाग ने ईपीएफ रसीद, उपस्थिति पंजिका और वेतन रजिस्टर मांगे थे, पर कोई प्रतिनिधि हाजिर नहीं हुआ। यूनियन अध्यक्ष नवल किशोर मिश्रा ने ईपीएफ व अन्य मदों में करीब 22 करोड़ रुपये बकाया होने का आरोप लगाया है — यह यूनियन का आरोप है, प्रशासन की पुष्टि की गई देनदारी नहीं। जनवरी 2026 के धरने के बाद हुए समझौते की शर्तें भी छह माह बाद तक पूरी नहीं की गईं।
मिल प्रबंधन का पक्ष भी आया है। मैनेजर विश्वामित्र सिंह ने कहा है कि मिल मालिक जरूरी काम से बाहर थे, इसलिए हाजिर नहीं हो सके, और उप श्रमायुक्त कार्यालय में मिल का वकील पक्ष रखेगा। श्रम प्रवर्तन अधिकारी गणेश सिंह ने पुष्टि की है कि आख्या गोरखपुर भेज दी गई है।
एक और गंभीर आरोप भी है। यूनियन के अनुसार, बलुआ बिहार क्षेत्र में मिल ने बिना पर्ची बड़े पैमाने पर गन्ना खरीदा: तौल कराई, पर न पर्ची दी और न भुगतान किया। शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद गन्ना विभाग गांवों में जाकर क्रय रसीद, तौल पर्ची और गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है। पर्ची ही वह कागज है, जिससे आपूर्ति, तौल, भाव और भुगतान का हिसाब जुड़ा होता है — बिना पर्ची गन्ना देना अपने हक का सबूत गंवाना है।
जिले की बड़ी तस्वीर और किसान क्या करें
महराजगंज की बड़ी तस्वीर भी चिंताजनक है। अमर उजाला के अनुसार, जिले में एक समय करीब 40 हजार हेक्टेयर में गन्ना होता था और घुघली, सिसवा, गड़ौरा, फरेंदा चारों मिलें चलती थीं; दो बंद होने के बाद रकबा करीब आधा रह गया है। सकारात्मक खबर है कि लाइव हिंदुस्तान के अनुसार, खड्डा रेता क्षेत्र के करीब तीन हजार किसानों का गन्ना अब गड़ौरा के बजाय आईपीएल चीनी मिल खड्डा को आवंटित हुआ है।
निचलौल के किसान के लिए अब चार काम जरूरी हैं। पहला, 20 नवंबर की तारीख पर नजर रखें और अफवाह पर गन्ना औने-पौने दाम पर न बेचें। दूसरा, अपने गांव में क्रय केंद्र की स्थिति जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय व समिति से पूछें और लिखित सूचना मिलने के बाद ही गन्ना वहां ले जाएं; बिना पर्ची किसी को गन्ना न दें। तीसरा, पुराने बकाए का पूरा हिसाब संभालकर रखें — किस सत्र में कितना गन्ना दिया, कितना भुगतान मिला, कितना बाकी है। चौथा, देरी हो तो समिति व जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। अनजान नंबर पर पर्ची, बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें।
अगले सोलह दिन तय करेंगे: क्या मिल रिकवरी जमा करती है, क्या निचलौल में क्रय केंद्र लगते हैं, और क्या उप श्रमायुक्त कार्यालय श्रम आख्या पर कार्रवाई करता है। इन्हीं तीन जवाबों पर निर्भर है कि किसान को इस सत्र में सही दाम मिलेगा या क्रशर के भरोसे काम चलाना पड़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गड़ौरा मिल को 20 नवंबर तक कितनी राशि जमा करनी है? 1.80 करोड़ रुपये — पेराई सत्र 2024-25 में 14 दिन के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज की वसूली। समय पर जमा न होने पर कुर्की की चेतावनी है।
क्या 1.80 करोड़ रुपये ही मिल का कुल बकाया है? नहीं। जागरण के अनुसार मिल पर किसानों का 7.72 करोड़ रुपये बकाया है; 1.80 करोड़ की रिकवरी ब्याज की वसूली है, मूल बकाए से अलग।
क्रशर पर गन्ना बेचने में क्या नुकसान है? क्रशर पर 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जो पिछले सत्र के भाव से काफी कम है, और बिना पर्ची बेचे गन्ने पर 14 दिन के भुगतान नियम की सुरक्षा भी नहीं मिलती।
बिना पर्ची गन्ना तौल की शिकायत कहां करें? जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में क्रय रसीद, तौल पर्ची और गवाहों के बयान के साथ शिकायत दर्ज कराएं।
स्रोत: अमर उजाला (महराजगंज, 30 और 31 अक्टूबर 2026), जागरण (महराजगंज, 22 और 23 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (कुशीनगर)।
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