महाराष्ट्र में 65 मिलों की पेराई शुरू, कर्नाटक में 27 अक्टूबर को बंद की चेतावनी: यूपी किसानों के लिए 3 बड़े संकेत

देश के दो बड़े गन्ना राज्यों से एक ही हफ्ते में दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं, और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए दोनों में ही काम की खबर छिपी है। महाराष्ट्र में 22 अक्टूबर तक 65 चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2026-27 शुरू कर दिया है, जबकि कर्नाटक में किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के साथ बैठक में मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद बुलाया जाएगा। एक तरफ मिलें चल पड़ी हैं, दूसरी तरफ मूल्य को लेकर टकराव चरम पर है।
महाराष्ट्र: 65 मिलें चलीं, 158 को लाइसेंस जारी
महाराष्ट्र के गन्ना आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने चीनीमंडी को बताया कि 22 अक्टूबर तक राज्य में 65 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। अब तक 158 मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जबकि बाकी मिलों के आवेदन जांच में हैं। यह जानकारी चीनीमंडी और एग्रीइनसाइट ने 23 अक्टूबर को प्रकाशित की है। पश्चिमी महाराष्ट्र में आंदोलन के कारण रफ्तार धीमी रही, फिर भी दर्जनों मिलों का चलना दिखाता है कि सत्र अब रुकने वाला नहीं है। कोल्हापुर में दो दिन के भीतर संयुक्त बैठक से पेराई तेज होने की उम्मीद है।
उत्पादन अनुमान में बड़ा अंतर: 75 से 90.18 लाख टन तक
महाराष्ट्र के इस सत्र को लेकर सबसे दिलचस्प बात उत्पादन अनुमानों में भारी अंतर है। राज्य के गन्ना आयुक्तालय का अनुमान है कि इस सत्र में करीब 90.18 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा। वहीं वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. बी. थोंबरे ने करीब 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ उत्पादन के 80 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान लगाया है। एग्रीमंडी लाइव ने बारिश के पैटर्न और फसल की हालत का आकलन करके उत्पादन 75 लाख टन रहने का अनुमान दिया है। असमान बारिश और सूखे जैसे हालात इसका कारण बताए गए हैं। सत्र के 90 से 100 दिन चलने की उम्मीद है, जो गन्ने की उपलब्धता और मौसम पर निर्भर करेगी।
कर्नाटक: 26 अक्टूबर की बैठक, 27 को बंद की चेतावनी
कर्नाटक में कहानी दूसरे मोड़ पर है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार 25 और 26 अक्टूबर को बेलगावी जिले में रहेंगे। 26 अक्टूबर को वे सुबह 11 बजे सुवर्ण विधान सौध में चीनी मिल मालिकों से मिलेंगे और दोपहर 3.30 बजे उसी जगह गन्ना किसानों से अलग बैठक करेंगे। यह कार्यक्रम द हिंदू ने 24 अक्टूबर को प्रकाशित किया है। कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसीरु सेना के प्रदेश अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी ने बेलगावी में शनिवार को कहा कि अगर 26 अक्टूबर की बैठक में मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 अक्टूबर को कर्नाटक बंद बुलाया जाएगा। 25 अक्टूबर से गुरलापुर में सांकेतिक आंदोलन भी शुरू करने की घोषणा की गई है।
कर्नाटक किसानों की तीन मुख्य मांगें
बेलगावी में किसान नेताओं ने तीन मुख्य मांगें सामने रखी हैं। पहली मांग है कि राज्य सरकार गन्ना किसानों को प्रति टन 1,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दे। दूसरी मांग है कि चीनी मिलें गन्ने का प्रति टन 4,500 रुपये का भाव दें। तीसरी मांग गन्ना तौल में कथित गड़बड़ी रोकने की है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने और बेलगावी में गन्ना आयुक्त कार्यालय में आयुक्त की नियुक्ति की मांग की गई है। तौल गड़बड़ी, भाव का अंतर और सरकारी सहायता का सवाल हर राज्य में एक जैसा है। किसान नेताओं का कहना है कि नौ साल से भाव की मांग का समाधान नहीं हुआ है।
यूपी के लिए पहला संकेत: पेराई की रफ्तार अब नहीं रुकेगी
उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। यह जानकारी सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओ. पी. सिंह ने दी थी। पश्चिमी यूपी में सत्र करीब 20 अक्टूबर से, करीब 10 दिन पहले शुरू होने की बात थी, जो मौसम पर निर्भर थी। महाराष्ट्र में 65 मिलों के चल पड़ने के बाद यह साफ हो गया है कि देशभर में पेराई सत्र अब गति पकड़ चुका है। यूपी के किसानों के लिए इसका पहला संकेत यह है कि पर्ची, क्रय केंद्र और तौल की तैयारियों में देरी अब महंगी पड़ सकती है। सर्वे रिकॉर्ड, रकबा और किस्म जांच लें, बैंक खाता सक्रिय व पहचान दस्तावेजों से जुड़ा रखें।
यूपी के लिए दूसरा संकेत: भाव की लड़ाई अभी बाकी है
दूसरा संकेत गन्ने के भाव को लेकर है। केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य, यानी एफआरपी, 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह भाव 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर पर तय हुआ है, और रिकवरी में हर 0.1 प्रतिशत के बदलाव पर भाव में 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का बदलाव होगा। अगर रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे जाती है, तो भी किसानों को कम से कम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम भाव मिलेगा। लेकिन यूपी के किसानों को यह साफ समझ लेना चाहिए कि एफआरपी और राज्य परामर्श मूल्य, यानी एसएपी, दो अलग चीजें हैं। यूपी में सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह आंकड़ा सत्र 2025-26 का है, सत्र 2026-27 का नहीं। सत्र 2026-27 के एसएपी को लेकर किसान मांगें जारी हैं; अक्टूबर में लखनऊ में 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की मांग उठ चुकी है।
यूपी के लिए तीसरा संकेत: तौल और भुगतान पर नजर रखिए
तीसरा संकेत सबसे व्यावहारिक है, और वह है तौल और भुगतान पर नजर रखना। कर्नाटक के किसान तौल में कथित गड़बड़ी को अपनी मुख्य मांगों में शामिल कर रहे हैं, और यूपी में भी बिजनौर जैसे जिलों में क्रय केंद्रों पर तौल की मशीनें लगाने का काम पेराई सत्र से पहले युद्धस्तर पर हुआ है। बिजनौर जिले में 10 चीनी मिलें और करीब 744 गन्ना क्रय केंद्र हैं, जिनमें मिल गेट के केंद्र भी शामिल हैं। तौल पर्ची की हर लाइन, वजन, किस्म और केंद्र का नाम मिलान करके देखें, पर्ची की कॉपी संभालकर रखें। वजन में अंतर लगे तो उसी समय लिखित शिकायत दर्ज कराए।
आगे क्या होगा: 26 और 27 अक्टूबर पर सबकी नजर
आने वाले दो दिन इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे। 26 अक्टूबर को कर्नाटक के मुख्यमंत्री मिल मालिकों और किसानों से अलग-अलग बैठक करेंगे, और उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि कर्नाटक में भाव और तौल को लेकर कोई ठोस फैसला होता है या नहीं। अगर बैठक में मांगें मान ली जाती हैं, तो 27 अक्टूबर को बंद की चेतावनी वापस भी हो सकती है। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो किसान संगठनों ने बंद की चेतावनी पहले से दे रखी है, और आंदोलन के तेज होने की संभावना बढ़ जाएगी।
आपके सवाल
महाराष्ट्र में कितनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है? 22 अक्टूबर तक 65 मिलें, और 158 मिलों को लाइसेंस जारी हो चुके थे।
कर्नाटक में 27 अक्टूबर को बंद की चेतावनी क्यों है? 26 अक्टूबर की बैठक में मांगें न मानी गईं तो 27 अक्टूबर को बंद बुलाया जाएगा। मांगें: प्रति टन 1,000 रुपये सहायता, मिलों से प्रति टन 4,500 रुपये भाव, तौल गड़बड़ी पर रोक।
सत्र 2026-27 के लिए एफआरपी कितना है? 365 रुपये प्रति क्विंटल, 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर। रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे पर भी कम से कम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा।
यूपी में सत्र 2025-26 का एसएपी कितना था? अगेती 400 रुपये और सामान्य 390 रुपये प्रति क्विंटल। यह सत्र 2025-26 का आंकड़ा है, 2026-27 का नहीं।
यूपी किसान पेराई में क्या ध्यान रखें? सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता और तौल पर्ची जांचें, पर्ची की कॉपी संभालकर रखें।
सत्र 2026-27 के लिए यूपी एसएपी घोषित हुआ है? किसान मांगें जारी हैं। किसी नए आंकड़े को तभी सही मानें, जब सरकार की आधिकारिक घोषणा सामने आए।
स्रोत: चीनीमंडी (23 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट (23 अक्टूबर 2026), द हिंदू (24 अक्टूबर 2026), आईबीसी वर्ल्ड न्यूज (24 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया, द वीक।
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