21 चीनी मिलों पर 119 करोड़ का गन्ना बकाया: 31 अक्टूबर तक भुगतान का वादा, नहीं तो दंडात्मक कार्रवाई

महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खबर आई है। राज्य की 210 चीनी मिलों में से 21 मिलों पर किसानों का 119 करोड़ रुपये का गन्ना बकाया अब भी लंबित है। राज्य के चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे ने खुद यह जानकारी दी है। इनमें से 12-13 मिलों ने किसानों के साथ समझौता किया है कि वे 31 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान कर देंगी, जबकि शेष मिलों को भुगतान न करने पर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
खास बात यह है कि पिछले सीजन में पेराई करने वाली मिलों में से 99.71 प्रतिशत मिलों ने उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान पूरा कर दिया है। यानी लगभग सारी मिलों ने किसानों का पैसा चुकता कर दिया, सिर्फ 21 मिलें ही बाकी हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन मिलों का बकाया 31 अक्टूबर तक सच में चुकता होगा, और इसका असर बाकी देश के किसानों पर क्या पड़ेगा।
31 अक्टूबर की डेडलाइन: समझौता किन मिलों से हुआ
चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे के मुताबिक, बकाया वाली 21 मिलों में से 12-13 मिलों ने किसानों के साथ स्पष्ट समझौता किया है कि वे 31 अक्टूबर तक बकाया राशि का पूरा भुगतान कर देंगी। यह समझौता किसान संगठनों और प्रशासन की उपस्थिति में हुआ है।
बाकी बची मिलों के बारे में आयुक्त ने साफ कहा है कि अगर वे समय पर भुगतान नहीं करतीं, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की नजर इन मिलों पर बनी हुई है। यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि कोल्हापुर में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के प्रमुख राजू शेट्टी के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। यानी किसानों का दबाव और प्रशासन का सख्त रुख — दोनों मिलकर भुगतान पर असर डाल रहे हैं।
चीनी उत्पादन में 10 लाख टन की गिरावट की आशंका
बकाये की खबर के साथ-साथ एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई है। महाराष्ट्र में इस साल अनियमित बारिश और सूखे जैसे हालात का असर गन्ने की पैदावार पर पड़ने की आशंका है। चीनी आयुक्त के अनुसार, इस सीजन में राज्य का चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 10 लाख मीट्रिक टन घट सकता है।
कृषि विभाग और विशेषज्ञ समिति के आकलन के मुताबिक, महाराष्ट्र में इस सीजन के दौरान चीनी उत्पादन 89 से 90 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है, जबकि पिछले सीजन में 99 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह उत्पादन में करीब 9 से 10 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आ सकती है।
गन्ने की उपलब्धता कम रहने से पेराई का आंकड़ा भी घटने का अनुमान है। पिछले सीजन में महाराष्ट्र में करीब 1,045 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हुई थी, जबकि इस सीजन में यह मात्रा लगभग 900 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यही नहीं, गन्ने की कम सप्लाई का असर पेराई सीजन की अवधि पर भी पड़ेगा — पिछले साल करीब 104 दिन तक पेराई चली थी, जबकि इस बार यह अवधि घटकर लगभग 90 दिन रह सकती है। इससे राज्य की चीनी मिलों के संचालन और राजस्व पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
नए सीजन के लाइसेंस: 103 मिलों को मंजूरी
आगामी पेराई सीजन के लिए महाराष्ट्र में अब तक 103 मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 109 अन्य मिलों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया जारी है। यानी नए सीजन की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर पूरी रफ्तार से चल रही है, लेकिन कम गन्ने और छोटे सीजन के बीच मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव रहेगा।
एथेनॉल उत्पादन में 30 फीसदी गिरावट की आशंका
महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने इथेनॉल उत्पादन के लिए बड़ी रकम निवेश कर संयंत्र स्थापित किए हैं। राज्य में इथेनॉल उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता करीब 296 करोड़ लीटर है। हालांकि, चीनी आयुक्त के मुताबिक इस सीजन में इथेनॉल उत्पादन में भी लगभग 30 फीसदी गिरावट का अनुमान है।
राज्य में हर साल करीब 9 फीसदी चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जाती है।
वहीं, केंद्र सरकार की मौजूदा नीति के तहत गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बनाए गए इथेनॉल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों से उत्पादकों के विकल्प सीमित होने की आशंका है। ऐसे में चीनी मिलों को सी-हैवी शीरे और अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। गन्ने की उपलब्धता में संभावित कमी और इथेनॉल खरीद से जुड़े नीतिगत प्रतिबंधों का साझा असर उत्पादकों पर पड़ सकता है। इससे उन चीनी मिलों के निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिन्होंने इथेनॉल संयंत्रों पर बड़ी रकम खर्च की है।
यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्या मतलब है
महाराष्ट्र की यह खबर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी अहम है। पहला, उत्पादन घटने से चीनी के दामों पर ऊपर का दबाव बन सकता है, जिससे चीनी उद्योग की सेहत सुधरेगी और यूपी की मिलों की भुगतान क्षमता भी मजबूत होगी। दूसरा, यह एक सबक है — महाराष्ट्र में 99.71 प्रतिशत मिलों ने एफआरपी का भुगतान कर दिया, और बची हुई मिलों पर प्रशासन सख्त है। यूपी में भी किसानों को अपने बकाये पर नजर रखनी चाहिए और देरी होने पर तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
याद रहे, सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान और देरी होने पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान किसानों की अनिवार्य सुरक्षा है। यानी बकाया अगर लंबा खिंचे, तो किसानों को ब्याज का अधिकार भी है।
किसानों को क्या करना चाहिए
अगर आपकी मिल पर बकाया है, तो परची और तौल की रसीदें संभालकर रखें और ई-गन्ना पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। महाराष्ट्र का उदाहरण दिखाता है कि संगठित आवाज और प्रशासन की सख्ती मिलकर भुगतान दिला सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महाराष्ट्र की कितनी मिलों पर गन्ना बकाया है?
पिछले सीजन में पेराई करने वाली 210 चीनी मिलों में से 21 मिलों पर किसानों का कुल 119 करोड़ रुपये बकाया है। बाकी 99.71 प्रतिशत मिलों ने एफआरपी का भुगतान पूरा कर दिया है।
31 अक्टूबर तक भुगतान का क्या समझौता है?
चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे के मुताबिक, बकाया वाली 21 मिलों में से 12-13 मिलों ने किसानों के साथ समझौता किया है कि वे 31 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान कर देंगी। शेष मिलों को भुगतान न करने पर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन कितना घट सकता है?
कृषि विभाग और विशेषज्ञ समिति के आकलन के मुताबिक, इस सीजन में महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 89 से 90 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है, जबकि पिछले सीजन में 99 लाख मीट्रिक टन हुआ था। यानी करीब 9 से 10 लाख टन की गिरावट आ सकती है।
नए सीजन में कितनी मिलों को लाइसेंस मिला है?
आगामी पेराई सीजन के लिए महाराष्ट्र में अब तक 103 मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 109 अन्य मिलों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया जारी है।
एथेनॉल उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा?
चीनी आयुक्त के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र में इथेनॉल उत्पादन में लगभग 30 फीसदी गिरावट का अनुमान है। राज्य की इथेनॉल स्थापित क्षमता करीब 296 करोड़ लीटर है।
स्रोत: किसनतक (21 अक्टूबर 2026), व्हेल्सबुक (21 अक्टूबर 2026)
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