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55 में से सिर्फ 15 मिलों में शुरू हुई पेराई: महाराष्ट्र-कर्नाटक में गन्ना आंदोलन जारी, कर्नाटक की कोई मिल नहीं चली — यूपी किसान यह बात जरूर समझें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 16, 2026 • 6 min read
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55 में से सिर्फ 15 मिलों में शुरू हुई पेराई: महाराष्ट्र-कर्नाटक में गन्ना आंदोलन जारी, कर्नाटक की कोई मिल नहीं चली — यूपी किसान यह बात जरूर समझें
अंतिम अपडेट: October 16, 2026 9:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

देश में गन्ना पेराई सीजन 2026-27 का आगाज सुस्त पड़ा है। महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से 15 अक्टूबर तक सिर्फ 15 मिलों में ही पेराई शुरू हो पाई थी, जबकि कर्नाटक में रेगुलर सीजन की एक भी मिल अभी तक नहीं चली है। वजह है दोनों राज्यों में चल रहा गन्ना किसानों का आंदोलन — किसान ज्यादा गन्ना भाव और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की मांग पर अड़े हैं। केंद्र ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बना दी है, लेकिन किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताकर विरोध जारी रखा है।

पेराई की मौजूदा स्थिति: नंबर क्या कहते हैं

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक महाराष्ट्र की 55 मिलों में से 15 में पेराई शुरू हुई थी। गुरुवार को 4 और मिलें चलीं, जिससे यह संख्या 19 तक पहुंच गई। बाकी 40 मिलों ने पेराई से पहले की पारंपरिक पूजा तो कर ली है, लेकिन आंदोलन की वजह से पूर्ण पैमाने पर काम शुरू नहीं हो पाया। खबरों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अगले 2-3 दिनों में 30 और मिलों के चलने की उम्मीद है।

कर्नाटक में स्थिति और भी धीमी है — रेगुलर सीजन की कोई मिल अभी तक नहीं चली। राज्य की 28 मिलों में से सिर्फ 8 मिलें स्पेशल सीजन के गन्ने की पेराई कर रही हैं। महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर किसानों के रास्ता रोको प्रदर्शन से मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ।

किसानों की मांगें: ₹60 किलो चीनी एमएसपी और ₹5000 टन गन्ना भाव

आंदोलन की जड़ में दो बड़ी मांगें हैं। पहला, किसानों को गन्ने का ज्यादा समर्थन मूल्य चाहिए। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के राजू शेट्टी ने ₹5,000 प्रति टन का गन्ना भाव मांगा है, जिसमें ₹500 प्रति टन सरकारी सब्सिडी शामिल हो। इसके अलावा सी-हेवी शीरा आधारित एथनॉल का भाव ₹70 प्रति लीटर करने की भी मांग है।

दूसरी बड़ी मांग चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को लेकर है। पीटीआई के हवाले से प्रकाशित 15 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, किसान चीनी का एमएसपी बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर की खबरों में एमएसपी को ₹31 से बढ़ाकर ₹50 करने की मांग का भी जिक्र था — अलग-अलग संगठनों के आंकड़ों में फर्क हो सकता है, लेकिन एमएसपी बढ़ाने की मांग पर सब एक हैं।

किसानों का तर्क है कि गन्ने की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है — डीजल, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और बिजली सब महंगे हुए हैं — लेकिन भाव उस अनुपात में नहीं बढ़ा। महाराष्ट्र में इस साल सूखे जैसी स्थिति ने गन्ने की उपज को भी घटाया है।

बातचीत और समिति: अब तक क्या हुआ

राजमार्ग जाम की धमकी के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के पूसा परिसर में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से करीब तीन घंटे बातचीत की थी। इसके बाद सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया। समिति की अधिसूचना जारी हो गई, लेकिन रिपोर्ट की समय-सीमा तय नहीं की गई। किसान संगठनों का कहना है कि मांगों का तुरंत समाधान नहीं होगा, इसलिए उन्होंने विरोध जारी रखा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आंदोलनकारियों से चीनी मिलों के साथ सहयोग करने और पेराई जल्द शुरू कराने की अपील की है।

दीवाली से पहले चीनी सप्लाई: जल्दी पेराई की कोशिश

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दीवाली से पहले चीनी की सप्लाई मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र में पेराई को जल्दी शुरू कराने की कोशिश हो रही है। इस सप्ताह 80 से 100 चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस मिलने की उम्मीद जताई गई है। राज्य सरकार के शुरुआती अनुमान में पिछले साल के 99 लाख टन के मुकाबले इस साल चीनी उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है।

उत्पादन घटने की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली, सूखे के कारण गन्ने की प्रति एकड़ उपज 30-40 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है। दूसरी, बड़ी मात्रा में गन्ना चारे और गुड़ इकाइयों की ओर जा रहा है। मराठवाड़ा के कई इलाकों में खड़ा गन्ना सूखने लगा है, इसलिए किसान फसल को जल्दी काटना चाहते हैं। राजू शेट्टी का दावा है कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के जिलों की चीनी मिलें देश के कुल चीनी उत्पादन का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं, इसलिए इस क्षेत्र की रुकावट का असर राष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है।

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को इस घटनाक्रम को अपने संदर्भ में समझना चाहिए।

पहला संदेश — पेराई की तारीख पर नजर रखें: पश्चिमी यूपी की मिलों की तैयारी के मुताबिक इस बार पेराई सीजन करीब 10 दिन पहले, यानी लगभग 20 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। ईमानदारी से बता दें: 2026-27 सीजन के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — पिछली सीजन का भाव (अगेती ₹400, सामान्य ₹390 प्रति क्विंटल) इस सीजन का भाव नहीं है।

दूसरा संदेश — चीनी भाव का रुझान ऊपर की ओर है: महाराष्ट्र में उत्पादन घटने और पेराई में देरी से चीनी की सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है। किसानों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि गन्ने का उचित भाव मिलने की उनकी मांग का आधार मजबूत हो रहा है।

तीसरा संदेश — सर्वे और पर्ची की तैयारी पुख्ता करें: महाराष्ट्र के किसान संगठनों ने वजन कटौती, रिकवरी के आंकड़ों में हेरफेर और प्रयोगशाला परीक्षण जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन्हें “अत्यंत संवेदनशील” बताते हुए कहा कि अन्नदाता के शोषण को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूपी के किसान अपनी पर्ची, सर्वे रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी अभी से दुरुस्त रखें, ताकि पेराई शुरू होते ही भुगतान में देरी न हो।

जवाब जानिए

प्रश्न: महाराष्ट्र में कितनी चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है? जवाब: 15 अक्टूबर तक 55 में से 15 मिलों में पेराई शुरू हुई थी, गुरुवार को 4 और मिलें चलीं। 40 मिलों ने पूजा की है लेकिन पूर्ण संचालन शुरू नहीं हुआ है।

प्रश्न: कर्नाटक में पेराई की क्या स्थिति है? जवाब: रेगुलर सीजन की कोई मिल अभी तक नहीं चली है। राज्य की 28 मिलों में से 8 मिलें सिर्फ स्पेशल सीजन के गन्ने की पेराई कर रही हैं।

प्रश्न: किसान क्या मांग रहे हैं? जवाब: गन्ने का ज्यादा समर्थन मूल्य (₹5,000 प्रति टन, जिसमें ₹500 सब्सिडी), चीनी का एमएसपी बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो और सी-हेवी एथनॉल का भाव ₹70 प्रति लीटर।

प्रश्न: रमेश चंद समिति क्या करेगी? जवाब: किसानों की शिकायतों — गन्ना भाव, एमएसपी, वजन-रिकवरी में गड़बड़ी — पर विचार करेगी। अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन रिपोर्ट की समय-सीमा तय नहीं है, जिससे किसान नाराज हैं।

प्रश्न: क्या दीवाली पर चीनी महंगी होगी? जवाब: उत्पादन घटने के अनुमान और पेराई में देरी से सप्लाई पर दबाव संभव है, इसलिए जल्दी पेराई की कोशिश हो रही है। अंतिम भाव बाजार की सप्लाई पर निर्भर करेगा।

स्रोत: द प्रिंट (पीटीआई), बिजनेस स्टैंडर्ड, किसान तक, द इकोनॉमिक टाइम्स (एग्रीइनसाइट), आवाज द वॉयस — सभी की रिपोर्ट 12 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच प्रकाशित।

(नोट: यह खबर 15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित राष्ट्रीय रिपोर्टों पर आधारित है। पेराई की स्थिति रोज बदल सकती है।)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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